नकुड विधानसभा युवा मोर्चा आजाद समाज पार्टी - "कांशीराम".

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नकुड विधानसभा युवा मोर्चा आजाद समाज पार्टी - "कांशीराम". आप सभी साथियों का नकुड विधान सभा युवा मोर्चा आजाद समाज पार्टी कांशीराम फेसबुक पेज पर स्वागत है

17/07/2021

*जय भीम, जय भीम आर्मी, आजाद समाज पार्टी जिंदाबाद,*
सम्मानित सभी पदाधिकारीगण एवं सम्मानित सभी भीम आर्मी एवं आजाद समाज पार्टी के पदाधिकारियों को सूचित किया जाता है की आने वाली *19 जुलाई 2021* को सरसावा ब्लॉक में साइकिल यात्रा निकालने के लिए सभी पदाधिकारीगण और सभी जिम्मेदार साथी बड़ी ही जोर शोर से इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए तैयारी करें, इस बहुजन साइकिल यात्रा को सफल बनाना आपकी स्वयं की जिम्मेदारी है क्योंकि किसी भी सामाजिक लड़ाई को लडने के लिये विशेष व्यक्ति को न्योता नही दिया जाता है, सरसावा ब्लॉक के सभी साथियों से उम्मीद ही नही बल्कि पूर्ण विश्वास है, कि आप इस महापुरुषों के मिशन को आगे बढ़ाने के लिए आप सभी पूरी मजबूती के साथ तैयारी करेंगे ।

*निवेदन कर्ता:–*
आपका छोटा भाई *अक्षय कुमार ओजस्वी*

जय भीम सम्मानित साथियों वार्ड नंबर 14 से आज़ाद समाज पार्टी कांशीराम के जिला पंचायत प्रत्याशी मनीषा पत्नि डॉक्टर अरविंद ह...
11/04/2021

जय भीम सम्मानित साथियों वार्ड नंबर 14 से आज़ाद समाज पार्टी कांशीराम के जिला पंचायत प्रत्याशी मनीषा पत्नि डॉक्टर अरविंद होंगी जिनका चुनाव निशान खजूर का पैड है, वार्ड नंबर 14 का जो प्रत्याशी था उसकी गलती के कारण यह निर्णय लिया गया है, जो कुछ भी अभी तक हुआ है उस पर चुनाव के बाद चर्चा होगी

निजीकरण लेटरल एंट्री कोलेजियम सिस्टम कृषि कानून व अन्य दलित व देश विरोधी नीतियों व कानूनों के खिलाफ 7 मार्च 2021 को चन्द...
09/02/2021

निजीकरण लेटरल एंट्री कोलेजियम सिस्टम कृषि कानून व अन्य दलित व देश विरोधी नीतियों व कानूनों के खिलाफ 7 मार्च 2021 को चन्द्र शेखर आजाद जी ने संसद भवन का घेराव करने की घोषणा की है हम इसका पूर्ण समर्थन करते है व जनसम्पर्क करके ज्यादा से ज्यादा संख्या में दिल्ली जाने के लिए लोगो से आह्वान करते है

भीम आर्मी प्रमुख और आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एड.चन्द्र शेखर आज़ाद जी को हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के वार्षिक आल ...
18/01/2021

भीम आर्मी प्रमुख और आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एड.चन्द्र शेखर आज़ाद जी को हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के वार्षिक आल इंडिया कॉन्फ्रेंस में बतौर गेस्ट Anti Caste Struggle पर व्याख्यान देंगे।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुजनों का प्रतिनिधित्व करने के लिए उन्हें दिली बधाई। कार्यक्रम का समय 21 फरवरी, 2021, 9.30 pm, IST. Bhimarmychief

जलती धूप में वह आरामदायक छाँव है।मेलों में कंधों पर लेकर चलने वाला पाँव है।।मिलती है जिंदगी में हर खुशी उनके होने से।कभी...
11/01/2021

जलती धूप में वह आरामदायक छाँव है।
मेलों में कंधों पर लेकर चलने वाला पाँव है।।
मिलती है जिंदगी में हर खुशी उनके होने से।
कभी भी उल्टा नहीं पड़ता पिता वो दाँव है।।

