14/12/2024
सादर नमन।
कविश्वर चन्दा झा: मैथिली साहित्यक आधारस्तंभ
कविश्वर चन्द्रकान्त झा (चन्दा झा) मैथिली साहित्यक ओ अमर विभूति छथि, जिनकर योगदान मिथिलाक सांस्कृतिक इतिहासमे स्वर्णाक्षरमे अंकित अछि। हिनकर जन्म 1831 ई. में सहरसा जिलाक बड़गांव (ननिहाल) में भेल। हिनकर पिता पंडित भोला झा छलाह। चन्दा झा अपन 17 साल तक प्रारंभिक जीवन बड़गांव में बितेलाह। पिंडारुच (दरभंगा) में जमींदारसँ परेशानीक कारण ओ अपन पैतृक गाम छोड़ि, मधुबनी जिलाक ठाढ़ी गाम (ससुराल) में स्थायी रूपे बसि गेलाह।
मैथिली साहित्यक निर्माणक अग्रदूत
चन्दा झा मैथिली साहित्य केँ आधुनिक भाषाक रूपमे स्थापित करबाक लेल अमूल्य योगदान देने छथि। विद्यापति जेना 14म शताब्दी में मैथिली केँ स्थापित कएलाह, ओहने महत्वपूर्ण भूमिका चन्दा झा 19म शताब्दी में निभेलाह। कहल जाइत अछि, "विद्यापति मैथिली साहित्यक आरंभ केलाह, मुदा चन्दा झा ओकरा एकर आधार प्रदान केलाह।"
हिनकर लेखनी मैथिली भाषा केँ केवल साहित्यिक स्वरूप नहि देलक, बल्कि समाजक विभिन्न कुरीति, अंधविश्वास आ अशिक्षा पर प्रहार कयल। हिनकर योगदान मैथिली भाषाक प्रति एतबा गहिर रहल जे ओ मैथिली केँ भारतीय आधुनिक भाषाक समतुल्य स्तर पर पहुँचेलाह।
प्रमुख रचनावली आ साहित्यिक योगदान
1. मैथिली रामायण: चन्दा झा द्वारा रचित रामायण मैथिली भाषामे ओहन उत्कृष्ट कृति अछि, जे जनमानसक भावना आ भक्ति केँ गहिर अर्थ प्रदान करैत अछि।
2. सांस्कृतिक संरक्षण: हिनकर रचना केवल साहित्यिक नहि, बल्कि मिथिला समाजक सांस्कृतिक आ नैतिक धरोहरक भी संरक्षक अछि।
3. भाषा-संवर्धन: मैथिली केँ आधुनिक भाषाक स्वरूप दैत हिनका "मैथिली साहित्यक जनक" कहल जाइत अछि।
समाज सुधारक रूपमे योगदान
चन्दा झा केवल साहित्यकार नहि, बल्कि एक समाज सुधारक सेहो छलाह।
अंधविश्वासक विरोध: हिनका रचनामे जाति-पाति आ सामाजिक अन्यायक खिलाफ तीव्र संदेश भेटैत अछि।
शिक्षाक प्रचार-प्रसार: मैथिली साहित्यक माध्यमसँ शिक्षा आ नैतिकता पर जोर देल गेल।
मिथिलाक सांस्कृतिक पहचान: मिथिलाक संस्कृति, परंपरा आ भाषाक संरक्षणमे हिनकर भूमिका अविस्मरणीय अछि।
महत्वपूर्ण स्थान
बड़गांव (सहरसा): जन्मस्थान आ प्रारंभिक जीवनक गवाह।
पिंडारुच (दरभंगा): पैतृक गांव।
ठाढ़ी गाम (मधुबनी): स्थायी निवास।
🌟 विरासत आ उपेक्षा
दुखक गप अछि जे मिथिलाक एहन महानायक पर आइ समाज मौन अछि। विद्यापति पर जतेक चर्चा आ दिवस मनाओल जाइत अछि, चन्दा झा पर ओहन ध्यान नहि दिआल जाइत अछि। मिथिला समाज केँ चाही जे हिनकर योगदान केँ सहेजथि आ मैथिली साहित्यक एहि अग्रदूत केँ सम्मान प्रदान करथि।
मिथिलाक एहि पुत्र केँ शत-शत नमन।
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