Aj Rosera trust

Aj Rosera trust success comes from experience & experience comes from bad experience...��

  👉बेटे के जन्मदिन पर .....रात के 1:30 बजे फोन आता है, बेटा फोन उठाता है तो माँ बोलती है:- "जन्म दिन मुबारक लल्ला"बेटा ग...
17/10/2021


👉बेटे के जन्मदिन पर .....
रात के 1:30 बजे फोन आता है, बेटा फोन उठाता है तो माँ बोलती है:- "जन्म दिन मुबारक लल्ला"
बेटा गुस्सा हो जाता है और माँ से कहता है: - सुबह फोन करती। इतनी रात को नींद खराब क्यों की? कह कर फोन रख देता है।
थोडी देर बाद पिता का फोन आता है। बेटा पिता पर गुस्सा नहीं करता बल्कि कहता है:- सुबह फोन करते।
फिर पिता ने कहा: - मैनें तुम्हे इसलिए फोन किया है कि तुम्हारी माँ पागल है जो तुम्हे इतनी रात को फोन किया। वो तो आज से 25 साल पहले ही पागल हो गई थी। जब उसे डॉक्टर ने ऑपरेशन करने को कहा और उसने मना किया था। वो मरने के लिए तैयार हो गई पर ऑपरेशन नहीं करवाया। रात के 1:30 को तुम्हारा जन्म हुआ। शाम 6 बजे से रात 1:30 तक वो प्रसव पीड़ा से परेशान थी । लेकिन तुम्हारा जन्म होते ही वो सारी पीड़ा भूल गयी ।उसके ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा । तुम्हारे जन्म से पहले डॉक्टर ने दस्तखत करवाये थे कि अगर कुछ हो जाये तो हम जिम्मेदार नहीं होंगे। तुम्हे साल में एक दिन फोन किया तो तुम्हारी नींद खराब हो गई......मुझे तो रोज रात को 25 साल से रात के 1:30 बजे उठाती है और कहती है देखो हमारे लल्ला का जन्म इसी वक्त हुआ था। बस यही कहने के लिए तुम्हे फोन किया था। इतना कहके पिता फोन
रख देते हैं।
बेटा सुन्न हो जाता है। सुबह माँ के घर जा कर माँ के पैर पकड़कर
माफी मांगता है....तब माँ कहती है, देखो जी मेरा लाल आ गया।
फिर पिता से माफी मांगता है तब पिता कहते हैं:- आज तक ये कहती थी कि हमे कोई चिन्ता नहीं हमारी चिन्ता करने वाला हमारा लाल है। पर अब तुम चले जाओ मैं तुम्हारी माँ से कहूंगा कि चिन्ता मत करो। मैं तुम्हारा हमेशा की तरह आगे भी ध्यान रखुंगा।
तब माँ कहती है:- माफ कर दो
बेटा है।
सब जानते हैं दुनियाँ में एक माँ ही है जिसे जैसा चाहे कहो फिर भी वो गाल पर प्यार से हाथ फेरेगी।
पिता अगर तमाचा न मारे तो बेटा
सर पर बैठ जाये। इसलिए पिता का सख्त होना भी जरुरी है।
माता पिता को आपकी दौलत नही बल्कि आपका प्यार और
वक्त चाहिए। उन्हें प्यार दीजिए। माँ की ममता तो अनमोल है।
निवेदन:- इसको पढ़ कर अगर आँखों में आंसू बहने लगें तो रोकिये मत, बह जाने दीजिये। मन हल्का हो जायेगा!

🌴 भगवान से बढ़कर माता पिता होते हैं 🌴

मातृ पित्र चरण कमलेभ्यो नमो नमः🙏
नारी ही नारायणी 🙏🚩❤️ जैकी झा❤️

  मामला फ्लोरिडा का है।जहाँ एक पंद्रह साल का लड़का स्टोर से चोरी करता हुआ पकड़ा गया, गार्ड की गिरफ्त से भागने की कोशिश मे...
18/09/2021


मामला फ्लोरिडा का है।
जहाँ एक पंद्रह साल का लड़का स्टोर से चोरी करता हुआ पकड़ा गया, गार्ड की गिरफ्त से भागने की कोशिश में उससे स्टोर का एक शेल्फ भी टूट गया। पुलिस ने उसे गिरफ्तार करके न्यायालय में पेश किया।

जज ने जुर्म सुना और लड़के से पूछा

तुमने क्या सचमुच कुछ चुराया था..??

ब्रैड और पनीर का पैकेट लड़के ने नीचे नज़रें कर के जवाब दिया।

जज:- क्यों ?

लड़का:- मुझे ज़रूरत थी

खरीद लेते :-- जज

पैसे नहीं थे :-- लड़का

जज:- घर वालों से ले लेते।

लड़का:- घर में सिर्फ मां है बीमार और बेरोज़गार है, ब्रैड और पनीर भी उसी के लिए चुराई थी।

जज:- तुम कुछ काम नहीं करते ?

लड़का:- करता था एक कार वाश में, मां की देखभाल के लिए एक दिन की छुट्टी की थी। तो मुझे निकाल दिया गया।

जज:- तुम किसी से मदद मांग लेते।

लड़का:- सुबह से घर से निकला था तकरीबन पचास लोगों के पास गया बिल्कुल आख़री में ये क़दम उठाया।

जिरह ख़त्म हुई जज ने फैसला सुनाना शुरू किया :-

चोरी और ख़ुसूसन ब्रैड की चोरी बोहोत होल्नाक जुर्म है और इस जुर्म के हम सब ज़िम्मेदार हैं।

अदालत में मौजूद हर शख़्स मुझ समेत हम सब मुजरिम हैं इसलिए यहाँ मौजूद हर शख़्स पर दस-दस डालर का जुर्माना लगाया जाता है, दस डालर दिए बग़ैर कोई भी यंहा से बाहर नहीं निकल सकेगा।

ये कह कर जज ने दस डालर अपनी जेब से बाहर निकाल कर रख दिए और फिर पेन उठाया लिखना शुरू किया:-

इसके अलावा में स्टोर पर एक हज़ार डालर का जुर्माना करता हूं कि उसने एक भूखे बच्चे से ग़ैर इंसानी सुलूक करते हुए पुलिस के हवाले करा।

अगर चौबीस घंटे में जुर्माना जमा नहीं करा तो कोर्ट स्टोर सील करने का हुक्म दे देगी।

जुर्माना की पूर्ण राशि इस लड़के को देकर कोर्ट ने उस लड़के से माफी तलब करती है।

फैसला सुनने के बाद कोर्ट में मौजूद लोगों के आंखों से आंसू तो बरस ही रहे थे, उस लड़के के भी हिचकीया बंध गई। वो लड़का बार बार जज को देख रहा था जो अपने आंसू छिपाते हुए बाहर निकल गया।

क्या हमारे देश में आज तक ऐसा कोई निर्णय हुआ है।
ऐसे संवेदनशील और ईमानदार न्यायिक चरित्रवान जज हमारे देश मे नही है..??