मेरा रुतबा, मेरा मान है पिता।
मुझे हिम्मत देने वाला मेरा अभिमान है पिता।
सारे रिश्ते उनके दम से सारी बातें उनसे हैं
सारे घर के दिल की धड़कन सारे घर की जान है पिता।

भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर भाई के पिताजी को उनकी पुण्यतिथि पर कोटि-कोटि नमन

डॉ. आंबेडकर ने मनुस्मृति का दहन क्यों किया ?__________________________________________–25 दिसम्बर,1927 मनुस्मृति दहन दिव...
25/12/2020

डॉ. आंबेडकर ने मनुस्मृति का दहन क्यों किया ?
__________________________________________
–25 दिसम्बर,1927 मनुस्मृति दहन दिवस विशेष

डॉ. आंबेडकर मनुस्मृति को ब्राह्मणवाद की मूल संहिता मानते थे। यह किताब द्विजों को जन्मजात श्रेष्ठ और पिछडों, दलित एवं महिलाओं को जन्म के आधार पर निकृष्ट घोषित करती है। शूद्र (obc), अतिशूद्र (sc), अवर्ण (st) एवं महिलाओं का एक मात्र कर्तव्य द्विजों और मर्दों का सेवा करना बताती है। मनुस्मृति के प्रावधानों के बारे में विस्तार से ।

25 दिसंबर 1927 को डॉ अंबेडकर ने पहली बार मनुस्मृति में दहन का कार्यक्रम किया था। उनका कहना था कि भारतीय समाज में जो कानून चल रहा है। वह मनुस्मृति के आधार पर है। यह एक ब्राम्‍हण, पुरूष सत्‍तात्‍मक, भेदभाव वाला कानून है। इसे खत्म किया जाना चाहिए इसीलिए वे मनुस्मृति का दहन कर रहे हैं।

आईये संक्षिप्‍त में जाने आ‍खिर मनुस्‍मृति में ऐसा है क्‍या ?

नीच वर्ण का जो मनुष्य अपने से ऊँचे वर्ण के मनुष्य की वृत्ति को लोभवश ग्रहण कर जीविका – यापन करे तो राजा उसकी सब सम्पत्ति छीनकर उसे तत्काल निष्कासित कर दे।10/95-98

ब्राह्मणों की सेवा करना ही शूद्रों का मुख्य कर्म कहा गया है । इसके अतिरक्त वह शूद्र जो कुछ करता है , उसका कर्म निष्फल होता है।10/123-124

शूद्र धन संचय करने में समर्थ होता हुआ भी शूद्र धन का संग्रह न करें क्योंकि धन पाकर शूद्र ब्राह्मण को ही सताता है। 10/129-130

जिस देश का राजा शूद्र अर्थात पिछड़े वर्ग का हो , उस देश में ब्राह्मण निवास न करें क्योंकि शूद्रों को राजा बनने का अधिकार नही है। 4/61-62

राजा प्रातःकाल उठकर तीनों वेदों के ज्ञाता और विद्वान ब्राह्मणों की सेवा करें और उनके कहने के अनुसार कार्य करें। 7/37-38

जिस राजा के यहां शूद्र न्यायाधीश होता है उस राजा का देश कीचड़ में धँसी हुई गाय की भांति दुःख पाता है। 8/22-23

ब्राह्मण की सम्पत्ति राजा द्वारा कभी भी नही ली जानी चाहिए, यह एक निश्चित नियम है, मर्यादा है, लेकिन अन्य जाति के व्यक्तियों की सम्पत्ति उनके उत्तराधिकारियों के न रहने पर राजा ले सकता है। 9/189-190

यदि शूद्र तिरस्कार पूर्वक उनके नाम और वर्ण का उच्चारण करता है, जैसे वह यह कहे देवदत्त तू नीच ब्राह्मण है, तब दस अंगुल लम्बी लोहे की छड़ उसके मुख में कील दी जाए। 8/271-272

यदि शूद्र गर्व से ब्राह्मण पर थूक दे, उसके ऊपर पेशाब कर दे तब उसके होठों को और लिंग को और अगर उसकी ओर अपान वायु निकाले तब उसकी गुदा को कटवा दे। 8/281-282

