26/05/2025
सलेमपुर के पटरी दुकानदार – उजड़ती दुकानों के साथ बुझते चूल्हे
उत्तर प्रदेश के देवरिया ज़िले की सलेमपुर तहसील… जहां कभी सुबह की पहली किरण के साथ ओवरब्रिज के नीचे ज़िंदगी जागती थी। ठेले पर फल, सब्ज़ियाँ, कपड़े, खिलौने — सब कुछ बिकता था। लोग मुस्कुराते थे, ग्राहक आते थे, बच्चों के लिए टॉफियाँ मिलती थीं, बुज़ुर्गों के इलाज के लिए पैसे जुटते थे। पर आज वहाँ सन्नाटा है। वहाँ आज चीखें हैं, आंसू हैं, और टूटती उम्मीदें हैं।
प्रशासन ने "विकास" के नाम पर इन 50-60 दुकानदारों को बेघर कर दिया। और सिर्फ ये नहीं — इनके पीछे हैं लगभग 1500 परिवार, जिनका चूल्हा अब बुझ चुका है। ये वही लोग हैं जिन्होंने नगर पंचायत में पंजीकरण कराया, प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत प्रमाण पत्र पाए — फिर भी न सुना गया, न समझा गया।
एक माँ कहती है — “बेटा बुखार में तप रहा है, दवा के पैसे नहीं हैं। अगर दुकान हट गई तो मर जाएगा।”
एक पिता चुपचाप बैठा है, शायद सोच रहा है — “लोन तो लिया था, अब लौटाएंगे कैसे?”
एक बूढ़ी माँ कांपते हाथों से ठेले का टूटा पहिया उठा रही है — जैसे अपने बेटे का बिखरा भविष्य जोड़ रही हो।
यह सिर्फ दूकानें नहीं थीं, यह रोटियों की फैक्ट्री थी। कोई अपना पेट काटकर बच्चों की किताबें खरीदता था, कोई बेटी की शादी के लिए पैसे जोड़ रहा था। लेकिन आज? आज वही लोग लाठी खा रहे हैं, घसीटे जा रहे हैं, क्योंकि वो “अवैध अतिक्रमण” हैं!
सोचिए, जो सरकार उनके नाम प्रमाण पत्र देती है, योजना में लोन देती है, वही उन्हें जबरन हटवा भी देती है। क्या ये दोहरा मापदंड नहीं? क्या गरीब होना अब अपराध है?
हमें यह समझना होगा — विकास केवल इमारतों से नहीं, इंसानों से होता है। जब सड़कें साफ़ हों, लेकिन दिलों में चीखें हों, तब कोई समाज तरक्कीशुदा नहीं कहलाता।
हर दिन वो दुकानदार अपनी पत्नी, बच्चे और बूढ़े माँ-बाप के साथ उस पुल के नीचे खड़े रहते हैं — एक बार फिर से जगह मिलने की उम्मीद लिए। मगर उम्मीद भी आखिर कब तक जिंदा रहे?
ये लेख सिर्फ आँकड़े नहीं, ये उस वर्ग की चीख है जिसे हमेशा नजरअंदाज किया गया।
यदि आज हम चुप रहे, तो कल और भी चूल्हे बुझेंगे। ज़रूरत है कि हम आवाज़ उठाएं — ताकि सरकार को समझ आए कि फुटपाथ पर भी इंसान रहते हैं, और उनका जीवन भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना किसी मंत्री की मुस्कान।
कभी-कभी सबसे ज़्यादा दर्द वहीं होता है जहाँ सबसे ज़्यादा चुप्पी होती है।
Salempur Deoria (Up)
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