Ekta Khemariya

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“थारू संस्कृति” : अपनी जड़ों से विश्व मंच तकमाँ पाटेश्वरी देवी की कृपाभूमि और नानाजी देशमुख-अटल जी की कर्मभूमि उत्तर प्र...
27/08/2026

“थारू संस्कृति” : अपनी जड़ों से विश्व मंच तक

माँ पाटेश्वरी देवी की कृपाभूमि और नानाजी देशमुख-अटल जी की कर्मभूमि उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले से जनजातीय विरासत को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान...

लेखक — शुभानन मधुसूदन खेमरिया- युवा लेखक एवं स्तंभकार, सागर (मध्य प्रदेश)

भारत की संस्कृति हजारों वर्षों से अपनी विविधता में एकता का संदेश देती आई है। यहां संस्कृति केवल पूजा-पद्धति या परंपराओं तक सीमित नहीं है, बल्कि हमारे जीवन जीने के तरीके, प्रकृति के प्रति सम्मान, लोकगीतों, लोककलाओं और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं में भी दिखाई देती है। भारत के जनजातीय समाज ने इस सांस्कृतिक विरासत को लंबे समय से संभालकर रखा है।

इसी समृद्ध परंपरा में “थारू संस्कृति” का अपना विशेष स्थान है। थारू समाज की जीवनशैली, लोककला, वेशभूषा, लोकगीत, लोकनृत्य और प्रकृति से जुड़ाव भारतीय संस्कृति की विविधता को और समृद्ध बनाते हैं।

माँ पाटेश्वरी देवी की कृपाभूमि, महाराजा बलराम की स्मृतियों तथा राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख और पूर्व प्रधानमंत्री, भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी की कर्मभूमि रहे उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले से आज “थारू संस्कृति” को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने की खबर विशेष महत्व रखती है। बलरामपुर के थारू बहुल क्षेत्र इमिलिया कोडर में दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा संचालित थारू जनजाति सांस्कृतिक संग्रहालय का भारतीय उपमहाद्वीप उत्तरदायी पर्यटन पुरस्कार 2026 के फाइनलिस्ट में चयन हुआ है।

यह पूरे बलरामपुर और थारू समाज के लिए गौरव का विषय है। इस उपलब्धि की विशेष बात यह है कि इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए भारत, नेपाल और श्रीलंका की कुल 22 उल्लेखनीय पर्यटन पहलों के साथ इमिलिया कोडर की इस पहल को भी फाइनलिस्ट के रूप में चुना गया है। यह सम्मान केवल एक संग्रहालय का नहीं, बल्कि उस लोक संस्कृति का है जो पीढ़ियों से अपनी पहचान को संभालती आई है।

भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता यह रही है कि उसने अलग-अलग परंपराओं को अपने साथ स्थान दिया। “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना हमें यह सिखाती है कि विविधता दूरी नहीं, बल्कि जुड़ाव का माध्यम है। थारू समाज की संस्कृति भी इसी भारतीय विविधता की एक सुंदर कड़ी है।

इमिलिया कोडर का “थारू जनजाति सांस्कृतिक संग्रहालय” इस विरासत को समझने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। संग्रहालय में थारू समाज की संस्कृति और जीवन से जुड़ी विरासत को सुरक्षित रखने का प्रयास किया गया है। इससे नई पीढ़ी अपनी जड़ों को जान सकती है और देश-दुनिया से आने वाले लोग भी थारू समाज की जीवनशैली को समझ सकते हैं।

आज जब आधुनिकता तेजी से हमारे जीवन को बदल रही है, तब अपनी लोक परंपराओं को सुरक्षित रखना और भी जरूरी हो जाता है। विकास का अर्थ यह नहीं कि हम अपनी जड़ों को पीछे छोड़ दें। वास्तविक विकास वही है जिसमें आधुनिकता के साथ अपनी संस्कृति और पहचान भी सुरक्षित रहे।