यदि कोई शूद्र ब्राह्मण के विरुद्ध हाथ या लाठी उठाए, तब उसका हाथ कटवा दिया जाए और अगर शूद्र गुस्से में ब्राह्मण को लात से मारे, तब उसका पैर कटवा दिया जाए। 8/279-280

इस पृथ्वी पर ब्राह्मण–वध के समान दूसरा कोई बड़ा पाप नही है। अतः राजा ब्राह्मण के वध का विचार मन में भी लाए। 8/381

शूद्र यदि अहंकारवश ब्राह्मणों को धर्मोपदेश करे तो उस शूद्र के मुँह और कान में राजा गर्म तेल डलवा दें। 8/271-272

शूद्र को भोजन के लिए झूठा अन्न, पहनने को पुराने वस्त्र, बिछाने के लिए धान का पुआल और फ़टे पुराने वस्त्र देना चाहिए ।10/125-126

बिल्ली, नेवला, नीलकण्ठ, मेंढक, कुत्ता, गोह, उल्लू, कौआ किसी एक की हिंसा का प्रायश्चित शूद्र की हत्या के प्रायश्चित के बराबर है अर्थात शूद्र की हत्या कुत्ता बिल्ली की हत्या के समान है। 11/131-132

यदि कोई शूद्र किसी द्विज को गाली देता है तब उसकी जीभ काट देनी चाहिए, क्योंकि वह ब्रह्मा के निम्नतम अंग से पैदा हुआ है।

निम्न कुल में पैदा कोई भी व्यक्ति यदि अपने से श्रेष्ठ वर्ण के व्यक्ति के साथ मारपीट करे और उसे क्षति पहुंचाए, तब उसका क्षति के अनुपात में अंग कटवा दिया जाए।

ब्रह्मा ने शूद्रों के लिए एक मात्र कर्म निश्चित किया है, वह है – गुणगान करते हुए ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य की सेवा करना।

शूद्र यदि ब्राह्मण के साथ एक आसन पर बैठे, तब राजा उसकी पीठ को तपाए गए लोहे से दगवा कर अपने राज्य से निष्कासित कर दे।

राजा बड़ी-बड़ी दक्षिणाओं वाले अनेक यज्ञ करें और धर्म के लिए ब्राह्मणों को स्त्री, गृह शय्या, वाहन आदि भोग माधक पदार्थ तथा धन दे।

जान बूझकर क्रोध से यदि शूद्र ब्राह्मण को एक तिनके से भी मारता है, वह 21 जन्मों तक कुत्ते-बिल्ली आदि पाप श्रेणियों में जन्म लेता है।

ब्रह्मा के मुख से उत्पन्न होने से और वेद के धारण करने से धर्मानुसार ब्राह्मण ही सम्पूर्ण सृष्टि का स्वामी है।

शूद्र लोग बस्ती के बीच में मकान नही बना सकते। गांव या नगर के समीप किसी वृक्ष के नीचे अथवा श्मशान पहाड़ या उपवन के पास बसकर अपने कर्मों द्वारा जीविका चलावें ।

ब्राह्मण को चाहिए कि वह शूद्र का धन बिना किसी संकोच के छीन ले क्योंकि शूद्र का उसका अपना कुछ नही है। उसका धन उसके मालिक ब्राह्मण को छीनने योग्य है।

राजा वैश्यों और शूद्रों को अपना अपना कार्य करने के लिए बाध्य करने के बारे में सावधान रहें, क्योंकि जब ये लोग अपने कर्तव्य से विचलित हो जाते हैं तब वे इस संसार को अव्यवस्थित कर देते हैं।

शूद्रों का धन कुत्ता और गदहा ही है। मुर्दों से उतरे हुए इनके वस्त्र हैं। शूद्र टूटे-फूटे बर्तनों में भोजन करें। शूद्र महिलाएं लोहे के ही गहने पहने।

यदि यज्ञ अपूर्ण रह जाये तो वैश्य की असमर्थता में शूद्र का धन यज्ञ करने के लिए छीन लेना चाहिए।

दूसरे ग्रामवासी पुरुष जो पतित, चाण्डाल, मूर्ख और धोबी आदि अंत्यवासी हो, उनके साथ द्विज न रहें। लोहार, निषाद, नट, गायक के अतिरिक्त सुनार और शस्त्र बेचने वाले का अन्न वर्जित है।

