Ashish Saini

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05 Nov| Boxing Player| AICC Coordinator| KKC | निष्ठुर आलोचक| Youth Liberal Uttarakhandi Indian| Young India Associates| Boxing Player | Spokesperson https://linktr.ee/incashishsaini

01/09/2026

लगातार लोकप्रियता खो रही भाजपा, अब गुंडागर्दी पर उतरी
:- आशीष सैनी

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जातिगत भेदभाव को मनुस्मृति के आधार पर लागू करना चाहती है भाजपा:- आशीष सैनी
01/09/2026

जातिगत भेदभाव को मनुस्मृति के आधार पर लागू करना चाहती है भाजपा
:- आशीष सैनी

LIVE: कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर FIR... ‘शुद्धीकरण’ पर सियासी बवा...

◆ बांसुरी, अव्वल तो यह बताओ कि~ तुम्हारी मां सुषमा का ललित मोदी के साथ क्या इतना क़रीबी रिश्ता था? क्या कोई रिश्तादारी थी...
31/08/2026

◆ बांसुरी, अव्वल तो यह बताओ कि

~ तुम्हारी मां सुषमा का ललित मोदी के साथ क्या इतना क़रीबी रिश्ता था? क्या कोई रिश्तादारी थी?

~ तुम्हारी मां सुषमा की क्या ऐसी मजबूरी थी कि भारत के ख़िलाफ़ जा कर ललित मोदी की मदद करने का देशद्रोह किया था?

~ बांसुरी, तुम भी तो ललित मोदी की वकील थी? तुम भी देश के ख़िलाफ़ काम कर रही थी..तुम राष्ट्रवादी हो या "ललितवादी" हो?

◆ बांसुरी, तुम्हारी हैसियत नहीं है कि तुम राहुल गांधी के ख़िलाफ़ अनाप शनाप बोलो..बांसुरी के ख़ानदानी संस्कार ग़लत है..

◆ राहुल गांधी तुम से 'उम्र में बड़े हैं..भारत के नेता विपक्ष हैं..देश के सब से ज़्यादा पॉपुलर नेता हैं..

◆ बांसुरी, तुम्हारी बदतमीज़ी देख कर लगता है कि तुम अपनी मां से ज़्यादा बदतमीज़, असभ्य साबित होगी..मां की ग़लतियों से सीखना था..

✋ बांसुरी, राहुल गांधी पर एक बोलोगी तो 1000 सुनोगी..अब तक सभ्यता रख कर देख लिया कि जब तुम्हारी मां नहीं सुधरी तो तुम क्या सुधरोगी!!

👉 हम कांग्रेसी किसी को भला बुरा नहीं कहना चाहते हैं..मगर कोई हमारे नेता को कुछ कहेगा तो इतिहास खोद देंगे😀

पोलो या स्लिम-फिट टी-शर्ट भी अपने बॉडी फैट के हिसाब से ही पहननी चाहिए। फैट स्टोरेज अगर ज़्यादा हो, तो कहीं न कहीं से बाह...
31/08/2026

पोलो या स्लिम-फिट टी-शर्ट भी अपने बॉडी फैट के हिसाब से ही पहननी चाहिए। फैट स्टोरेज अगर ज़्यादा हो, तो कहीं न कहीं से बाहर झाँक ही जाएगा।

और फिर टेढ़े-मेढ़े लेटकर योगा करने वाला जो फोटोशूट है उसकी भी पोल खुल जाएगी।

हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जुन खरगे जी के भाषण के बाद सभास्थल के हुए “शुद्धिकरण” के खिलाफ FIR दर्ज करा...
31/08/2026

हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जुन खरगे जी के भाषण के बाद सभास्थल के हुए “शुद्धिकरण” के खिलाफ FIR दर्ज कराने के लिए कई प्रयास किए गए,

लेकिन आज तक FIR दर्ज नहीं हुई।
वहीं, विडंबना देखिए— इस मुद्दे को छुआछूत और भेदभाव से जोड़कर नेता प्रतिपक्ष श्री राहुल गांधी जी ने इसे दलित समाज का अपमान बताया, तो उन्ही के खिलाफ FIR दर्ज हो गई।