दीनदयाल शोध संस्थान का प्रयास इसी सोच को आगे बढ़ाता दिखाई देता है। इमिलिया कोडर में संस्कृति के साथ शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार और आत्मनिर्भरता पर भी काम किया जा रहा है। महाराणा प्रताप ग्रामोदय विद्यालय के माध्यम से बच्चों को शिक्षा देने के साथ उन्हें संस्कार और अपनी संस्कृति से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

वहीं थारू विकास केंद्र के माध्यम से स्थानीय युवाओं और महिलाओं को हस्तशिल्प, सिलाई-कढ़ाई और पारंपरिक कला का प्रशिक्षण दिया जाता है। इससे स्थानीय लोगों को अपने हुनर को रोजगार से जोड़ने और आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलता है।

थारू समाज की लोककला और परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। लोकगीत और लोकनृत्य केवल मनोरंजन के साधन नहीं होते, बल्कि वे किसी समाज की स्मृतियों और जीवन की कहानी भी बताते हैं। इन्हें जीवित रखना अपनी सांस्कृतिक स्मृति को जीवित रखना है।

इसी प्रकार नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ना भी जरूरी है। जिस युवा को अपनी भाषा, लोककला, परंपराओं और अपने समाज के इतिहास का ज्ञान होगा, वह अपनी पहचान को अधिक आत्मविश्वास के साथ दुनिया के सामने रख सकेगा।

आज पर्यटन भी संस्कृति को समझने का एक माध्यम बन रहा है। लोग किसी स्थान पर केवल प्राकृतिक सुंदरता देखने नहीं जाते, बल्कि वहां के लोगों, उनकी परंपराओं और जीवनशैली को जानना चाहते हैं। ऐसे में इमिलिया कोडर का यह संग्रहालय उत्तरदायी पर्यटन का एक अच्छा उदाहरण बन सकता है।

उत्तरदायी पर्यटन का उद्देश्य यही है कि पर्यटन बढ़े, लेकिन स्थानीय संस्कृति और प्रकृति को नुकसान न पहुंचे। स्थानीय लोगों को भी इसका लाभ मिले और उनकी पहचान को सम्मान मिले। इमिलिया कोडर में संस्कृति और स्थानीय विकास को साथ लेकर चलने का प्रयास इसी विचार को मजबूत करता है।

भारत के आर्थिक और सांस्कृतिक विकास में जनजातीय समाज की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। उनकी कला, परंपराएं और प्रकृति के साथ संतुलित जीवन हमें यह भी सिखाता है कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन कितना आवश्यक है।

बलरामपुर की धरती पर इस पहल का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह क्षेत्र धार्मिक, ऐतिहासिक और राष्ट्रीय चेतना से जुड़ा रहा है। माँ पाटेश्वरी देवी की आस्था, महाराजा बलराम की स्मृतियां, नानाजी देशमुख के सामाजिक कार्य और अटल बिहारी वाजपेयी की कर्मभूमि की पहचान के बीच थारू समाज की संस्कृति इस क्षेत्र की विरासत को एक और आयाम देती है।

दीनदयाल शोध संस्थान का यह प्रयास संस्कृति को केवल संग्रहालय की दीवारों तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उसे शिक्षा, रोजगार, आत्मनिर्भरता और पर्यटन से जोड़ता है। यही कारण है कि इमिलिया कोडर की यह पहल एक व्यापक विकास की कहानी भी बनती है।

भारतीय उपमहाद्वीप उत्तरदायी पर्यटन पुरस्कार 2026 के फाइनलिस्ट में भारत, नेपाल और श्रीलंका की 22 उल्लेखनीय पहलों के साथ इमिलिया कोडर के “थारू जनजाति सांस्कृतिक संग्रहालय” का चयन निश्चित रूप से गर्व की बात है। यह उस संस्कृति को सम्मान मिला है, जिसने वर्षों से अपनी परंपराओं को संभालकर रखा है।