शायद इसीलिये हमारे देश में तो 20-20 और 25-25 वर्ष पश्चात जब कोई इन्सान बेकसूर सिद्ध होता है तो भी उसको सिर्फ और सिर्फ माननीय न्यायालय बाइज्जत बरी करने का उपकार कर देते है..

द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जापान का एक लड़का अपने छोटे भाई के अंतिम संस्कार के लिए पंक्ति में खड़ा था।यह फोटो लेने वाले फ...
17/07/2021

द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जापान का एक लड़का अपने छोटे भाई के अंतिम संस्कार के लिए पंक्ति में खड़ा था।

यह फोटो लेने वाले फोटोग्राफर ने एक इंटरव्यू में बताया था कि बच्चा स्वयं को रोने से रोकने के लिए अपने होठों को इतनी जोर से दबाये हुए था कि उसके होठो से खून निकलकर नीचे गिरने लगा था।

जब शमशान का रखवाला उसका नंबर आने पर कहता है कि "जो बोझा तुमने अपनी पीठ पर ढों रखा है वह मुझे दे दो" तो बच्चा कहता है "यह बोझा नही मेरा भाई है" ओर कहते हुए वहां से निकल जाता है।

जापान में आज भी यह तस्वीर शक्ति का प्रतीक मानी जाती है।

15/07/2021

*भीख में CASH देना बंद अभियान*

* भिखारी को भोजन + पानी दें। लेकिन नकद में देने के लिए एक भी रुपया नहीं। *

* मुंबई-पुणे और पूरे महाराष्ट्र में एक अलग आंदोलन शुरू हो गया है, चाहे वह किसी भी तरह का भिखारी हो।

* यदि किसी भी प्रकार का व्यक्ति (महिला / पुरुष / वृद्ध। विकलांग / बच्चे) भीख मांग रहा है, तो हम पैसे के बदले (भोजन + पानी) देंगे, लेकिन आज से *उन्हें* हम पैसे की भीख नहीं देंगे *

* परिणामस्वरूप, अंतर्राष्ट्रीय / राष्ट्रीय / राज्य स्तर पर, 'भिखारियों' के गिरोह टूट जाएंगे और फिर बच्चों का अपहरण अपने आप बंद हो जाएगा। इस तरह के गिरोह आपराधिक दुनिया में खत्म हो जाएंगे। *

* आरंभ करें पोस्ट साझा करें ..

* हम एक भी भिखारी को रुपया नहीं देंगे।

* कार में 2 बिस्किट के पैकेट रखें लेकिन रुपए पैसे भुगतान न करें *

क्योंकि किसी मां बाप के कलेजे के टुकड़े किडनैप होने और फिर उनकी दुर्गति होने से बचाने में आपकी पोस्ट फारवर्ड बहुत बड़ा योगदान कर सकती है।

🙏🙏
Plz share

17/06/2021


आप पहली लाइन पढ़ते ही खुद इसके मुख्य नायक हो जाएंगे

एक कहानी - हमारी 🤝 आपकी

बचपन में स्कूल के दिनों में क्लास के दौरान शिक्षक द्वारा पेन माँगते ही हम बच्चों के बीच रौकेट गति से गिरते पड़ते सबसे पहले उनकी टेबल तक पहुँच कर पेन देने की अघोषित प्रतियोगिता होती थी।

जब कभी मैम किसी बच्चे को क्लास में कापी वितरण में अपनी मदद करने पास बुला ले, तो मैडम की सहायता करने वाला बच्चा अकड़ के साथ "अजीमो शाह शहंशाह" बना क्लास में घूम-घूम कर कापियाँ बाँटता और बाकी के बच्चे मुँह उतारे गरीब प्रजा की तरह अपनी बेंच से न हिलने की बाध्यता लिए बैठे रहते। शिक्षक की उपस्थिति में क्लास के भीतर चहल कदमी की अनुमति कामयाबी की तरफ पहला कदम माना जाता था।

उस मासूम सी उम्र में उपलब्धियों के मायने कितने अलग होते थे
A) शिक्षक ने क्लास में सभी बच्चों के बीच अगर हमें हमारे नाम से पुकार लिया .....
😎 शिक्षक ने अपना रजिस्टर स्टाफ रूम में रखकर आने बोल दिया तो समझो कैबिनेट मिनिस्टरी में चयन का गर्व होता था।

आज भी याद है जब बहुत छोटे थे तब बाज़ार या किसी समारोह में हमारी शिक्षक दिख जाए तो भीड़ की आड़ ले छिप जाते थे। जाने क्यों, किसी भी सार्वजनिक जगह पर टीचर को देख हम छिप जाते थे?

कैसे भूल सकते है, अपने उन गणित के टीचर को जिनके खौफ से 13, 17 और 19 का पहाड़ा याद कर पाए थे।

कैसे भूल सकते है उन हिंदी के शिक्षक को जिनके आवेदन पत्रों से ये गूढ़ ज्ञान मिला कि बुखार नही ज्वर पीड़ित होने के साथ विनम्र निवेदन कहने के बाद ही तीन दिन का अवकाश मिल सकता था।

वो शिक्षक तो आपको भी बहुत अच्छे से याद होंगे जिन्होंने आपकी क्लास को स्कूल की सबसे शैतान क्लास की उपाधि से नवाज़ा था।

उन शिक्षक को तो कतई नही भुलाया जा सकता जो होमवर्क कॉपी भूलने पर ये कहकर कि ... *“कभी खाना खाना भूलते हो?” ... बेइज़्ज़त करने वाले तकियाकलाम से हमें शर्मिंदा करते थे।

शिक्षक के महज़ इतना कहते ही कि "एक कोरा पेज़ देना" पूरी कक्षा में फड़फड़ाते 50 पन्ने फट जाते थे।

शिक्षक के टेबल के पास खड़े रहकर कॉपी चेक कराने के बदले यदि सौ दफा सूली पर लटकना पड़े तो वो ज्यादा आसान लगता था।

क्लास में शिक्षक के प्रश्न पूछने पर उत्तर याद न आने पर कुछ लड़के/ लडकियों के हाव भाव ऐसे होते थे कि उत्तर तो जुबान पर रखा है बस जरा सा छोर हाथ नहीं आ रहा। ये ड्रामेबाज छात्र उत्तर की तलाश में कभी छत ताकते, कभी आँखे तरेरते, कभी हाथ झटकते। देर तक आडम्बर झेलते-झेलते आखिर शिक्षक के सब्र का बांध टूट जाता -- you, yes you, get out from my class ....।

सुबह की प्रार्थना में जब हम दौड़ते भागते देर से पहुँचते तो हमारे शिक्षकों को रत्तीभर भी अंदाजा न होता था कि हम शातिर छात्रों का ध्यान प्रार्थना में कम और आज के सौभाग्य से कौन-कौन सी शिक्षक अनुपस्थित है, के मुआयने में ज्यादा रहता था।

आपको भी वो शिक्षक याद है न, जिन्होंने ज्यादा बात करने वाले दोस्तों की जगह बदल उनकी दोस्ती कमजोर करने की साजिश की थी।

