अबुआ अधिकार मंच

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अबुआ अधिकार मंच के मांग पर झारखंड लोक सेवा आयोग द्वारा जेट परीक्षा फॉर्म भरने की तिथि को 17 दिनों के लिए बढ़ाया गया.आप स...
31/10/2025

अबुआ अधिकार मंच के मांग पर झारखंड लोक सेवा आयोग द्वारा जेट परीक्षा फॉर्म भरने की तिथि को 17 दिनों के लिए बढ़ाया गया.
आप सभी अब 17 नवंबर तक जेट परीक्षा फॉर्म भर सकते हैं।

छात्र-छात्राओं के सम्मान मे
अबुआ है मैदान मे।

जय झारखण्ड

झारखंड लोक सेवा द्वारा आयोजित की जा रहीJet फॉर्म भरने की तिथि को आगे बढ़ाने को लेकर अबुआ अधिकार मंच के सदस्यो द्वारा जेपी...
30/10/2025

झारखंड लोक सेवा द्वारा आयोजित की जा रहीJet फॉर्म भरने की तिथि को आगे बढ़ाने को लेकर अबुआ अधिकार मंच के सदस्यो द्वारा जेपीएससी झारखंड लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष को मांग पत्र सौपा गया

झारखंड में खेल से जुड़े आयोजनों और विवादों का मानो अटूट रिश्ता बन चुका है। शायद ही कोई बड़ा आयोजन हुआ हो जो बिना विवाद, ...
22/10/2025

झारखंड में खेल से जुड़े आयोजनों और विवादों का मानो अटूट रिश्ता बन चुका है। शायद ही कोई बड़ा आयोजन हुआ हो जो बिना विवाद, भ्रष्टाचार या लापरवाही के संपन्न हुआ हो। अब सैफ सीनियर गेम्स को लेकर सामने आया नया मामला झारखंड की छवि पर एक और धब्बा छोड़ गया है।

कला–संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग को इस मामले को गंभीरता से लेकर तत्काल जांच और समाधान करना चाहिए।
ऐसे आयोजनों से न केवल खिलाड़ियों का मनोबल प्रभावित होता है, बल्कि राज्य की प्रतिष्ठा भी दांव पर लग जाती है।

यह समय है कि जिम्मेदार अधिकारी आगे आएं, पारदर्शिता सुनिश्चित करें और ऐसे कृत्यों पर सख्त कार्रवाई करें।
झारखंड की पहचान मेहनती खिलाड़ियों और ईमानदार आयोजनों से बने, न कि विवादों और भ्रष्टाचार से।
Jharkhand Olympic Association Santosh Gangwar Sanjay Seth

झारखंड की नदियाँ – जीवन से जूझती धाराएँ बदहाल है झारखंड की नदियाँ, पीना तो दूर मछलियों के रहने लायक भी नहीं बचीं —यह रिप...
05/10/2025

झारखंड की नदियाँ – जीवन से जूझती धाराएँ

बदहाल है झारखंड की नदियाँ, पीना तो दूर मछलियों के रहने लायक भी नहीं बचीं —यह रिपोर्ट झारखंड की नदियों की भयावह सच्चाई उजागर करती है। हाल ही में किए गए सर्वे में राज्य की 6 प्रमुख नदियाँ — स्वर्णरेखा, दामोदर, कोयल, शंख, बराकर और दक्षिण कोयल — अत्यधिक प्रदूषित पाई गईं। पानी में ऑक्सीजन की कमी, रासायनिक प्रदूषण और औद्योगिक अपशिष्ट की मात्रा ने इन्हें जीवनहीन बना दिया है।

यह स्थिति सिर्फ नदियों की नहीं, बल्कि हमारी पर्यावरणीय जिम्मेदारी की परीक्षा है। जरूरत है कि समाज, शासन और प्रशासन तीनों एकजुट होकर इस जल-संकट के समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाएँ।

समाज जागरूक बने, शासन संरक्षण की नीति बनाए, प्रशासन नियमों के सख्त पालन को सुनिश्चित करे। क्योंकि —
नदी बचेगी तो झारखंड बचेगा,
नदी बहेगी तो जीवन बहेगा।

असत्य पर सत्य, अन्याय पर न्याय और अधर्म पर धर्म की विजय के पावन पर्व विजयादशमी (दशहरा) की हार्दिक शुभकामनाएँ।आइए, इस अवस...
02/10/2025

असत्य पर सत्य, अन्याय पर न्याय और अधर्म पर धर्म की विजय के पावन पर्व विजयादशमी (दशहरा) की हार्दिक शुभकामनाएँ।

आइए, इस अवसर पर सभी मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के दिव्य चरित्र और आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लें।

#विजयादशमी

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और भारत के पूर्व प्रधानमंत्री, भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती पर शत-शत नमन।
02/10/2025

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और भारत के पूर्व प्रधानमंत्री, भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती पर शत-शत नमन।

झारखंड प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है। यहां की नदियां न केवल जीवनदायिनी हैं बल्कि आदिवासी संस्कृति, कृषि, सिंचाई,...
01/10/2025