आज दुनिया के सामने भारत की पहचान केवल उसकी आर्थिक शक्ति या तकनीकी प्रगति से नहीं, बल्कि उसकी सांस्कृतिक शक्ति से भी बन रही है। “थारू संस्कृति” को मिली यह पहचान इसी सांस्कृतिक शक्ति का एक उदाहरण है।

इमिलिया कोडर की यह यात्रा हमें एक सरल संदेश देती है—अपनी जड़ों से जुड़कर ही हम दुनिया के सामने अपनी पहचान को मजबूत कर सकते हैं। जब किसी समाज की संस्कृति को सम्मान मिलता है, तो उसके साथ उसकी आने वाली पीढ़ियों का आत्मविश्वास भी बढ़ता है।

थारू जनजाति सांस्कृतिक संग्रहालय का यह सम्मान इसलिए विशेष है क्योंकि यहां एक स्थानीय संस्कृति ने अपनी जड़ों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक की यात्रा तय की है। यह केवल इमिलिया कोडर की उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की उस परंपरा की सफलता है, जो विविधता को स्वीकार करती है, अपनी विरासत को संभालती है और उसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाती है।

 #रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएंभाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास और स्नेह का पावन पर्व रक्षाबंधन हम सभी के जीवन में सुख, ...
27/08/2026

#रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं

भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास और स्नेह का पावन पर्व रक्षाबंधन हम सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और खुशियों का संचार करे।

ईश्वर से प्रार्थना है कि प्रेम और अपनत्व का यह पवित्र बंधन सदैव मजबूत बना रहे तथा हर परिवार में सुख-शांति और सौहार्द बना रहे।

आप सभी को रक्षाबंधन के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं। 🙏🌺

सागर पत्रिका संस्करण के 12वें  स्थापना दिवस पर पत्रिका परिवार को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई.....Patrika News Sagar patr...
27/08/2026

सागर पत्रिका संस्करण के 12वें स्थापना दिवस पर पत्रिका परिवार को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई.....

Patrika News Sagar patrika

डॉ. सर हरिसिंह गौर का स्वप्न आज भी भारत की उच्च शिक्षा का प्रेरणास्रोत : मधुसूदन खेमरिया— डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्व...
18/07/2026

डॉ. सर हरिसिंह गौर का स्वप्न आज भी भारत की उच्च शिक्षा का प्रेरणास्रोत : मधुसूदन खेमरिया

— डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस पर विशेष

सागर, 18 जुलाई, 2026।

डॉ. सर हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय का स्थापना दिवस केवल एक शैक्षणिक संस्थान की वर्षगांठ नहीं, बल्कि उस महान व्यक्तित्व को स्मरण करने का अवसर है, जिसने शिक्षा को समाज परिवर्तन और राष्ट्र निर्माण का सबसे प्रभावी माध्यम माना। यह बात समाजसेवी एवं विचारक मधुसूदन खेमरिया ने विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस पर व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि डॉ. सर हरिसिंह गौर केवल एक विधिवेत्ता या शिक्षाविद् नहीं थे, बल्कि ऐसे राष्ट्रद्रष्टा थे जिन्होंने उस समय भारत में विश्वस्तरीय शिक्षा की आवश्यकता को समझ लिया था, जब उच्च शिक्षा कुछ चुनिंदा शहरों तक सीमित थी। उनका स्वप्न था कि भारत में भी ऑक्सफोर्ड और कैम्ब्रिज जैसे विश्वविद्यालयों की परंपरा विकसित हो, जहाँ केवल डिग्रियाँ नहीं, बल्कि राष्ट्र का नेतृत्व करने वाली प्रतिभाएँ तैयार हों।