मैं आज भी दावा कर सकता हूँ, कि एक या दो शिक्षक शर्तिया ऐसे होते है जिनके शिर के पीछे की तरफ़ अदृश्य नेत्र का वरदान मिलता है, ये शिक्षक ब्लैक बोर्ड में लिखने में व्यस्त रहकर भी चीते की फुर्ती से पलटकर कौन बात कर रहा है का सटीक अंदाज़ लगाते थे।

वो शिक्षक याद आये या नहीं जो चाक का उपयोग लिखने में कम और बात करते बच्चों पर भाला फेंक शैली में ज्यादा लाते ।

हर क्लास में एक ना एक बच्चा होता ही था, जिसे अपनी बुद्धिमत्ता का प्रदर्शन करने में विशेष महारत होती थी और ये प्रश्नपत्र थामे एक अदा से खड़े होते थे... मैम आई हैव आ डाउट इन क्वैशच्यन नम्बर 11 ....हमें डेफिनेशन के साथ उदाहरण भी देना है क्या? उस इंटेलिजेंट की शक्ल देख खून खौलता।

परीक्षा के बाद जाँची हुई कापियों का बंडल थामे कॉपी बाँटने क्लास की तरफ आते शिक्षक साक्षात सुनामी लगते थे।

ये वो दिन थे, जब कागज़ के एक पन्ने को छूकर खाई 'विद्या कसम' के साथ बोली गयी बात, संसार का अकाट्य सत्य, हुआ करता था।

मेरे लिए आज तक एक रहस्य अनसुलझा ही है कि खेल के पीरियड का 40 मिनिट छोटा और इतिहास का पीरियड वही 40 मिनिट लम्बा कैसे हो जाता था ??

सामने की सीट पर बैठने के नुकसान थे तो कुछ फायदे भी थे। मसलन चाक खत्म हुई तो मैम के इतना कहते ही कि "कोई भी जाओ बाजू वाली क्लास से चाक ले आना" सामने की सीट में बैठा बच्चा लपक कर क्लास के बाहर, दूसरी क्लास में " मे आई कम इन" कह सिंघम एंट्री करते।

"सरप्राइज़ चेकिंग" पर हम पर कापियाँ जमा करने की बिजली भी गिरती थी, सभी बच्चों को चेकिंग के लिए कॉपी टेबल पर ले जाकर रखना अनिवार्य होता था। टेबल पर रखे जा रहे कॉपियों के ऊँचे ढेर में अपनी कॉपी सबसे नीचे दबा आने पर तूफ़ान को जरा देर के लिए टाल आने की तसल्ली मिलती थी।

वो निर्दयी शिक्षक जो पीरियड खत्म होने के बाद का भी पाँच मिनिट पढ़ाकर हमारे लंच ब्रेक को छोटा कर देते थे। चंद होशियार बच्चे हर क्लास में होते हैं जो मैम के क्लास में घुसते ही याद दिलाने का सेक्रेटरी वाला काम करते थे "मैम कल आपने होमवर्क दिया था।" जी में आता था इस आइंस्टीन की औलाद को डंडों से धुन के धर दो।

तमाम शरारतों के बावजूद ये बात सौ आने सही हैं कि बरसों बाद उन शिक्षक के प्रति स्नेह और सम्मान बढ़ जाता है, अब वो किसी मोड़ पर अचानक मिल जाएं तो बचपन की तरह अब हम छिपेंगे तो कतई नहीं।

आज भी जब मैं अपने विद्यालय या महाविद्यालय की बिल्डिंग के सामने से गुजरता हूँ तो लगता है कि एक दिन था जब ये बिल्डिंग मेरे जीवन का अभिन्न हिस्सा थी। अब उस बिल्डिंग में न मेरे दोस्त हैं, न हमको पढ़ाने वाले वो शिक्षक। बच्चों को लेट एंट्री से रोकने गेट बंद करते स्टाफ भी नहीं दिखते जिन्हें देखते ही हम दूर से चिल्लाते थे “गेट बंद मत करो भैय्या प्लीज़” वो बूढ़े से बाबा भी नहीं हैं जो मैम से हस्ताक्षर लेने जब जब लाल रजिस्टर के साथ हमारी क्लास में घुसते, तो बच्चों में ख़ुशी की लहर छा जाती “कल छुट्टी है”

अब विद्यालय के सामने से निकलने से एक टीस सी उठती है जैसे मेरी कोई बहुत अजीज चीज़ छिन गयी हो। आज भी जब उस इमारत के सामने से निकलता हूँ, तो पुरानी यादों में खो जाता हूं।

स्कूल/कालेज की शिक्षा पूरी होते ही व्यवहारिकता के कठोर धरातल में, अपने उत्तरदाइत्वों को निभाते, दूसरे शहरों में रोजगार का पीछा करते, दुनियादारी से दो चार होते, जिम्मेदारियों को ढोते हमारा संपर्क उन सबसे टूट जाता है, जिनसे मिले मार्गदर्शन, स्नेह, अनुशासन, ज्ञान, ईमानदारी, परिश्रम की सीख और लगाव की असंख्य कोहिनूरी यादें किताब में दबे मोरपंख सी साथ होती है, जब चाहा खोल कर उस मखमली अहसास को छू लिया।

19/05/2021

*मैं पैदल घर आ रहा था । रास्ते में एक बिजली के खंभे पर एक कागज लगा हुआ था । पास जाकर देखा, लिखा था:*

*कृपया पढ़ें*

*"इस रास्ते पर मैंने कल एक 50 का नोट गंवा दिया है । मुझे ठीक से दिखाई नहीं देता । जिसे भी मिले कृपया इस पते पर दे सकते हैं ।" ...*

*यह पढ़कर पता नहीं क्यों उस पते पर जाने की इच्छा हुई । पता याद रखा । यह उस गली के आखिरी में एक घऱ था । वहाँ जाकर आवाज लगाया तो एक वृद्धा लाठी के सहारे धीरे-धीरे बाहर आई । मुझे मालूम हुआ कि वह अकेली रहती है । उसे ठीक से दिखाई नहीं देता ।*
*"माँ जी", मैंने कहा - "आपका खोया हुआ 50 मुझे मिला है उसे देने आया हूँ ।"*

*यह सुन वह वृद्धा रोने लगी ।*

*"बेटा, अभी तक करीब 50-60 व्यक्ति मुझे 50-50₹ दे चुके हैं । मै पढ़ी-लिखी नहीं हूँ, । ठीक से दिखाई नहीं देता । पता नहीं कौन मेरी इस हालत को देख मेरी मदद करने के उद्देश्य से लिख गया है ।"*

