01/10/2025
झारखंड प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है। यहां की नदियां न केवल जीवनदायिनी हैं बल्कि आदिवासी संस्कृति, कृषि, सिंचाई, उद्योग और जैव विविधता का भी आधार हैं। दामोदर, सुवर्णरेखा, कोयल, शंख, बराकर आदि जैसी नदियां झारखंड की जीवनरेखा कही जाती हैं। किंतु आज इन नदियों का अस्तित्व संकट में है।
तेजी से बढ़ते शहरीकरण, अवैध खनन, बालू उठाव, औद्योगिक प्रदूषण और बेतरतीब विकास कार्यों ने नदियों को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। दामोदर और स्वर्णरेखा जैसी नदियां कोयला खदानों और कारखानों के अपशिष्ट से दूषित हो चुकी हैं। रेत माफियाओं द्वारा धड़ल्ले से की जा रही अवैध बालू निकासी ने नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बाधित कर दिया है, जिससे जल स्तर गिर रहा है और आसपास के गांवों में जल संकट गहराता जा रहा है।
प्रकृति के इस दोहन का सीधा असर पर्यावरण और आम जनजीवन पर पड़ रहा है। भूजल स्तर घटने से खेती प्रभावित हो रही है, जंगल और वन्यजीव अपना प्राकृतिक आवास खो रहे हैं, और स्थानीय लोग पीने के शुद्ध जल से भी वंचित हो रहे हैं।
"संकल्प – सेव रिवर" (एक अभियान): यह अभियान नदियों के संरक्षण और स्वच्छता के लिए जनजागरण पर जोर देने का है। इसका उद्देश्य लोगों को नदियों के महत्व के प्रति जागरूक करना, प्रदूषण रोकना और स्थानीय स्तर पर सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देना है। हमें यह समझना होगा कि नदियां सिर्फ जल का स्रोत नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, हमारी आजीविका और हमारे भविष्य की धरोहर हैं। यदि आज हम नदियों को बचाने का संकल्प नहीं लेंगे, तो आने वाली पीढ़ियों को जल संकट, पर्यावरणीय असंतुलन और जीवन के संकट से जूझना पड़ेगा।
झारखंड की नदियों को बचाना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हम सबकी साझी जिम्मेदारी है।
आइए, मिलकर "सेव रिवर संकल्प" लें और नदियों को उनकी स्वच्छ, निर्मल और जीवनदायिनी धारा के रूप में पुनः स्थापित करें।