मधुसूदन खेमरिया ने कहा कि इसी महान उद्देश्य को लेकर डॉ. गौर ने अपनी जीवनभर की अर्जित संपत्ति का बड़ा भाग समाज को समर्पित किया और बुंदेलखंड की इस धरती पर एक ऐसे विश्वविद्यालय की स्थापना की, जिसने समय के साथ लाखों विद्यार्थियों के जीवन को नई दिशा दी। उस दौर में संसाधनों से वंचित क्षेत्र में इतना बड़ा शैक्षणिक संस्थान स्थापित करना उनकी दूरदर्शिता, साहस और समाज के प्रति समर्पण का अनुपम उदाहरण था।

उन्होंने कहा कि आज यह विश्वविद्यालय केवल सागर की पहचान नहीं, बल्कि पूरे मध्य भारत के शैक्षणिक गौरव का प्रतीक है। शिक्षा, अनुसंधान, विज्ञान, विधि, साहित्य, संस्कृति और सामाजिक विज्ञान के क्षेत्रों में इस विश्वविद्यालय ने जो प्रतिष्ठा अर्जित की है, वह डॉ. गौर के सपनों की सार्थकता को सिद्ध करती है। यहाँ से निकले विद्यार्थी देश-विदेश में प्रशासन, न्यायपालिका, चिकित्सा, शिक्षा, उद्योग, पत्रकारिता और वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे अनेक क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देकर विश्वविद्यालय का नाम गौरवान्वित कर रहे हैं।

श्री खेमरिया ने कहा कि डॉ. सर हरिसिंह गौर का जीवन हमें यह संदेश देता है कि किसी भी समाज की सबसे बड़ी पूंजी उसकी शिक्षित और संस्कारित युवा पीढ़ी होती है। उनके द्वारा लगाया गया ज्ञान का यह वटवृक्ष आज भी निरंतर फल-फूल रहा है और नई पीढ़ी को ज्ञान, चरित्र तथा राष्ट्रसेवा की प्रेरणा दे रहा है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक अनुसंधान का समन्वय करते हुए भविष्य में भी उत्कृष्टता के नए मानक स्थापित करेगा तथा डॉ. सर हरिसिंह गौर के महान स्वप्न को और अधिक ऊँचाइयों तक पहुँचाएगा।

PMO India

जब जगत के नाथ स्वयं लोकमंगल के पथ पर उतरते हैं... 🚩​आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के पावन अवसर पर विश्वप्रसिद्ध श्री जगन्नाथ रथ य...
16/07/2026

जब जगत के नाथ स्वयं लोकमंगल के पथ पर उतरते हैं... 🚩

​आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के पावन अवसर पर विश्वप्रसिद्ध श्री जगन्नाथ रथ यात्रा की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ अपने मंदिर के गर्भगृह से बाहर आकर भक्तों को दर्शन देते हैं। यह महापर्व केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, सेवा और सनातन संस्कृति की अमर पहचान है।

​'स्वदेश ज्योति' समाचार पत्र में प्रकाशित यह ज्ञानवर्धक लेख इस पावन पर्व के गहरे आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व को बहुत ही सुंदर ढंग से रेखांकित करता है। इसे जरूर पढ़ें।

​जय जगन्नाथ!

बालिका शिक्षा, सुरक्षा और संस्कार से बनेगा सशक्त भारत :  #एकता_खेमरिया #सागर। रमझिरिया शिवाजी वार्ड स्थित माधव शिक्षा सम...
10/07/2026

बालिका शिक्षा, सुरक्षा और संस्कार से बनेगा सशक्त भारत : #एकता_खेमरिया

#सागर। रमझिरिया शिवाजी वार्ड स्थित माधव शिक्षा समिति में आयोजित 'बालिका शिक्षा, सुरक्षा एवं संस्कार' विषयक कार्यक्रम में समाजसेविका एकता मधुसूदन खेमरिया ने कहा कि बालिका शिक्षा, सुरक्षा और संस्कार सशक्त समाज एवं विकसित राष्ट्र की आधारशिला हैं। उन्होंने छात्राओं से आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी बनने तथा आत्मरक्षा के प्रति सजग रहने का आह्वान किया।