क्या न्याय की मांग करना भी अपराध है? FIR और मुकदमों के दबाव में आवाज़ नहीं दबाई जा सकती। भाजपा का दलित-विरोधी चेहरा उजागर हो चुका है।

सामाजिक न्याय, समानता और संविधान की रक्षा के लिए राहुल जी और कांग्रेस पार्टी की आवाज़ पहले की तरह बुलंद रहेगी।

राहुल गॉंधी जी देश भर में दलितों के साथ हो रहे छुआछूत के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ रहे हैं, हल्द्वानी में मल्लिकार्जुन खरगे जी क...
31/08/2026

राहुल गॉंधी जी देश भर में दलितों के साथ हो रहे छुआछूत के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ रहे हैं, हल्द्वानी में मल्लिकार्जुन खरगे जी का अपमान करने वाली भाजपा ने उल्टा राहुल जी के ख़िलाफ़ उत्तराखंड में FIR दर्ज करवा दिया।

इससे पता चलता है कि भाजपा सरकारें कितनी बड़ी दलित विरोधी हैं।

क्या हम इतने मूर्ख हैं, या नरेंद्र मोदी इतना शातिर है?यह सवाल आज केवल राजनीति का नहीं, बल्कि देश की सामूहिक चेतना का सवा...
31/08/2026

क्या हम इतने मूर्ख हैं, या नरेंद्र मोदी इतना शातिर है?

यह सवाल आज केवल राजनीति का नहीं, बल्कि देश की सामूहिक चेतना का सवाल बन चुका है।

👉 आखिर ऐसा कैसे होता है कि एक ही सरकार बार-बार बड़े-बड़े वादे करे, वादे पूरे न हों, समस्याएँ बढ़ती जाएँ, फिर भी करोड़ों लोग उसी सरकार की बातों पर भरोसा करते रहें?

👉 क्या जनता सचमुच इतनी भोली है? या फिर सत्ता के पास लोगों को भ्रमित करने की ऐसी मशीनरी है, जो सच को दबाकर झूठ को सच बना देती है?

वादों की लंबी सूची, जवाबदेही शून्य

हर चुनाव में नए सपने दिखाए गए👇

* हर साल करोड़ों नौकरियों का वादा
* किसानों की आय दोगुनी करने का दावा
* काला धन वापस लाने का वादा
* भ्रष्टाचार खत्म करने की बात
* महंगाई पर नियंत्रण का आश्वासन

लेकिन जब जनता सवाल पूछती है, तब जवाबों की जगह नए नारे सामने आ जाते हैं।

पुराने वादों का हिसाब देने की बजाय नया मुद्दा उछाल दिया जाता है और बहस की दिशा बदल दी जाती है।

राजनीति नहीं, मनोविज्ञान का खेल👇

🔹किसी भी सफल प्रचारक की सबसे बड़ी ताकत यह होती है कि वह लोगों को तथ्यों से नहीं, भावनाओं से जोड़ता है।

🔹 जब नागरिक बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य और महंगाई पर चर्चा करना छोड़कर केवल भावनात्मक मुद्दों पर बहस करने लगें, तब सत्ता की जवाबदेही स्वतः समाप्त हो जाती है।

🔹 यही कारण है कि असली प्रश्न अक्सर पीछे छूट जाते हैं और प्रतीकात्मक मुद्दे केंद्र में आ जाते हैं।

लोकतंत्र में सबसे बड़ा खतरा👇

▪️लोकतंत्र का सबसे बड़ा संकट तब नहीं आता जब कोई नेता शक्तिशाली हो जाए। संकट तब आता है जब जनता सवाल पूछना छोड़ दे।

▪️जब लोग नेता को सेवक नहीं, भगवान और उद्धारकर्ता मानने लगें। जब समर्थक और नागरिक के बीच का अंतर समाप्त हो जाए।

▪️जब सरकार की आलोचना को देशद्रोह और सरकार की प्रशंसा को राष्ट्रभक्ति समझ लिया जाए।

▪️तब लोकतंत्र धीरे-धीरे व्यक्तिपूजा में बदलने लगता है।

असली सवाल👇

इसलिए प्रश्न यह नहीं है कि जनता मूर्ख है या नेता शातिर। असली प्रश्न यह है कि क्या हम नागरिक के रूप में अपना कर्तव्य निभा रहे हैं?