झारखंड प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है। यहां की नदियां न केवल जीवनदायिनी हैं बल्कि आदिवासी संस्कृति, कृषि, सिंचाई, उद्योग और जैव विविधता का भी आधार हैं। दामोदर, सुवर्णरेखा, कोयल, शंख, बराकर आदि जैसी नदियां झारखंड की जीवनरेखा कही जाती हैं। किंतु आज इन नदियों का अस्तित्व संकट में है।

तेजी से बढ़ते शहरीकरण, अवैध खनन, बालू उठाव, औद्योगिक प्रदूषण और बेतरतीब विकास कार्यों ने नदियों को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। दामोदर और स्वर्णरेखा जैसी नदियां कोयला खदानों और कारखानों के अपशिष्ट से दूषित हो चुकी हैं। रेत माफियाओं द्वारा धड़ल्ले से की जा रही अवैध बालू निकासी ने नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बाधित कर दिया है, जिससे जल स्तर गिर रहा है और आसपास के गांवों में जल संकट गहराता जा रहा है।

प्रकृति के इस दोहन का सीधा असर पर्यावरण और आम जनजीवन पर पड़ रहा है। भूजल स्तर घटने से खेती प्रभावित हो रही है, जंगल और वन्यजीव अपना प्राकृतिक आवास खो रहे हैं, और स्थानीय लोग पीने के शुद्ध जल से भी वंचित हो रहे हैं।

"संकल्प – सेव रिवर" (एक अभियान): यह अभियान नदियों के संरक्षण और स्वच्छता के लिए जनजागरण पर जोर देने का है। इसका उद्देश्य लोगों को नदियों के महत्व के प्रति जागरूक करना, प्रदूषण रोकना और स्थानीय स्तर पर सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देना है। हमें यह समझना होगा कि नदियां सिर्फ जल का स्रोत नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, हमारी आजीविका और हमारे भविष्य की धरोहर हैं। यदि आज हम नदियों को बचाने का संकल्प नहीं लेंगे, तो आने वाली पीढ़ियों को जल संकट, पर्यावरणीय असंतुलन और जीवन के संकट से जूझना पड़ेगा।

झारखंड की नदियों को बचाना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हम सबकी साझी जिम्मेदारी है।
आइए, मिलकर "सेव रिवर संकल्प" लें और नदियों को उनकी स्वच्छ, निर्मल और जीवनदायिनी धारा के रूप में पुनः स्थापित करें।

इससे संबंधित जानकारी के लिए आप सभी आप सभी jet2024@jpsc.gov.in पर अपनी समस्याओं को मेल कर सकते हैं जेपीएससी द्वारा आपकी स...
25/09/2025

इससे संबंधित जानकारी के लिए आप सभी आप सभी [email protected] पर अपनी समस्याओं को मेल कर सकते हैं जेपीएससी द्वारा आपकी समस्या का समाधान मेल में जवाब के जरिए भेज दिया जाएगा।

मांडर महाविद्यालाय  के छात्र छात्राओं से सम्बंधित समस्या को ले कर अबुआ अधिकार मंच के सदस्यो ने प्राचार्य से मुलाक़ात कर उ...
02/09/2025

मांडर महाविद्यालाय के छात्र छात्राओं से सम्बंधित समस्या को ले कर अबुआ अधिकार मंच के सदस्यो ने प्राचार्य से मुलाक़ात कर उन्हें परेशानी से अवगत करवाया।

डोरंडा महाविद्यालय के मुलभुत समस्या के समाधान हेतु,अबुआ अधिकार मंच के सदस्यो ने महाविद्यालय के प्राचार्य र के शर्मा से म...
02/09/2025

डोरंडा महाविद्यालय के मुलभुत समस्या के समाधान हेतु,
अबुआ अधिकार मंच के सदस्यो ने महाविद्यालय के प्राचार्य
र के शर्मा से मुलाक़ात किया और उन्हें समस्याओं से अवगत करवाते हुए मांग पत्र सौपा।

राज्य के सबसे पुराने विश्वविद्यालय रांची विश्वविद्यालय  की यह स्थिति  चिंतनिये है।👉   डिग्री शुल्क देने के बाद भी अपनी ड...
31/08/2025

राज्य के सबसे पुराने विश्वविद्यालय रांची विश्वविद्यालय की यह स्थिति चिंतनिये है।

👉 डिग्री शुल्क देने के बाद भी अपनी डिग्री प्राप्त करने के लिए लगभग चार लाख छात्र-छात्राएं आज भी विश्वविद्यालय का चक्कर काटने को मजबूर है

👉 विश्वविद्यालय से लगभग 5 करोड़ से ऊपर की राशि कार्य करने के लिए विश्वविद्यालय के अलग-अलग विभाग को अग्रिम राशि के तौर पर दिया गया लेकिन उसका आज तक कोई एडजस्टमेंट नहीं हुआ।

👉 विश्वविद्यालय के शिक्षकों कर्मचारियों का एचआरडीसी जेपीएससी एवं विश्वविद्यालय स्तर पर कर्मचारियों का वेतन प्रमोशन वर्षों से लंबित है।

👉 पीएचडी शोध कार्य के लिए विश्वविद्यालय द्वारा विभाग को ना के बराबर राशि उपलब्ध कराई जाती है जिसका सीधा असर शोधार्थियों पर पड़ता है।

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