खेमरिया ने कहा कि प्रत्येक बालिका को पॉक्सो (POCSO) अधिनियम सहित महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा से जुड़े कानूनों की जानकारी होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रतिकूल परिस्थिति में बेटियों को निडर होकर अपनी बात रखनी चाहिए। साथ ही परिवारों से बेटों में सम्मान, संवेदनशीलता और अच्छे संस्कार विकसित करने का आग्रह करते हुए कहा कि बेटियों की सुरक्षा पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

कार्यक्रम में मित्रा जैन ने छात्राओं के हित में परिषद की गतिविधियों की जानकारी दी। सौम्या तिवारी ने व्यक्तित्व विकास एवं छात्रा सशक्तिकरण पर प्रकाश डाला। श्रावणी देव ने भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों के संरक्षण पर जोर दिया, जबकि मनु मंडेला ने छात्राओं को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम का संचालन रितु विश्वकर्मा ने किया तथा आभार महिमा जैन ने व्यक्त किया। इस अवसर पर संस्था के पदाधिकारी, शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में छात्राएँ उपस्थित रहीं।

Jansampark Madhya Pradesh CM Madhya Pradesh PMO India Collector Office Sagar

श्रीराम सेवा समिति की सेवा यात्रा समाज के लिए प्रेरणास्रोत : एकता खेमरियासमरसता और निस्वार्थ सेवा का अनुकरणीय उदाहरण है ...
28/06/2026

श्रीराम सेवा समिति की सेवा यात्रा समाज के लिए प्रेरणास्रोत : एकता खेमरिया

समरसता और निस्वार्थ सेवा का अनुकरणीय उदाहरण है श्रीराम सेवा समिति : एकता खेमरिया

मानव सेवा और सामाजिक समरसता की प्रेरक मिसाल बनी श्रीराम सेवा समिति

सागर। स्थानीय रेलवे स्टेशन प्लेटफॉर्म पर श्रीराम सेवा समिति द्वारा ग्रीष्मकाल के दौरान संचालित निशुल्क प्याऊ सेवा के समापन अवसर पर आयोजित गरिमामय कार्यक्रम में समाजसेविका एकता खेमरिया ने समिति द्वारा विगत 28 वर्षों से संचालित सेवा कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि सेवा का यह निरंतर अभियान समाज में मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं लोककल्याण की सशक्त भावना का परिचायक है।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि समिति के अध्यक्ष विनोद तिवारी के नेतृत्व में समिति के सदस्य पूर्ण निष्ठा, अनुशासन एवं समर्पण के साथ सेवा कार्य में निरंतर सक्रिय हैं। भीषण गर्मी के दौरान रेल यात्रियों एवं जरूरतमंद लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना मानव सेवा का श्रेष्ठ उदाहरण है। उन्होंने कहा कि समिति के सदस्य रात्रिकाल में भी यात्रियों की सुविधा के लिए सेवा कार्य में तत्पर रहते हैं, जो उनके सेवा-समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा को प्रतिबिंबित करता है।

समाजसेविका एकता खेमरिया ने कहा कि श्रीराम सेवा समिति की सबसे बड़ी विशेषता उसकी समरसता एवं सर्वसमावेशी सेवा भावना है। समिति के सदस्य सेवा के दौरान किसी भी व्यक्ति की जाति, धर्म, पंथ, संप्रदाय अथवा सामाजिक पृष्ठभूमि का कोई भेदभाव नहीं करते, बल्कि प्रत्येक जरूरतमंद की समान भाव से सहायता करते हैं। उन्होंने कहा कि सेवा का यही भाव भारतीय संस्कृति की मूल चेतना है तथा समाज में सद्भाव, समानता और सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करता है।