❓क्या हम हर दावे की जांच करते हैं? क्या हम सत्ता से सवाल पूछते हैं? क्या हम तथ्यों को भावनाओं पर प्राथमिकता देते हैं?

क्योंकि लोकतंत्र में किसी भी नेता की ताकत उसकी चालाकी से नहीं, बल्कि जनता की निष्क्रियता से बढ़ती है।

👉 अगर कोई नेता बार-बार जनता कि आँखों में धूल झोंकने में सफल हो रहा है, तो उसकी धूर्तता को भी समझना होगा और समाज की कमजोरियों को भी।

👉 लोकतंत्र में जागरूक नागरिक सबसे बड़ा प्रहरी होता है। जिस दिन जनता सवाल पूछना बंद कर देती है, उसी दिन सत्ता निरंकुश होने लगती है।

इसलिए बहस इस बात की होनी चाहिए कि क्या हम एक जागरूक लोकतांत्रिक समाज की तरह सत्ता से जवाब मांग रहे हैं, या केवल नारों और प्रचार के सहारे अपने भविष्य का फैसला कर रहे हैं।

🇮🇳 भारत को सबसे बड़ा खतरा दुश्मनों से नहीं, BJP-RSS से हैएक प्रसिद्ध विचार हमें चेतावनी देता है कि जब किसी देश की जनता अ...
31/08/2026

🇮🇳 भारत को सबसे बड़ा खतरा दुश्मनों से नहीं, BJP-RSS से है

एक प्रसिद्ध विचार हमें चेतावनी देता है कि जब किसी देश की जनता अन्याय, भ्रष्टाचार और बदहाली को अपनी नियति मानकर चुप रहने लगे, तब उस देश की संस्थाएं भीतर से कमजोर होने लगती हैं।

आज भारत के सामने भी यही सवाल है
क्या हम अन्याय और नाकामी के इतने अभ्यस्त हो गए हैं कि सवाल पूछना ही भूल रहे हैं?

🔴 जब जनता मौन हो जाती है👇
🔸 सरकार जवाबदेही छोड़ देती है
🔸 जांच एजेंसियाँ निष्पक्ष नहीं रहती
🔸 मीडिया सत्ता का प्रचारक हो जाता है
🔸 संवैधानिक संस्थाएं बिक जाती हैं
🔸 लोकतंत्र चुनाव तक सीमित हो जाता है।

🚨 अब देश की तस्वीर देखिए👇

🛕 भगवान का चढ़ावा भी सुरक्षित नहीं?
श्रद्धालुओं द्वारा आस्था से चढ़ाए गए सोने, चांदी और चढ़ावे में चोरी और अनियमितताओं के गंभीर मामले सामने आते हैं।

यह सिर्फ संपत्ति का नहीं, करोड़ों लोगों की आस्था और भरोसे का सवाल है।

📄 पेपर लीक यानी युवाओं के भविष्य की चोरी

🔸 छात्र वर्षों तक मेहनत करता है।
🔸 माता पिता अपनी जमा पूंजी लगाते हैं।
🔸 पूरा परिवार एक नौकरी का सपना देखता है।

फिर पेपर लीक होता है और एक झटके में वर्षों की मेहनत बर्बाद हो जाती है।

पेपर चोर केवल प्रश्नपत्र नहीं चुराते, वे युवाओं के जीवन के सबसे कीमती साल चुराते हैं।

👮 नौकरी मांगने वाले बच्चों पर लाठी?
🔸 युवा नौकरी मांगता है
🔸 छात्र निष्पक्ष परीक्षा मांगता है
🔸 अभ्यर्थी भर्ती माँगता है

लेकिन कई बार जवाब संवाद से नहीं, पुलिस कार्रवाई और लाठीचार्ज से मिलता दिखाई देता है।

❓ जिस युवा के हाथ में नियुक्ति पत्र होना चाहिए, उसके सामने पुलिस की लाठी क्यों खड़ी है?