*बहुत ही कहने पर माँ जी ने पैसे तो रख लिए । पर एक विनती की - ' बेटा, वह मैंने नहीं लिखा है । किसी ने मुझ पर तरस खाकर लिखा होगा । जाते-जाते उसे फाड़कर फेंक देना बेटा ।'मैनें हाँ कहकर टाल तो दिया पर मेरी *अंतरात्मा ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया कि उन 50-60 लोगों से भी "माँ" ने यही कहा होगा । किसी ने भी नहीं *फाड़ा ।जिंदगी मे हम कितने सही और कितने गलत है, ये सिर्फ दो ही शक्स जानते है..*
*परमात्मा और अपनी* *अंतरआत्मा..!! मेरा हृदय उस व्यक्ति के प्रति कृतज्ञता से भर गया । जिसने इस वृद्धा की सेवा का उपाय ढूँढा । सहायता के तो बहुत से मार्ग हैं , पर इस तरह की सेवा मेरे हृदय को छू गई । और मैंने भी उस कागज को फाड़ा नहीं ।मदद के तरीके कई हैं सिर्फ कर्म करने की तीव्र इच्छा मन मॆ होनी चाहिए।*
(अज्ञात)

*कुछ नेकियाँ*
*और*

*कुछ अच्छाइयां..*

*अपने जीवन में ऐसी भी करनी चाहिए,*

*जिनका ईश्वर के सिवाय..*

*कोई और गवाह ना हो...!!*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

ट्रेन के ए.सी. कम्पार्टमेंट में मेरे सामने की सीट पर बैठी लड़की ने मुझसे पूछा " हैलो, क्या आपके पास इस मोबाइल की सिम निका...
18/05/2021

ट्रेन के ए.सी. कम्पार्टमेंट में मेरे सामने की सीट पर बैठी लड़की ने मुझसे पूछा " हैलो, क्या आपके पास इस मोबाइल की सिम निकालने की पिन है??"
उसने अपने बैग से एक फोन निकाला, वह नया सिम कार्ड उसमें डालना चाहती थी। लेकिन सिम स्लॉट खोलने के लिए पिन की जरूरत पड़ती है, जो उसके पास नहीं थी। मैंने हाँ में गर्दन हिलाई और अपने क्रॉस बैग से पिन निकालकर लड़की को दे दी। लड़की ने थैंक्स कहते हुए पिन ले ली और सिम डालकर पिन मुझे वापिस कर दी।

थोड़ी देर बाद वो फिर से इधर उधर ताकने लगी, मुझसे रहा नहीं गया.. मैंने पूछ लिया "कोई परेशानी??"

वो बोली सिम स्टार्ट नहीं हो रही है, मैंने मोबाइल मांगा, उसने दिया। मैंने उसे कहा कि सिम अभी एक्टिवेट नहीं हुई है, थोड़ी देर में हो जाएगी। एक्टिव होने के बाद आईडी वेरिफिकेशन होगा, उसके बाद आप इसे इस्तेमाल कर सकेंगी।

लड़की ने पूछा, आईडी वेरिफिकेशन क्यों??

मैंने कहा " आजकल सिम वेरिफिकेशन के बाद एक्टिव होती है, जिस नाम से ये सिम उठाई गई है, उसका ब्यौरा पूछा जाएगा बता देना"
लड़की बुदबुदाई "ओह्ह "
मैंने दिलासा देते हुए कहा "इसमें कोई परेशानी की कोई बात नहीं"

वो अपने एक हाथ से दूसरा हाथ दबाती रही, मानो किसी परेशानी में हो। मैंने फिर विन्रमता से कहा "आपको कहीं कॉल करना हो तो मेरा मोबाइल इस्तेमाल कर लीजिए"

लड़की ने कहा "जी फिलहाल नहीं, थैंक्स, लेकिन ये सिम किस नाम से खरीदी गई है मुझे नहीं पता"
मैंने कहा "एक बार एक्टिव होने दीजिए, जिसने आपको सिम दी है उसी के नाम की होगी"
उसने कहा "ओके, कोशिश करते हैं"
मैंने पूछा "आपका स्टेशन कहाँ है??"

लड़की ने कहा "दिल्ली"
और आप?? लड़की ने मुझसे पूछा

मैंने कहा "दिल्ली ही जा रहा हूँ, एक दिन का काम है,
आप दिल्ली में रहती हैं या...?"

लड़की बोली "नहीं नहीं, दिल्ली में कोई काम नहीं , ना ही मेरा घर है वहाँ"
तो ???? मैंने उत्सुकता वश पूछा

वो बोली "दरअसल ये दूसरी ट्रेन है, जिसमें आज मैं हूँ, और दिल्ली से तीसरी गाड़ी पकड़नी है, फिर हमेशा के लिए आज़ाद"
आज़ाद??
लेकिन किस तरह की कैद से??
मुझे फिर जिज्ञासा हुई किस कैद में थी ये कमसिन अल्हड़ सी लड़की..

लड़की बोली, उसी कैद में थी, जिसमें हर लड़की होती है। जहाँ घरवाले कहे शादी कर लो, जब जैसा कहे, वैसा करो। मैं घर से भाग चुकी हूं..

मुझे ताज्जुब हुआ, मगर अपने ताज्जुब को छुपाते हुए मैंने हंसते हुए पूछा "अकेली भाग रही हैं आप? आपके साथ कोई नजर नहीं आ रहा? "

वो बोली "अकेली नहीं, साथ में है कोई"
कौन? मेरे प्रश्न खत्म नहीं हो रहे थे

दिल्ली से एक और ट्रेन पकड़ूँगी, फिर अगले स्टेशन पर वो जनाब मिलेंगे, और उसके बाद हम किसी को नहीं मिलेंगे..
ओह्ह, तो ये प्यार का मामला है।
उसने कहा "जी"

मैंने उसे बताया कि 'मैंने भी लव मैरिज की है।'
ये बात सुनकर वो खुश हुई, बोली "वाओ, कैसे कब?" लव मैरिज की बात सुनकर वो मुझसे बात करने में रुचि लेने लगी

मैंने कहा "कब कैसे कहाँ? वो मैं बाद में बताऊंगा, पहले आप बताओ आपके घर में कौन कौन है?

उसने होशियारी बरतते हुए कहा " वो मैं आपको क्यों बताऊं? मेरे घर में कोई भी हो सकता है, मेरे पापा माँ भाई बहन, या हो सकता है भाई ना हो सिर्फ बहनें हो, या ये भी हो सकता है कि बहने ना हो और 2-4 गुस्सा करने वाले बड़े भाई हो"

मतलब मैं आपका नाम भी नहीं पूछ सकता "मैंने काउंटर मारा"
वो बोली, 'कुछ भी नाम हो सकता है मेरा, टीना, मीना, रीना, कुछ भी'

बहुत बातूनी लड़की थी वो.. थोड़ी इधर उधर की बातें करने के बाद उसने मुझे टॉफी दी जैसे छोटे बच्चे देते हैं क्लास में,
बोली आज मेरा बर्थडे है।

मैंने उसकी हथेली से टॉफी उठाते बधाई दी और पूछा "कितने साल की हुई हो?"
वो बोली "18"

"मतलब भागकर शादी करने की कानूनी उम्र हो गई आपकी"
वो "हंसी"

कुछ ही देर में काफी फ्रैंक हो चुके थे हम दोनों, जैसे बहुत पहले से जानते हो एक दूसरे को..