शूद्रों के साथ ब्राह्मण वेदाध्ययन के समय कोई सम्बन्ध नही रखें, चाहे उस पर विपत्ति ही क्यों न आ जाए।

स्त्रियों का वेद से कोई सरोकार नही होता। यह शास्त्र द्वारा निश्चित है। अतः जो स्त्रियां वेदाध्ययन करती हैं, वे पापयुक्त हैं और असत्य के समान अपवित्र हैं, यह शाश्वत नियम है।

अतिथि के रूप में वैश्य या शूद्र के आने पर ब्राह्मण उस पर दया प्रदर्शित करता हुआ अपने नौकरों के साथ भोज कराए।

शूद्रों को बुद्धि नही देनी चाहिए। अर्थात उन्हें शिक्षा ग्रहण करने का अधिकार नही है। शूद्रों को धर्म और व्रत का उपदेश न करें।

जिस प्रकार शास्त्र विधि से स्थापित अग्नि और सामान्य अग्नि, दोनों ही श्रेष्ठ देवता हैं, उसी प्रकार ब्राह्मण चाहे वह मूर्ख हो या विद्वान दोनों ही रूपों में श्रेष्ठ देवता है।

शूद्र की उपस्थिति में वेद पाठ नहीं करनी चाहिए।

ब्राह्मण का नाम शुभ और आदर सूचक, क्षत्रिय का नाम वीरता सूचक, वैश्य का नाम सम्पत्ति सूचक और शूद्र का नाम तिरस्कार सूचक हो।

दस वर्ष के ब्राह्मण को 90 वर्ष का क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र पिता समान समझ कर उसे प्रणाम करे।

*मनु के इन कानूनों से* अनुमान लगाया जा सकता है कि शूद्रों, अतिशूद्रों और महिलाओं पर किस प्रकार और कितने अमानवीय अत्याचार हुए हैं।

अक्षय कुमार ओजस्वी
नकुड विधान सभा अध्यक्ष
युवा मोर्चा आजाद समाज पार्टी कांशीराम

24/12/2020

_*🇪🇺📚🇮🇳🙏जय भीम🙏🇮🇳📚🇪🇺*_

_*क्या भारत में लोकतंत्र खतरे में है?*_

आइए, जानते हैं विश्वविख्यात महान चिंतकों के विचार....

“राजनैतिक लोकतंत्र तब तक टिकाऊ नहीं हो सकता है, जब तक कि इसके मूल में सामाजिक लोकतंत्र ना हो। सामाजिक लोकतंत्र का अर्थ क्या है? जीने का वह तरीका, वह जीवन शैली जिसमें आजादी, बराबरी और भाईचारे को जीवन के सिद्धांत के रूप में माना जाता हो।”
*"संविधान निर्माता डॉ बीआर अम्बेडकर"*

“लोकतंत्र में संपूर्ण राष्ट्र की समृद्धि, शांति और खुशहाली के लिए एक-एक नागरिक का कल्याण, उनकी निजता और उनकी खुशी महत्वपूर्ण है।”
_*"देश के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम"*_

“लोकतंत्र ‘जनता का, जनता के द्वारा, जनता के लिए' शासन है।”
_*"अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन'*_

“मेरा सिद्धांत यह है कि लोकतंत्र में बहुमत की इच्छा ही लागू होनी चाहिए।”
_*"महान राजनीतिक चिंतक थॉमस जेफरसन"*_

“लोकतंत्र में गरीबों के पास अमीरों की तुलना में अधिक शक्ति होगी क्योंकि वे संख्या में अधिक होंगे और बहुमत की इच्छा सर्वोपरि होगी।”
_*"महान राजनीतिक-सामाजिक चिंतक अरस्तू"*_

उक्त महान राजनीतिक और सामाजिक चिंतकों के विचारों के अनुसार भारत में लोकतंत्र के तहत लोककल्याणकारी सत्ता का शासन नहीं है

क्योंकि

भारत में बहुसंख्यक जनता के हितों को दरकिनार करके तनिक पूंजीपतियों के हाथों में सत्ता कठपुतली बनकर नाच रही है....