🎯 आवाज उठाने वालों पर पैलेट गन?
🔸 लोकतंत्र में विरोध अपराध नहीं है
🔸 अपनी बात कहना अपराध नहीं है
🔸 सवाल पूछना अपराध नहीं है

अगर युवाओं और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन जैसी कार्रवाई के आरोप सामने आते हैं और लोगों को गंभीर चोटें पहुंचती हैं, तो सवाल उठना स्वाभाविक है

❓ लोकतंत्र में असहमति के लिए कितनी जगह बची है?

⛽ एथनॉल में फायदा किसका, नुकसान किसका?

E20 पेट्रोल को लेकर माइलेज, पुराने वाहनों की अनुकूलता और उपभोक्ताओं पर संभावित अतिरिक्त खर्च के सवाल उठे हैं।

जब इसी नीति के साथ सत्ता से जुड़े लोगों या उनके परिवारों के कारोबारी हितों पर भी राजनीतिक सवाल उठें, तो सरकार को पारदर्शी जवाब देना चाहिए।

❓ नीति जनता के लिए है तो उसके आर्थिक प्रभाव और संभावित हित संघर्ष पर जवाब देने में डर कैसा?

🔴 और आम भारतीय?👇
🔸 युवा रोजगार के लिए भटक रहा है।
🔸 छात्र पेपर लीक से परेशान है।
🔸 किसान उचित मूल्य मांग रहा है।
🔸 मध्यम वर्ग महंगाई, टैक्स, शिक्षा और स्वास्थ्य के खर्च में दब रहा है।
🔸 सवाल पूछने वाले नागरिक को कई बार सरकार विरोधी से देश विरोधी साबित करने की कोशिश होने लगती है।

⚠️ जवाबदेही आखिर कहां है?👇
📄 पेपर लीक हुआ। जिम्मेदार कौन?
👮 बच्चों पर लाठी चली। जिम्मेदार कौन?
🎯 पैलेट गन चली। जिम्मेदार कौन?
🛕 चढ़ावे में कथित चोरी हुई। जिम्मेदार कौन?

⛽ एथनॉल पर सवाल उठे। जवाब कौन देगा?
💰 महंगाई बढ़ी। जिम्मेदार कौन?
👨‍💼 बेरोजगारी का संकट है। जिम्मेदार कौन?
🔥 हर घटना के बाद खोखला बयान मिलता है।
🔥 हर विवाद के बाद नया नैरेटिव मिलता है।
⚠️ लेकिन जवाबदेही लगातार गायब होती दिखाई देती है।

🚨 BJP-RSS से खतरा क्यों?

क्योंकि लोकतंत्र के लिए सबसे खतरनाक राजनीति वह है जो सरकार से पूछे गए सवाल को देश से पूछे गए सवाल में बदल दे।

याद रखिए
▶️ सरकार देश नहीं होती
▶️ सत्ता राष्ट्र नहीं होती
▶️ BJP का विरोध देश का विरोध नहीं है

🔸 पेपर लीक पर सवाल पूछना देशद्रोह नहीं है।
🔸 बच्चों पर लाठी का हिसाब मांगना देशद्रोह नहीं है।
🔸 पैलेट गन पर सवाल उठाना देशद्रोह नहीं है।
🔸 चढ़ावे की कथित चोरी पर जांच मांगना धर्म विरोध नहीं है।
🔸 एथनॉल नीति पर सवाल पूछना विकास विरोध नहीं है।
यही लोकतंत्र है।

🇮🇳 भारत किसी पार्टी से बड़ा है। भारत किसी सरकार से बड़ा है।

⚠️ इतिहास की सबसे बड़ी सीख

किसी देश को केवल सीमा पर खड़ा दुश्मन कमजोर नहीं करता…देश तब भी कमजोर होता है
जब:-