मैंने उसे बताया कि "मेरी उम्र 35 साल है, यानि 17 साल बड़ा हूं"

उसने चुटकी लेते हुए कहा "लग तो नहीं रहे हो"
मैं मुस्कुरा दिया
मैंने उससे पूछा "तुम घर से भागकर आई हो, तुम्हारे चेहरे पर चिंता के निशान जरा भी नहीं है, इतनी बेफिक्री मैंने पहली बार देखी"

खुद की तारीफ सूनकर वो खुश हुई, बोली "मुझे उन जनाब ने, मेरे लवर ने पहले से ही समझा दिया था कि जब घर से निकलो तो बिल्कुल बिंदास रहना, घरवालों के बारे में बिल्कुल मत सोचना, बिल्कुल अपना मूड खराब मत करना, सिर्फ मेरे और हम दोनों के बारे में सोचना और मैं वही कर रही हूँ"

मैंने फिर चुटकी ली, कहा "उसने तुम्हें मुझ जैसे अनजान मुसाफिरों से दूर रहने की सलाह नहीं दी?"
उसने हंसकर जवाब दिया "नहीं, शायद वो भूल गया होगा ये बताना"

मैंने उसके प्रेमी की तारीफ करते हुए कहा " वैसे तुम्हारा बॉय फ्रेंड काफी टैलेंटेड है, उसने किस तरह से तुम्हे अकेले घर से रवाना किया, नई सिम और मोबाइल दिया, तीन ट्रेन बदलवाई.. ताकि कोई ट्रेक ना कर सके, वेरी टैलेंटेड पर्सन"

लड़की ने हामी भरी, " बोली बहुत टैलेंटेड है वो, उसके जैसा कोई नहीं"
मैंने उसे बताया कि "मेरी शादी को 10 साल हुए हैं, एक बेटी है 8 साल की और एक बेटा 1 साल का, ये देखो उनकी तस्वीर"

मेरे फोन पर बच्चों की तस्वीर देखकर उसके मुंह से निकल गया "सो क्यूट"
मैंने उसे बताया कि "ये जब पैदा हुई, तब मैं कुवैत में था, एक पेट्रो कम्पनी में बहुत अच्छी जॉब थी मेरी, बहुत अच्छी सेलेरी थी.. फिर कुछ महीनों बाद मैंने वो जॉब छोड़ दी, और अपने ही कस्बे में काम करने लगा।"
लड़की ने पूछा जॉब क्यों छोड़ी??

मैंने कहा "बच्ची को पहली बार गोद में उठाया तो ऐसा लगा जैसे मेरी दुनिया मेरे हाथों में है, 30 दिन की छुट्टी पर घर आया था, वापस जाना था, लेकिन जा ना सका। इधर बच्ची का बचपन खर्च होता रहे उधर मैं पूरी दुनिया कमा लूं, तब भी घाटे का सौदा है। मेरी दो टके की नौकरी, बचपन उसका लाखों का.."

उसने पूछा "क्या बीवी बच्चों को साथ नहीं ले जा सकते थे वहाँ?"

मैंने कहा "काफी टेक्निकल मामलों से गुजरकर एक लंबे समय के बाद रख सकते हैं, उस वक्त ये मुमकिन नहीं था.. मुझे दोनों में से एक को चुनना था, आलीशान रहन सहन के साथ नौकरी या परिवार.. मैंने परिवार चुना अपनी बेटी को बड़ा होते देखने के लिए। मैं कुवैत वापस गया था, लेकिन अपना इस्तीफा देकर लौट आया।"

लड़की ने कहा "वेरी इम्प्रेसिव"
मैं मुस्कुराकर खिड़की की तरफ देखने लगा

लड़की ने पूछा "अच्छा आपने तो लव मैरिज की थी न, फिर आप भागकर कहाँ गए??
कैसे रहे और कैसे गुजरा वो वक्त??

उसके हर सवाल और हर बात में मुझे महसूस हो रहा था कि ये लड़की लकड़पन के शिखर पर है, बिल्कुल नासमझ और मासूम छोटी बहन सी।
मैंने उसे बताया कि हमने भागकर शादी नहीं की, और ये भी है कि उसके पापा ने मुझे पहली नजर में सख्ती से रिजेक्ट कर दिया था।"

उन्होंने आपको रिजेक्ट क्यों किया?? लड़की ने पूछा

मैंने कहा "रिजेक्ट करने का कुछ भी कारण हो सकता है, मेरी जाति, मेरा काम,,घर परिवार,
"बिल्कुल सही", लड़की ने सहमति दर्ज कराई और आगे पूछा "फिर आपने क्या किया?"

मैंने कहा "मैंने कुछ नहीं किया,उसके पिता ने रिजेक्ट कर दिया वहीं से मैंने अपने बारे में अलग से सोचना शुरू कर दिया था। खुशबू ने मुझे कहा कि भाग चलते हैं, मेरी वाइफ का नाम खुशबू है..मैंने दो टूक मना कर दिया। वो दो दिन तक लगातार जोर देती रही, कि भाग चलते हैं।
मैं मना करता रहा.. मैंने उसे समझाया कि "भागने वाले जोड़े में लड़के की इज़्ज़त पर पर कोई ख़ास फर्क नहीं पड़ता, जबकि लड़की के पूरे कुल की इज्ज़त धुल जाती है। भगाने वाला लड़का उसके दोस्तों में हीरो माना जाता है, लेकिन इसके विपरीत जो लड़की प्रेमी संग भाग रही है, वो कुल्टा कहलाती है, मुहल्ले के लड़के उसे चालू कहते है । बुराइयों के तमाम शब्दकोष लड़की के लिए इस्तेमाल किये जाते हैं। भागने वाली लड़की आगे चलकर 60 साल की वृद्धा भी हो जाएगी तब भी जवानी में किये उस कांड का कलंक उसके माथे पर से नहीं मिटता।
मैं मानता हूँ कि लड़का लड़की को तौलने का ये दोहरा मापदंड गलत है, लेकिन हमारे समाज में है तो यही , ये नजरिया गलत है, मगर सामाजिक नजरिया यही है,

वो अपने नीचे का होंठ दांतों तले पीसने लगी, उसने पानी की बोतल का ढक्कन खोलकर एक घूंट पिया।

मैंने कहा अगर मैं उस दिन उसे भगा ले जाता तो उसकी माँ तो शायद कई दिनों तक पानी भी ना पीती, इसलिए मेरी हिम्मत ना हुई कि ऐसा काम करूँ.. मैं जिससे प्रेम करूँ, उसके माँ बाप मेरे माँ बाप के समान ही है, चाहे शादी ना हो, तो ना हो।

कुछ पल के लिए वो सोच में पड़ गई , लेकिन मेरे बारे में और अधिक जानना चाहती थी, उसने पूछा "फिर आपकी शादी कैसे हुई???
मैंने बताया कि " खुशबू की सगाई कहीं और कर दी गई थी। धीरे धीरे सबकुछ नॉर्मल होने लगा था। खुशबू और उसके मंगेतर की बातें भी होने लगी थी फोन पर, लेकिन जैसे जैसे शादी नजदीक आने लगी, उन लोगों की डिमांड बढ़ने लगी"

डिमांड मतलब 'लड़की ने पूछा'

