05/06/2025
PETCI संस्था– विश्व पर्यावरण दिवस 2025
विषय: झारखंड बोले: जड़ों को बचाओ, जंगलों को बचाओ
समुदाय के लिए संदेश
प्रिय प्रकृति प्रेमियों,
इस विश्व पर्यावरण दिवस पर, आइए हम अपने पहाड़ों, जंगलों और नदियों की आवाज़ को सुनें। झारखंड की जीवंत धरती – इसके पवित्र जंगल, चहचहाते पक्षी, सदियों पुराने साल के पेड़, महुआ की खुशबू और बहती धाराओं का संगीत – केवल सुंदरता नहीं, बल्कि हमारे जीवन की सांस हैं।
झारखंड के जंगल कोई बंजर भूमि नहीं हैं – ये जीवनदायिनी पारिस्थितिकी तंत्र हैं। ये आदिवासी ज्ञान, जैव विविधता और जलवायु के रक्षक हैं। लेकिन आज यह नाजुक संतुलन अवैध खनन, अंधाधुंध पेड़ों की कटाई और बिना सोचे-समझे विकास से खतरे में है। यह विकास उन लोगों की आवाज़ को अनदेखा करता है जो इस धरती के पहले रक्षक रहे हैं – हमारे समुदाय।
हमें याद रखना चाहिए: जब हम प्रकृति को नष्ट करते हैं, तो हम खुद को नष्ट करते हैं।
आइए हम अभी कदम उठाएं – पेड़ लगाएं, जल स्रोतों की रक्षा करें, वनों के अधिकारों का सम्मान करें और ऐसे किसी भी विकास को नकारें जो हमारे पर्यावरण की कीमत पर हो।
मिलकर हम यह सुनिश्चित करें कि झारखंड का हरित हृदय आने वाली पीढ़ियों के लिए धड़कता रहे।
“अगर हम प्रकृति के साथ जिएंगे, तो प्रकृति हमारे साथ जिएगी।”
परियोजना स्टाफ के लिए दिशानिर्देश – विश्व पर्यावरण दिवस 2025
उद्देश्य: सभी परियोजना क्षेत्रों में एक समान संदेश फैलाना और समुदायों को पर्यावरण संरक्षण व स्थानीय गर्व की भावना के साथ प्रेरित करना।
1. फील्ड स्टाफ के लिए मुख्य संदेश बिंदु
विश्व पर्यावरण दिवस का महत्व और स्थानीय समुदायों से इसका संबंध बताएं।
वर्ष 2025 का विषय साझा करें: “झारखंड बोले: जड़ों को बचाओ, जंगलों को बचाओ”।
झारखंड की जैव विविधता और सुंदरता को उजागर करें – महुआ के पेड़, जड़ी-बूटियां, पारंपरिक बीज, वन्यजीव, नदियाँ और पवित्र पहाड़।
खतरों को स्पष्ट करें: अवैध लकड़ी कटाई, खनन, बालू की चोरी, एकल फसल खेती और विनाशकारी विकास।
जलवायु परिवर्तन और मौसम की मार को स्थानीय जंगलों की कटाई से जोड़ें।
आदिवासी समुदायों के पारंपरिक पारिस्थितिक ज्ञान का महत्व समझाएं।
विकास सतत और सामुदायिक नेतृत्व वाला होना चाहिए, बाहर से थोपा हुआ नहीं।
For Nature
4. स्टाफ के लिए संदेश
आप परिवर्तन के वाहक हैं। आप ही कहानीकार हैं, शिक्षक हैं, और परंपरा तथा कार्रवाई के बीच की कड़ी हैं। दिल से बोलिए, प्रकृति के साथ खड़े रहिए और हर गांव को उसकी पर्यावरणीय विरासत पर गर्व करने के लिए प्रेरित कीजिए।