🔸 उसकी संस्थाएं कमजोर होने लगें
🔸 समाज में नफरत व अविश्वास बढ़े
🔸 सत्ता जवाबदेही से मुक्त होने लगे
🔸 मीडिया सवाल पूछना छोड़ दे
🔸 जनता अन्याय देखकर भी चुप रहे

जब नागरिक सवाल पूछना बंद कर देते हैं, तब सत्ता जवाब देना भी बंद कर देती है।

🇮🇳 इसलिए सवाल पूछिए👇

✔️ जवाबदेही मांगिए।
✔️ सच और प्रचार में फर्क कीजिए।
✔️ अन्याय के खिलाफ आवाज उठाइए।
✔️ संविधान-लोकतंत्र की रक्षा कीजिए।

🇮🇳 सत्ता आती जाती रहेगी, लेकिन संविधान, लोकतंत्र और भारत हमेशा सत्ता से ऊपर रहने चाहिए।

🙏 सोचिए जरूर… क्योंकि यह केवल राजनीति का सवाल नहीं है। यह आपके भविष्य, आपके बच्चों और आने वाली पीढ़ियों के भारत का सवाल है।

शोले मूवी याद है न ?जब गब्बर सिंह की क्रूरता और नीचता को पहल पहल दिखाया जाता है तो वह किसी शेर से नही लड़ रहा होता, वह हा...
31/08/2026

शोले मूवी याद है न ?

जब गब्बर सिंह की क्रूरता और नीचता को पहल पहल दिखाया जाता है तो वह किसी शेर से नही लड़ रहा होता, वह हाथ पर चढ़ने वाली एक चींटी को मसल देता है, और यह करते वक़्त उसकी आँखों में पाशविक अहंकार की चमक, उसकी हत्यारी मुस्कान दिल दहलाने के लिये काफ़ी होती है.
इसके अगले ही सीन में वह गाँव वालों से बदला लेने के लिये एक मासूम किशोर को मार देता है.

वहीं से यह स्थापित हो जाता है कि यह बेहद क्रूर, vindictive और लीचड़ क़िस्म का व्यक्ति है, जो लोगों को लूट कर अपने ख़ौफ़ से राज करता है और उन छोटे बच्चों को भी नहीं छोड़ता जो उसके ख़िलाफ़ खड़े हो जाते हैं.

राजा ने जब कहा था कि मैने भटके हुए बच्चों को माफ़ किया
किस किसने भरोसा किया था उसपर ?

अब डाकुओं पर फिल्में नही बनतीं, वे गाँवों में आतंक नही फैलाते
देश पर राज करते हैं.

भाजपा की मनुवादी मानसिकता उजागर हो गई है। RaGa के लिए यह दर्जनों फर्जी FIR मेडल में से एक है! उत्तराखंड : भाजपा सरकार मे...
31/08/2026

भाजपा की मनुवादी मानसिकता उजागर हो गई है। RaGa के लिए यह दर्जनों फर्जी FIR मेडल में से एक है!

उत्तराखंड : भाजपा सरकार में उल्टे राहुल गांधी के खिलाफ SC/ST एक्ट में हल्द्वानी में FIR दर्ज हुई !!

श्रीराम सेना समिति के सदस्य अमित कुमार का आरोप है कि राहुल गांधी ने दिल्ली में प्रेस कांफ्रेंस में हल्द्वानी के शुद्धिकरण को छुआछूत से जोड़कर टिप्पणी की। वाह रे कुकर्मी संघी अमित!

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ये वही संघी भाजपाई अमित कुमार है, जिसने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे जी के कार्यक्रम के बाद वहां शुद्धिकरण किया था!

कांग्रेस ने इसके खिलाफ उत्तराखण्ड में FIR कराने के खूब प्रयास किए, लेकिन भाजपा उत्तराखंड सरकार में कुछ नहीं हुआ! उल्टा अब संघी भाजपाई अमित ने ही FIR करा दी। वाह रे दोगलाई भाजपाई सरकार!

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