डिमांड का एक ही मतलब होता है, दहेज की डिमांड। परिवार में सबको सोने से बने तोहफे दो, दूल्हे को लग्जरी कार चाहिए, सास और ननद को नेकलेस दो वगैरह वगैरह, बोले हमारे यहाँ रीत है। लड़का भी इस रीत की अदायगी का पक्षधर था। वो सगाई मैंने तुड़वा डाली..इसलिए नहीं की सिर्फ मेरी शादी उससे हो जाये, बल्कि ऐसे लालची लोगों में खुशबू कभी खुश नहीं रह सकती थी । ना उसका परिवार, फिर किसी तरह घरवालों को समझा बुझा कर मैं फ्रंट पर आ गया और हमारी शादी हो गई। ये सब किस्मत की बात थी..
लड़की बोली "चलो अच्छा हुआ आप मिल गए, वरना वो गलत लोगों में फंस जाती"

मैंने कहा "जरूरी नहीं कि माता पिता का फैसला हमेशा सही हो, और ये भी जरूरी नहीं कि प्रेमी जोड़े की पसन्द सही हो.. दोनों में से कोई भी गलत या सही हो सकता है..काम की बात यहाँ ये है कि कौन ज्यादा वफादार है।"

लड़की ने फिर से पानी का घूंट लिया और मैंने भी.. लड़की ने तर्क दिया कि "हमारा फैसला गलत हो जाए तो कोई बात नहीं, उन्हें ग्लानि नहीं होनी चाहिए"

मैंने कहा "फैसला ऐसा हो जो दोनों का हो, बच्चों और माता पिता दोनों की सहमति, वो सबसे सही है। बुरा मत मानना मैं कहना चाहूंगा कि तुम्हारा फैसला तुम दोनों का है, जिसमे तुम्हारे पेरेंट्स शामिल नहीं है, ना ही तुम्हें इश्क का असली मतलब पता है अभी"

उसने पूछा "क्या है इश्क़ का सही अर्थ?"

मैंने कहा "तुम इश्क में हो, तुम अपना सबकुछ छोड़कर चली आई ये सच्चा इश्क़ है, तुमने दिमाग पर जोर नहीं दिया ये इश्क है, फायदा नुकसान नहीं सोचा ये इश्क है...तुम्हारा दिमाग़ दुनियादारी के फितूर से बिल्कुल खाली था, उस खाली जगह में इश्क का फितूर भर दिया गया। जिन जनाब ने इश्क को भरा क्या वो इश्क में नहीं है.. यानि तुम जिसके साथ जा रही हो वो इश्क में नहीं, बल्कि होशियारी हीरोगिरी में है। जो इश्क में होता है वो इतनी प्लानिंग नहीं कर पाता है, तीन ट्रेनें नहीं बदलवा पाता है, उसका दिमाग इतना काम ही नहीं कर पाता.. कोई कहे मैं आशिक हुँ, और वो शातिर भी हो ये नामुमकिन है।मजनूं इश्क में पागल हो गया था, लोग पत्थर मारते थे उसे, इश्क में उसकी पहचान तक मिट गई। उसे दुनिया मजनूं के नाम से जानती है, जबकि उसका असली नाम कैस था, जो नहीं इस्तेमाल किया जाता। वो शातिर होता तो कैस से मजनूं ना बन पाता। फरहाद ने शीरीं के लिए पहाड़ों को खोदकर नहर निकाल डाली थी और उसी नहर में उसका लहू बहा था, वो इश्क़ था। इश्क़ में कोई फकीर हो गया, कोई जोगी हो गया, किसी मांझी ने पहाड़ तोड़कर रास्ता निकाल लिया..किसी ने अतिरिक्त दिमाग़ नहीं लगाया..चालाकी नहीं की ।
लालच ,हवस और हासिल करने का नाम इश्क़ नहीं है.. इश्क समर्पण करने को कहते हैं, जिसमें इंसान सबसे पहले खुद का समर्पण करता है, जैसे तुमने किया, लेकिन तुम्हारा समर्पण हासिल करने के लिए था, यानि तुम्हारे इश्क में लालच की मिलावट हो गई

लकड़ी अचानक खो सी गई.. उसकी खिलख़िलाहट और खिलंदड़ापन एकदम से खमोशी में बदल गया.. मुझे लगा मैं कुछ ज्यादा बोल गया, फिर भी मैंने जारी रखा, मैंने कहा " प्यार तुम्हारे पापा तुमसे करते हैं, कुछ दिनों बाद उनका वजन आधा हो जाएगा, तुम्हारी माँ कई दिनों तक खाना नहीं खाएगी ना पानी पियेगी.. जबकि आपको अपने आशिक को आजमा कर देख लेना था, ना तो उसकी सेहत पर फर्क पड़ता, ना दिमाग़ पर, वो अक्लमंद है, अपने लिए अच्छा सोच लेता।
आजकल गली मोहल्ले के हर तीसरे लौंडे लपाटे को जो इश्क हो जाता है, वो इश्क नहीं है, वो सिनेमा जैसा कुछ है। एक तरह की स्टंटबाजी, डेरिंग, अलग कुछ करने का फितूर..और कुछ नहीं।

लड़की का चेहरे का रंग बदल गया, ऐसा लग रहा था वो अब यहाँ नहीं है, उसका दिमाग़ किसी अतीत में टहलने निकल गया है। मैं अपने फोन को स्क्रॉल करने लगा.. लेकिन मन की इंद्री उसकी तरफ थी।

थोड़ी ही देर में उसका और मेरा स्टेशन आ गया.. बात कहाँ से निकली थी और कहाँ पहुँच गई.. उसके मोबाइल पर मैसेज टोन बजी, देखा, सिम एक्टिवेट हो चुकी थी.. उसने चुपचाप बैग में से आगे का टिकट निकाला और फाड़ दिया.. मुझे कहा एक कॉल करना है, मैंने मोबाइल दिया.. उसने नम्बर डायल करके कहा "सोरी पापा, और सिसक सिसक कर रोने लगी, सामने से पिता भी फोन पर बेटी को संभालने की कोशिश करने लगे.. उसने कहा पिताजी आप बिल्कुल चिंता मत कीजिए मैं घर आ रही हूँ..दोनों तरफ से भावनाओं का सागर उमड़ पड़ा"

हम ट्रेन से उतरे, उसने फिर से पिन मांगी, मैंने पिन दी.. उसने मोबाइल से सिम निकालकर तोड़ दी और पिन मुझे वापस कर दिया

कहानी को अंत तक पढ़ने का धन्यवाद।
देश की सभी बेटियों को समर्पित-
ये मेरा दावा है माता पिता से ज्यादा तुम्हें दुनिया मे कोई प्यार नहीं करता।
कहानी पढ़कर, शेयर अवश्य कीजिएगा, शायद कोई परिवार, कोई बेटी और उनका भविष्य इससे बच जाए 🙏

26/04/2021

जरूर पढ़े आपका समय व्यर्थ नहीं जाएगा 🙏

(Repost)