अर्थात वर्तमान सत्ता जनता की हितैषी ना होकर कुछ पूंजीपतियों की हितैषी हो गई है....

अतः यह कहने में कोई अतिश्योक्ति नहीं है कि भारत में लोकतंत्र खतरे में है,

इसीलिए भारत में लोकतंत्र बचाने की सख्त आवश्यकता है, वरना जनता चिखती-पुकारती रहेगी, उसकी सुनवाई करने वाला कोई नहीं होगा....

जय संविधान। जय जवान।। जय किसान।।।

अक्षय कुमार ओजस्वी
नकुड विधान सभा अध्यक्ष
युवा मोर्चा आजाद समाज पार्टी कांशीराम

23/12/2020

थोड़ा समय निकालकर जरुर पढें।

जब बड़ौदा के महाराज ने बाबा साहब को वजीफा दिया और बाबा साहब विदेश जा कर पढ़ना चाहते तो उनकी पत्नी रमाबाई और 5 बच्चे थे तो देखिए वह किस प्रकार से बाबा साहब अपनी बात रमाबाई के सामने रखते हैं

बाबा साहेब - रमा बड़ौदा के महाराज ने मुझे वजीफा दिया है और मैं विदेश जा कर पढ़ना चाहता हूं लेकिन जब मैं तेरी तरफ मुड़कर देखता हूं तेरे पास 5 बच्चे हैं आमदनी का कोई साधन नहीं है और मैं भी तुझे कोई पैसा देकर नहीं जा रहा हूं क्या ऐसी परिस्थिति में तू मुझे विदेश जाकर पढ़ने की अनुमति देगी

रमाबाई - बाबा साहब यह बात सच है कि मेरे पास 5 बच्चे हैं और आमदनी का भी कोई साधन नहीं है और आप भी मुझे कोई पैसा देकर नहीं जा रहे हो लेकिन मैं आपको भरोसा दिलाती हूं आप अपनी इच्छा को पूरी करके आना आप अपनी पढ़ाई को पूरी करके आना इन 5 बच्चों का पेट मैं खुद पाल लूंगी, और जब माता रमाबाई बाबा साहब को भरोसा दिलाती हैं तो बाबासाहब विदेश चले जाते हैं और अपनी पढ़ाई करते हैं और इधर माता रमाबाई अपने 5 बच्चों के पेट को पालने के लिए क्या करती है

माता रमाबाई मुंबई की गलियों से गोबर उठा कर लाती उसके बाद उपले बनाकर मुंबई की गलियों में उपले बेच कर आया करती और उससे जो पैसा आ जाता अपने बच्चों का पेट पालती है
इतना पैसा नहीं आता था कि वह अपने बच्चों की परवरिश कर पाती देखते ही देखते उनका बड़ा बेटा दामोदर बीमार हो गया इलाज के पैसे नहीं थे इलाज नहीं करवाया और दामोदर इस दुनिया को छोड़ कर चला गया यह बात माता रमाबाई ने बाबा साहब को नहीं बताई

(बाबा साहब द्वारा भेजा गया पत्र)

नानकचंद रत्तू खत पढ़ते हुए- बाबा साहब कहते हैं कि रामा मैं यहां अगर एक वक्त का खाना खाता हूं तब भी मेरा काम नहीं चल पा रहा है मैं अपना जीवन बड़ी मुश्किल में व्यतीत कर रहा हूं में अपना सुबह का नाश्ता दोपहर में करता हूं और शाम को मैं पानी पीकर अपना काम चला रहा हूं और मैं जानता हूं कि तेरे सामने भी बहुत विफल परिस्थितियां हैं तेरे पास पांच बच्चे हैं और आमदनी का भी कोई साधन नहीं है फिर भी अगर हो सके तो कुछ पैसा भिजवा देना

इधर माता रमाबाई ने बड़ी मुश्किल से कुछ पैसा इकट्ठा किया था लेकिन उनकी बेटी इंदु बीमार हो जाती है अब माता रमाबाई के सामने एक बहुत बड़ा सवाल था कि वे उस पैसे से अपनी बेटी का इलाज कराएं या अपने पति को दिए गए वचन को निभाएं लेकिन एक मां ने फैसला किया और वह पैसा बाबा साहब को भेज दिया और इधर उनकी बेटी इंदू ने भी दम तोड़ दिया और यह बात भी माता रमाबाई ने बाबा साहब को नहीं बताई और बाबा साहब पढ़ते रहे और कुछ समय के बाद बाबा साहब अपनी पढ़ाई छोड़कर बड़ौदा के महाराज की रियासत में नौकरी करने के लिए आते हैं तो रमाबाई खुश होती है और क्या कहती है