उन्होंने समिति के वरिष्ठ मार्गदर्शक रघु ठाकुर के सामाजिक एवं वैचारिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने न केवल सागर को एक विशिष्ट पहचान प्रदान की है, बल्कि समाज में वैचारिक जागरण और जनचेतना को सशक्त करने का भी कार्य किया है। उनके प्रयासों से सागर में समाजवादी चिंतक डॉ. राम मनोहर लोहिया तथा जननायक कर्पूरी ठाकुर की प्रतिमाओं की स्थापना हुई। ये प्रतिमाएं केवल स्मारक नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता, लोकतांत्रिक मूल्यों एवं जनसेवा के आदर्शों की प्रेरणा देने वाले सशक्त प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि इन महान विभूतियों के जीवन एवं विचारों का अध्ययन समाज, विशेषकर युवा पीढ़ी में राष्ट्रसेवा, सामाजिक दायित्व और लोककल्याण के प्रति सकारात्मक चेतना का संचार करता है तथा यह गर्व का विषय है कि भारत ने ऐसे जननायकों को जन्म दिया जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन समाज के अंतिम व्यक्ति के उत्थान के लिए समर्पित किया।

कार्यक्रम के दौरान मधुसूदन खेमरिया, राजेंद्र ठाकुर एवं एकता खेमरिया द्वारा श्रीराम सेवा समिति के अध्यक्ष विनोद तिवारी तथा समिति के वरिष्ठ मार्गदर्शक रघु ठाकुर को समाज सेवा एवं जनकल्याण के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए शॉल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर साहित्यकार, समाजसेवी, शिक्षाविद्, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, प्रबुद्ध नागरिक तथा समाज के सभी वर्गों के गणमान्यजन उपस्थित रहे। उपस्थितजनों ने समिति द्वारा विगत 28 वर्षों से संचालित जल सेवा अभियान की सराहना करते हुए इसे सेवा, समर्पण, सामाजिक समरसता एवं जनकल्याण की अनुकरणीय परंपरा बताया।

#जलसंवर्धन Ekta Madhusudhan Khemariya Press Information Bureau - PIB, Government of India PMO India Dr Mohan Yadav

आपातकाल लोकतंत्र और नागरिक स्वतंत्रताओं पर किया गया सबसे बड़ा प्रहार था : एकता मधुसूदन खेमरियासागर, 25 जून। लोकतंत्र रक्...
25/06/2026

आपातकाल लोकतंत्र और नागरिक स्वतंत्रताओं पर किया गया सबसे बड़ा प्रहार था : एकता मधुसूदन खेमरिया

सागर, 25 जून। लोकतंत्र रक्षा दिवस के अवसर पर समाजसेविका एवं भारत भारती शोध संस्थान की अध्यक्ष एकता मधुसूदन खेमरिया ने कहा कि 25 जून 1975 को लगाया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय था। उस दौर में नागरिक स्वतंत्रताओं को सीमित किया गया, प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई तथा हजारों राजनीतिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, विद्यार्थियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को जेलों में बंद कर दिया गया।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र पर आए इस संकट के समय देशभर में अनेक लोकतंत्र सेनानियों, सामाजिक संगठनों और राष्ट्रवादी कार्यकर्ताओं ने संघर्ष का मार्ग अपनाया। लोकतंत्र की रक्षा के इस आंदोलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों सहित अनेक संगठनों के कार्यकर्ताओं ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा दमन और यातनाओं के बावजूद लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए अपना योगदान दिया।

एकता खेमरिया ने कहा कि आपातकाल की स्मृति हमें यह संदेश देती है कि लोकतंत्र की रक्षा केवल कानूनों से नहीं, बल्कि जागरूक और सजग नागरिकों से होती है। स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की आजादी और संवैधानिक मूल्यों की सुरक्षा के लिए प्रत्येक पीढ़ी को सतत सजग रहना चाहिए।

उन्होंने लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले सभी लोकतंत्र सेनानियों और राष्ट्रभक्तों को श्रद्धापूर्वक नमन किया।

Press Information Bureau - PIB, Government of India Jansampark Madhya Pradesh Dr Mohan Yadav

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