पुरानी बात है ....एक लड़का था ...बहुत brilliant था. सारी जिंदगी फर्स्ट आया ....हमेशा 100 % score किया science में ....अब ऐसे लड़के आम तौर पर इंजिनियर बनने चले जाते हैं ...सो उसका भी selection हो गया ....IIT CHENNAI में ........वहां से B Tech किया .....वहां से आगे पढने अमेरिका चला गया ...वहां से आगे की पढ़ाई पूरी की .......M Tech वगैरा कुछ किया होगा .....फिर वहां university of california से MBA किया .......अब इतना पढने के बाद तो वहां अच्छी नौकरी मिल ही जाती है ...सुनते हैं की वहां भी हमेशा टॉप ही किया ......वहीं नौकरी करने लगा ...बताया जाता है की 5 बेडरूम घर था उसके पास .........शादी यहाँ चेन्नई की ही एक बेहद खूबसूरत लड़की से हुई थी ............बताते हैं की ससुर साहब भी कोई बड़े आदमी ही थे कई किलो सोना दिया उन्होंने अपनी लड़की को दहेज़ में .........अब हमारे यहाँ आजकल के हिन्दुस्तान में इस से आदर्श जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती ........एक आदमी और क्या मांग सकता है अपने जीवन में .....पढ़ लिख के इंजिनियर बन गए..... अमेरिका में settle हो गए ....मोटी तनख्वाह की नौकरी ...बीवी बच्चे ....सुख ही सुख ......इसके बाद हीरो हेरोइने सुखपूर्वक वहां की साफ़ सुथरी सड़कों पर भ्रष्टाचार मुक्त माहौल में सुखपूर्वक विचरने लगे ....the end ........

अब एक दोस्त हैं हमारे ...भाई नीरज जाट जी ...एक नंबर के घुमक्कड़ हैं ......घर कम रहते हैं सफ़र में ज्यादा रहते हैं ......ऐसी ऐसी जगह घूमने चल पड़ते हैं पैदल ही .....4 -6 दिन पहाड़ों पर घूमना ,trekking करना उनके लिए आम बात है ...ऐसे ऐसे दुर्गम स्थानों पर जाते है ....फिर आ के किस्से सुनाते हैं ....ब्लॉग लिखते हैं ........उनका ब्लॉग पढ़ के मुझे थकावट हो जाती है ......न रहने का ठिकाना न खाने का ठिकाना ( सफ़र में )........फिर भी कोई टेंशन नहीं चल पड़े घूमने ...बैग कंधे पर लाद के .......मेरी बीवी कहती है अक्सर ...की एक तो तुम पहले ही आवारा थे ऊपर से ऐसे दोस्त पाल लिए ....नीरज जाट जैसे ....जो न खुद घर रहता है ...न दूसरों को रहने देता है ......बहला फुसला के ले जाता है अपने साथ ..........पर मुझे उनकी घुमक्कड़ी देख सुन के रश्क होता है ....कितना rough n tough है यार ये आदमी ....कितना जीवट है इसमें .........बड़ी सख्त जान है

आइये अब जरा कहानी के पहले पात्र पर दुबारा आ जाते हैं .....तो आप उस इंजिनियर लड़के का क्या future देखते हैं लाइफ में ?????? सब बढ़िया ही दीखता है ....पर नहीं ........आज से तीन साल पहले उन्होंने वहां अमेरिका में .....सपरिवार आत्महत्या कर ली ........अपनी पत्नी और बच्चों को गोली मार कर खुद को भी गोली मार ली ........what went wrong ????????? आखिर ऐसा क्या हुआ ....गड़बड़ कहाँ हुई .........ये कदम उठाने से पहले उन्होंने बाकायदा अपनी wife से discuss किया ...फिर एक लम्बा su***de नोट लिखा ...और उसमें बाकायदा justify किया अपने इस कदम को ...और यहाँ तक लिखा की यही सबसे श्रेष्ठ रास्ता था इन परिस्थितयों में ..........उनके इस केस को और उस su***de नोट को california institute of clinical psychology ने study किया है ....what went wrong ......हुआ यूँ था की अमेरिका की आर्थिक मंदी में उनकी नौकरी चली गयी ........बहुत दिन खाली बैठे रहे ...नौकरियां ढूंढते रहे ..........फिर अपनी तनख्वाह कम करते गए फिर भी जब नौकरी न मिली .....मकान की किश्त जब टूट गयी ...तो सड़क पे आने की नौबत आ गयी ....कुछ दिन किसी petrol pump पे तेल भरा बताते हैं .........साल भर ये सब बर्दाश्त किया और फिर अंत में ख़ुदकुशी कर ली ख़ुशी ख़ुशी .....और वो बीवी भी इसके लिए राज़ी हो गयी ...ख़ुशी ख़ुशी .......जी हाँ लिखा है उन्होंने ...की हम सब लोग बहुत खुश हैं ....की अब सब कुछ ठीक हो जायेगा ........सब कष्ट ख़तम हो जायेंगे ..........इस case study को ऐसे conclude किया है experts ने .......this man was programmed for success but he was not trained,how to handle failure .........यह व्यक्ति सफलता के लिए तो तैयार था पर इसे जीवन में ये नहीं सिखाया गया की असफलता का सामना कैसे किया जाए ..........

आइये ज़रा उसके जीवन पर शुरू से नज़र डालते हैं ..........बहुत तेज़ था पढने में, हमेशा फर्स्ट ही आया ........ऐसे बहुत से parents को मैं जानता हूँ जो यही चाहते है की बस उनका बच्चा हमेशा फर्स्ट ही आये ....कोई गलती न हो उस से ....... गलती करना तो यूँ मानो कोई बहुत बड़ा पाप कर दिया ...और इसके लिए वो सब कुछ करते हैं .....हमेशा फर्स्ट आने के लिए .....फिर ऐसे बच्चे चूंकि पढ़ाकू कुछ ज्यादा होते हैं सो खेल कूद ,घूमना फिरना ,लड़ाई झगडा ,मार पीट ऐसे पंगों का मौका कम मिलता है बेचारों को .....12 th कर के निकले तो इंजीनियरिंग कॉलेज का बोझ लद गया बेचारे पर .वहां से निकले तो MBA .और अभी पढ़ ही रहे थे की मोटी तनख्वाह की नौकरी ....अब मोटी तनख्वाह तो बड़ी जिम्मेवारी .........य्यय्य्ये बड़े बड़े targets .........कमबख्त ये दुनिया स्स्सस्साली ......... बड़ी कठोर है ......और ये ज़िदगी ...अलग से इम्तहान लेती है ....आपकी कॉलेज की डिग्री और मार्कशीट से कोई मतलब नहीं उसे ........वहां कितने नंबर लिए कोई फर्क नहीं पड़ता .....ये ज़िदगी अपना अलग question paper सेट करती है ....और सवाल साले ...सब out ऑफ़ syllabus होते हैं .........टेढ़े मेढ़े ...ऊट पटाँग ....और रोज़ इम्तहान लेती है ...कोई डेट sheet नहीं ......