रमाबाई - अब तो मेरा पति डॉक्टर बन के आ रहा है अब मेरा पति नौकरी करेगा तनखा कमा कर लाएगा अब तो अपने बच्चों को मैं भरपेट खाना खिलाऊंगी अब तो मेरी जिंदगी के दिन बदल जाएंगे

बाबा साहब जब दफ्तर में प्रवेश करते हैं

चपरासी - टाट को खींच लेता है और पानी के घड़े को उठाकर अलग रख देता है

बाबा साहब - अरे चपरासी जरा मुझे फाइल तो लाकर देना
चपरासी - फाइल को भी डंडे से उठा कर देता है
बाबा साहब क्या बदतमीजी है यह क्या हो रहा है तू एक चपरासी होकर मेरे साथ ऐसा व्यवहार क्यों कर रहा है

चपरासी - अंबेडकर तुम पढ़-लिख जरूर गए हो लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि तुम हमारी बराबरी पर आ गए हो तुम आज भी नीच हो और तुम्हारे साथ में काम करके अपना धर्म नष्ट नहीं कर सकता

बाबा साहब - क्या मतलब मेरे साथ तेरा धर्म कैसे नष्ट हो सकता है और तू जानता है कि मैं तुझे नौकरी से निकाल सकता हूं

चपरासी - अंबेडकर यह बात में अच्छे से जानता हूं और तुम मुझे नौकरी से भले ही निकाल दो लेकिन मैं तुम्हारे साथ रहकर इस दफ्तर में काम नहीं कर सकता

बाबा साहब मैं ऐसे अपमानजनक स्थान पर और अधिक नौकरी नहीं कर सकता

संचालक - बाबा साहब ने 11वें ही दिन अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया और अपने घर के लिए निकलते हैं और बड़ौदा के रेलवे स्टेशन पर पहुंच जाते हैं वहां उनकी ट्रेन 4 घंटे लेट होती है तो बाबा साहब एक पेड़ के नीचे बैठ जाते हैं और क्या कहते हैं

बाबा साहब - मैं पहले यह सोचता था कि हमारे लोग मरे पशुओं को उठाते हैं उनकी खाल खींचते हैं और उनका मांस खाते हैं हमारे लोग दूसरों की टट्टी को अपने सर ऊपर उठाकर फेंकने का काम करते हैं मेरे लोग गंदे रहते हैं उनके पास पहनने के लिए अच्छे कपड़े नहीं है और उनके पास पैसा भी नहीं है तो हो सकता है यह लोग हमारे लोगों से इसलिए ऐसा व्यवहार करते हैं हो सकता है यह लोग हमारे लोगों को इसीलिए नीच कहते है लेकिन आज तो मैंने यूरोप के कपड़े पहने हैं अमेरिका और जापान की यूनिवर्सिटियों से शिक्षा प्राप्त की है और एक अधिकारी बनकर मैं यहां आया हूं जब ये मेरे साथ ऐसा व्यवहार कर रहे हैं तो जो मेरे समाज के अशिक्षित और अनपढ़ लोग हैं तो ये लोग उनके साथ कैसा व्यवहार करते होंगे (रोते हुए) अगर मैं अपने समाज को इस ग़ुरबत और गुलामी से आजाद नहीं करा पाया तो मैं वापस बड़ौदा लौट कर नहीं आऊंगा और मैं खुद को गोली मार लूंगा

बाबा साहब जब नौकरी छोड़कर अपने घर पहुंचते हैं और यह बात रमाबाई को पता चलती है तो रमाबाई को बहुत दुख होता है

बाबा साहब - रमा मैं नौकरी तो करना चाहता था लेकिन वहां का चपरासी मुझे फाइल डंडे में बांध कर देता पानी के घड़े को उठाकर अलग रख लेता और वहां के लोगों ने भी मुझे मारने की योजना बनाई मैं ऐसे अपमानजनक स्थान पर नौकरी नहीं कर सकता था इसीलिए मैं नौकरी छोड़ कर चला आया

