06/02/2026
दो प्रवास, एक यात्रा
भिलाई से रायपुर और रायपुर से भिलाई— यदि दोनों यात्राएँ में एक-दूसरे से न मिले तो दोनों के लिए वह प्रवास अधूरा ही रह जाता है।
क्योंकि कुछ रिश्ते दूरी से नहीं,
मिलन से पूर्ण होते हैं।
पिछले अड़तालीस वर्षों से यह केवल दो व्यक्तियों की नहीं,
दो प्रवृत्तियों की संगति है—
एक शांत, गंभीर और अध्ययनशील,
तो दूसरा ऊर्जावान, आक्रामक और जनभूमि से जुड़ा हुआ।
एक विचारों की तलवार से लड़ता रहा,
तो दूसरा संघर्ष की ढाल लेकर सड़क पर डटा रहा।
एक मंच का सशक्त वक्ता,
तो दूसरा मौन में भी प्रभाव छोड़ जाने वाला रणनीतिकार।
रवि शंकर विश्वविद्यालय के प्रांगण में जन्मी यह मित्रता,
केवल छात्र राजनीति की कहानी नहीं,
बल्कि एक विचारधारा की दीर्घ साधना है।
वहीं से शुरू हुई वह यात्रा,
आज भी उम्र के इस पड़ाव पर
उसी ऊष्मा और उसी विश्वास के साथ आगे बढ़ रही है।
स्वर्गीय गोविंद सारंग जैसे गुरु के सान्निध्य में
दोनों ने राजनीति की वर्णमाला सीखी।
युवा मोर्चा में धूमकेतु की तरह उभरे,
और देखते ही देखते
प्रदेश की राजनीति में स्थायी नक्षत्र बन गए।
एक समय मध्यप्रदेश की राजनीति में
इनकी टोली की गूंज दूर तक सुनाई देती थी।
माननीय बृजमोहन अग्रवाल जी व माननीय प्रेमप्रकाश पाण्डेय जी
सुंदरलाल पटवा के विश्वासपात्र सहयोगी के रूप में मध्यप्रदेश
मंत्रिमंडल की जिम्मेदारियाँ निभाईं,
तो छत्तीसगढ़ में मंत्री और सशक्त विधायक बनकर
जनहित की आवाज़ बुलंद की।
विधानसभा में जब ये प्रश्नों की बौछार करते थे,
तो सत्ता पक्ष के उत्तर भी ठहर जाते थे।
कोई विषय, कोई समस्या, कोई पीड़ा
इनकी दृष्टि से छूट नहीं पाती थी।
इनकी राजनीति कभी केवल सत्ता की नहीं रही,
यह सेवा, संवाद और संघर्ष का संगम रही।
यही कारण है कि
राजनीतिक मतभेदों के बीच भी
इनकी मित्रता कभी कमजोर नहीं हुई।
आज भी जब एक भिलाई आता है
और दूसरा रायपुर जाता है,
तो बिना मिले वह यात्रा अधूरी लगती है।
परिवारों की आत्मीयता,
आपसी सम्मान और विश्वास
इस रिश्ते को और मजबूत बनाते हैं।
प्रवास पर आज मिलन और दुगना हो गया जब प्रेमप्रकाश पाण्डेय जी की पोती मोहन दादा के संबोधन से बृजमोहन अग्रवाल जी को संबोधित कर रहे थे ।
दुर्ग में आयोजित
राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण की बैठक के बाद फिर वही पुरानी मंडली बैठी—
हँसी, स्मृतियाँ, विचार और योजनाएँ।
वक्त बदला, मंच बदले,
पर भावनाएँ वही रहीं।
कई बसंत बीत गए,
बालों में सफेदी उतर आई,
पर मित्रता का बसंत
आज भी खिला हुआ है।
उसका रंग हर वर्ष और गहरा होता जा रहा है।
यह कहानी केवल दो नेताओं की नहीं,
यह विश्वास, प्रतिबद्धता और वैचारिक संगति की गाथा है।
यह बताती है कि
राजनीति यदि रिश्तों और मूल्यों से जुड़ी हो,
तो वह जीवन भर साथ निभाती
( मनोज शुक्ला)
Bjp Chhattisgarh Brijmohan Agrawal Prem Prakash Pandey