24/08/2024
मेरे विचार से बिहार में कार्यरत सभी संविदा कर्मी (सभी विभाग) का लोकतांत्रिक सरकार से सिर्फ एक मांग होना चाहिए" नियमितिकरण" !
इसके लिए बाधाएं और नियम कानून बहुत बताया जाएगा लेकिन लोकतंत्र में सरकार के लिए कुछ असंभव नहीं। सरकार के द्वारा सभी के लिए नियम बनाया जा सकता है। बताया जाएगा की परीक्षा लिया जायेगा उसमे आपको वेटेज दिया जायेगा लेकिन मुझे ऐसा मांग मांगना ही नहीं। मुझे तो सिर्फ यही चाहिए "नियमतिकरण"
ऐसा नहीं की सरकार के द्वारा ऐसा कभी नहीं किया गया हो, उदाहरण के तौर पर आप सभी कृषि विभाग को देख सकते हैं इसमें एक पद है "कृषि समन्वयक" जिसे सरकार के द्वारा सिर्फ काउंसिलिंग करके नियमतीकरण किया गया। वो भी तब जब की यह कोई पूर्व में पद ही नही था। यह पद सरकार के द्वारा बनाया गया और सभी को बिना परीक्षा लिए सिर्फ काउंसिलिंग कराकर सभी को सरकारी किया गया।
इसलिए मित्रों कोई भी बहाना सरकार बनाए लेकिन सब झूठ। सरकार कोई भी नया नियम बना सकती है चाहेगी तब।
और चाहेगी कब ? जब आपमें एकता हो और संख्याबल हो। आज 20 साल बाद सरकारी कर्मी की जीत हुई उन्हें उनका पेंशन मिला। सिर्फ संख्याबल, राजनीति, मतदान , विपक्ष ये सबका मिला जुला असर है।
इसलिए मेरा बिहार के आप सभी संविदा कर्मियों (सभी विभाग) से निवेदन है आपस में मनमुटाव मिटाकर सभी को सिर्फ एक मांग लेकर एक बैनर के नीचे आकर एक संख्याबल बनकर विधानसभा चुनाव से पहले सरकार के सामने अपना पक्ष रखना चाहिए।
इस मैसेज को सभी विभाग के ग्रुप में शेयर कीजिए सभी विभाग के ग्रुप में जिला और राज्य स्तरीय ग्रुप में भी।
ताकि सभी विचार करें और अविलंब सभी इकट्ठा होकर लाखों की संख्या बनिए। फिर लड़ाई शुरू कीजिए
मुझे विश्वाश है कोई भी पार्टी की सरकार हो आखिर बात सुनेगी क्योंकि हम सभी लाखों में होंगे।