रमाबाई - बाबा साहब आपको जैसा अच्छा लगे आप ऐसा काम करें मैं आपके साथ हूं

फिर बाबा साहब को अपनी अधूरी पढ़ाई और बड़ौदा रेलवे स्टेशन पर लिए गए संकल्प का ख्याल आता है तो बाबासाहब फिर से विदेश जाकर हम सब की गुलामी का कारण जो हिंदू धर्म के ग्रंथों में लिखा हुआ है उसे खोजते हैं इधर उनका तीसरा बेटा रमेश भी इस दुनिया को छोड़ कर चला जाता है इस प्रकार से बाबा साहब के तीन बच्चे कुर्बान हो जाते हैं और जब बाबा साहब विदेश से लौट कर आते हैं और हमारी गुलामी व नीचता का कारण हमें बताते हैं

बाबा साहब - मैं कड़ी मेहनत और लगन से यह जान पाया हूं कि हमारे समाज के लोगों के साथ जो नीचता भरा और गुलामी का व्यवहार हो रहा है उसका कारण हिंदू धर्म के जो ग्रंथ हैं उनमें लिखा हुआ है और मैं आज यह घोषणा करता हूं कि 25 दिसंबर सन 1927 को पूरी देश के मीडिया को सूचना देकर इस हिंदू धर्म के पवित्र ग्रंथ को अग्नि की भेंट चढ़ा कर आप सब को आजाद कर दूंगा

संचालक - और बाबा साहब 25 दिसंबर सन 1927 को हजारों लाखों की संख्या में के सामने हिंदू धर्म के ग्रंथों को वह मनुस्मृति को अग्नि की भेंट चढ़ा कर आप सबको हम सबको इस नीचता और जिल्लत भरी जिंदगी से आजाद करते हैं और कहते हैं

25 दिसंबर 1927

बाबा साहब - मैं ऐसी किसी भी बात को नहीं मान सकता जो अमानवीय है और आज के बाद ऐसा कोई भी विधान व कोई भी कानून मेरे समाज के लोगों पर लागू नहीं होगा जो अमानवीय है क्योंकि यह विधान जबरजस्ती हमारे समाज के लोगों पर थोपा गया है

ऐसा कहकर बाबा साहब मनुस्मृति को अग्नि की भेंट चढ़ा देते हैं और आप सबको आजाद करा देते हैं उसके बाद बाबा साहब मुंबई की कोर्ट में वकालत करते हैं तो उनका जो चौथा बेटा होता है राजरतन वह बीमार हो जाता है देखिए वह दृश्य

रमाबाई - नानकचंद रत्तू जाओ जल्दी से बाबा साहब को बुलाकर लाओ क्योंकि हमारा जो बेटा है राजरतन वह बहुत बीमार है और वह लंबी लंबी सांसे ले रहा है

नानकचंद रत्तू - बाबा साहब - 2 जल्दी से घर चलिए आपके पुत्र राजरतन तबीयत बहुत खराब है और र माता रमाबाई ने आपके लिए बुलावा भेजा है

संचालक - जैसे ही बाबा साहब दौड़कर घर पहुंचते हैं और राजरतन को गोदी में लेते हैं तो राजरतन भी दम तोड़ता है अपने चौथे बेटे की मौत पर पति के सामने माता रमाबाई क्या कहती हैं

रमाबाई - रोते हुए बाबा साहब बस करो बाबा साहब अब तो बस करो क्योंकि आपके समाज सुधार की लालसा ने और ज्ञान पाने की लालसा ने मेरा पूरा घर उजाड़ के रख दिया है मैंने एक एक करके अपने 4 बच्चों को दफन कर दिया है बाबा साहब अब तो बस करो

बाबा साहब - रमा तू तो मुझे रो करके बता पा रही है मैं तो रो भी नहीं पा रहा हूं मैं तो रोज ऐसे सैकड़ों बच्चों को मरते हुए देखता हूं रमा तू चुप हो जा, रमा तू चुप हो जा