एक बार एक बहुत बड़े स्कूल में हम लोग summer camp ले रहे थे .....दिल्ली में ........ mercedeze और BMW में आते थे बच्चे वहां .......तभी एक लड़की ....रही होगी यही कोई 7 -8 साल की अचानक जोर जोर से रोने लगी .........हम लोग दौड़े ....क्या हुआ भैया .....देखा तो वो लड़की गिर गयी थी. वहां ज़मीन कुछ गीली थी सो उसके हाथ में वो गीली मिटटी लग गयी थी .......और थोड़ी उसकी frock में भी ........सो वो जार जार रो रही थी ...खैर हमने उसके हाथ धोये ....और ये बताया की कुछ नहीं हुआ बेटा ...ये देखो.....धुल गयी मिटटी .......खैर साहब थोड़ी देर में उसकी माँ आ गयी ......high heels पहन के .......और उसने हमारी बड़ी क्लास लगाई......की आप लोग ठीक से काम नहीं करते हो ....लापरवाही करते हो ............कैसे गिर गया बच्चा ..........अगर कुछ हो जाता तो ???????? सचमुच इतना बड़ा हादसा ...भगवान् न करे किसी के साथ हो जीवन में ........ एक और आँखों देखी घटना है मेरी ..........कैसे माँ बाप अपने बच्चों को spoil करते हैं ........हम लोग एक स्कूल में एक और कैंप लगा रहे थे ..........बच्चे स्कूल बस से आते थे ...........ड्राईवर ने जोर से ब्रेक मारी तो एक बच्चा गिर गया और उसके माथे पे हलकी सी चोट लग गयी .....यही कोई एक सेन्टीमीटर का हल्का सा कट .......अब वो बच्चा जोर जोर से रोने लगा .....बस यूँ समझ लीजे चिंघाड़ चिंघाड़ के .....क्योंकि उसने वो खून देख लिया अपने हाथ पे ............खैर मामूली सी बात थी ......हमने उसे फर्स्ट ऐड दे के बैठा दिया .............तभी भैया ....यही कोई 10 मिनट बीते होंगे .........उस बच्चे के माँ बाप पहुँच गए स्कूल .... और फिर वहां जो रोआ राट मची ........वो बच्चा जितनी जोर से रोता ...उसकी माँ उस से ज्यादा जोर से चिंघाड़ती .........और उसका बाप जोर जोर से चिल्ला रहा था ....पागलों की तरह .............मेरे बच्चे को सर में चोट लगी है ....आप लोग अभी तह हॉस्पिटल ले के नहीं गए.......अरे ये तो न्यूरो का केस है सर में चोट लगी है ..........मेरा वो दोस्त जो वहां PTI था उसके साथ हम एक स्थानीय neurology के हॉस्पिटल में गए......अब अस्पताल वालों को तो बकरा चाहिए काटने के लिए ...........वहां पर भी उस लड़के का बाप CT Scan ...Plastic surgery न जाने क्या क्या बक रहा था .........पर finally उस अस्पताल के doctors ने एक BANDAID लगा के भेज दिया ........एक और किस्सा उसी स्कूल का ...एक श्रीमान जी सुबह सुबह आ के लड़ रहे थे ....क्या हुआ भैया ..........स्कूल बस नहीं आयी ..... हमें आना पड़ा छोड़ने ..........बाद में पता चला श्रीमान जी का घर स्कूल से बमुश्किल 200 मीटर दूर ....उसी कालोनी में तीन सड़क छोड़ के था ....और लड़का उनका 10 साल का था ..........

क्या बनाना चाहते हैं आज कल के माँ बाप अपने बच्चों को ...........ये spoon fed बच्चे जीवन के संघर्षों को कैसे या कितना झेल पाएंगे ..........आज से लगभग 15 साल पहले ..मेरा बड़ा बेटा 4 -5 साल का था ...अपने खेत पे जा रहे थे हम ...बरसात का season था ....धान के खेतों में पानी भरा थे ......मेरे बेटे ने मुझे कहा..... पापा ........ मैंने कहा कुछ नहीं होता बेटा ...पैदल चलो .........और वो चलने लगा ...और थोड़ी ही देर बाद पानी में गिर गया .....कपडे सब कीचड में सन गए...........अब वो रोने लगा ....मैंने फिर कहा कुछ नहीं हुआ बेटा ...उठो .....वो वहीं बैठा बैठा रो रहा था ....उसने मेरी तरफ हाथ बढाए .....मैंने कहा ..अरे पहले उठो तो ........और वो उठ खड़ा हुआ ........मैंने उसे सिर्फ अपनी ऊँगली थमाई और वो उसे पकड़ के ऊपर आ गया ......हम फिर चल पड़े ....थोड़ी देर बाद वो फिर गिर गया .....पर अबकी बार उसकी प्रतिक्रिया बिलकुल अलग थी .....उसने सिर्फ इतना ही कहा ...अर्र्रे .......और हम सब हंस दिए .....वो भी हंसने लगा ..........और फिर अपने आप उठा और ऊपर आ गया ...........मुझे याद है उस साल हम दोनों बाप बेटा बीसों बार उस खेत पे गए होंगे .............वो उसके बाद वहां से आते जाते कभी नहीं गिरा ..
कल मैं नीरज जाट जी की करेरी झील की trekking वाली पोस्ट पढ़ रहा था ............4 दिन उस सुनसान बियाबान में ...जिसका रास्ता तक नहीं पता ...इतनी बारिश और ओला वृष्टि में ......ऊपर से ले कर नीचे तक भीगे ......भूखे प्यासे ........न रहने का ठिकाना न सोने का ......उस कीचड भरे मंदिर के कमरे में .....उस बिना chain वाले स्लीपिंग बैग में रात बिता के भी ........कितने खुश थे ......इतना संघर्ष शील आदमी ...क्या जीवन में कभी हार मानेगा ..........काश कार्तिक राजाराम ........जी हाँ यही नाम था उस लड़के का .......उसे भी बचपन में गिरने की ...गिर गिर के उठने की ......बार बार हारने की और हार के बार बार जीतने की ट्रेनिंग मिली होती ............कठोपनिषद में एक मंत्र है ......उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत .....उठो जागो .......और लक्ष्य प्राप्ति तक आगे बढ़ते रहो ..............शुरू से ही अपने बच्चों को इतना कोमल ....इतना सुकुमार मत बनाइये की वो इस ज़ालिम दुनिया के झटके बर्दाश्त न कर सकें ........एक अंग्रेजी उपन्यास में एक किस्सा पढ़ा था ....एक मेमना अपने माँ से दूर निकल गया ...वहां पहले तो भैंसों के झुण्ड में घिर गया .......उनको पैरों तले कुचले जाने से बचा किसी तरह ...अभी थोडा ही आगे बढ़ा था की एक सियार उसकी तरफ झपटा .....किसी तरह झाड़ियों में घुस के जान बचाई ....तो सामने से भेड़िये आते दिखे ..........बहुत देर वहीं झाड़ियों में दुबका रहा ....किसी तरह माँ के पास पहुंचा तो बोला .....माँ ...वहां तो बहुत खतरनाक जंगल है ......maa, there is a jungle out there ........

इस खतरनाक जंगल में जिंदा बचे रहने की ट्रेनिंग अभी से अपने बच्चों को दीजिये...

~Aj..

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