रमाबाई - बाबा साहब मैंने आज तक आपकी हर बात को माना है और इस बात को भी मान लेती हूं और चुप हो जाती हूं लेकिन आप मुझे इतना बता दो कि आप बड़े फक्र से कहते थे कि तेरा बेटा राज रतन देश पर राज करेगा लेकिन अब यह इस दुनिया में नहीं रहा बताओ यह कैसे इस देश पर राज करेगा बाबा साहब मुझे बता दो कि यह कैसे देश पर राज करेगा

बाबा साहब - रमा यह सच है कि तेरा यह पुत्र अब इस दुनिया में नहीं रहा लेकिन मैं तुझे भरोसा दिलाता हूं और राजरतन के पार्थिव शरीर की सौगंध खाकर कहता हूं कि मैं अपने जीवन में ऐसा काम करके जाऊंगा कि हर रमा की कोख से पैदा हुआ राजरतन और हर मां की कोख से पैदा हुआ बेटा इस देश पर राज करेगा मैं तुझे भरोसा दिलाता हूं

इतना कहने के बाद बाबा साहब अपनी जेबों में हाथ डालते हैं और राजरतन के कफन के लिए उन की जेब में एक पैसा तक नहीं होता है इस बात को माता रमाबाई जानती है और रमाबाई अपनी साड़ी का दुपट्टा फाड़ कर राजरतन के ऊपर डाल देती है और बाबा साहब को ख्याल आता आता है कि मुझे गोलमेज सम्मेलन के लिए लंदन जाना है और बाबा साहब राजरतन के पार्थिव शरीर को छोड़ घर पर ही छोड़ कर लंदन के लिए निकलते हैं तभी पीछे से उनका भाई दौड़कर आता है और कहता है

भाई - भीम तू पागल हो गया है यह तेरा पुत्र मरा पड़ा है और तुझे विदेश जाने की सूझ रही है तू कैसा बाप है जो अपने पुत्र को इस अवस्था में छोड़कर विदेश जा रहा है और यह समाज क्या कहेगा अपने पुत्र को कंधा देकर उसका अंतिम क्रिया कर्म तो कर ले

बाबा साहब - भाई मैं जानता हूं कि यह मेरा पुत्र मरा पड़ा है लेकिन मैं यह भी जानता हूं कि अगर आज मैं गोलमेज सम्मेलन के लिए लंदन नहीं गया तो गांधी एंड कंपनी के लोग मेरे करोड़ों करोड़ों लोगों को मार डालेंगे के सारे और हक अधिकारों को छीन लेंगे इसलिए मैं एक पुत्र की खातिर अपने करोड़ों करोड़ों लोगों को बलि चढ़ते हुए नहीं देख सकता यहां तुम सब लोग हो तुम सब संभाल लोगे

ऐसा कहते हुए बाबा साहब गोलमेज सम्मेलन के लिए लंदन चले जाते हैं और आज आपके जो बच्चे हैं आपका जो समाज है जो हक और अधिकार लेकर जी रहा है अपने बच्चों को अच्छे अच्छे कपड़े अच्छी अच्छी शिक्षा और नौकरियों में भेज रहा है इसका श्रेय केवल और केवल बाबा साहब को जाता है और आपके जो लोग हैं वह इस बात को अपने बच्चों को बताने तक शर्माते हैं ।

पोस्ट पढ़ने के लिए धन्यवाद अब इसे दो चार अन्य लोगों तक पहुंचाने का प्रयास करें।
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏जय भीम

पूर्वाचल की धरती पर बहुजन समाज के युवाओ, बुजुर्गों और माताओं, बहनों का बहुत प्यार, सहयोग व आशीर्वाद मिला।  कुशीनगर, गोरख...
22/12/2020

पूर्वाचल की धरती पर बहुजन समाज के युवाओ, बुजुर्गों और माताओं, बहनों का बहुत प्यार, सहयोग व आशीर्वाद मिला। कुशीनगर, गोरखपुर, अम्बेडकरनगर, बस्ती, आजमगढ़, संतकबीरनगर, बलिया, देवरिया में दिन - रात संघर्ष करने वाले सभी कार्यकर्ता व पदाधिकारियों के संघर्ष को जय भीम, नीला सलाम और आप सभी के लिये बहुत - बहुत मंगलकामनाए।

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