20/01/2018
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11:08 बजे सदन में अध्यक्ष दाखिल हुए, लेकिन जैसी ही अध्यक्ष ने सदन में प्रवेश किया विपक्ष खड़ा हो गया और हंगामा करने लगा. विपक्ष के विधायक आलमगीर आलम ने न्यूज विंग अखबार लहराते हुए कहा कि फॉरेंसिक जांच में साबित हो चुका है कि बकोरिया कांड फर्जी था. फर्जी तरीके से निर्दोष लोगों को मारा गया. न्यूज़ विंग कि खबर को दिखाते हुए वह अध्यक्ष से कहते हैं कि फॉरेंसिक जांच आने के बाद अगर कार्रवाई नहीं होती है तो इसे सरकार की जिद्द मानी जायेगी.
बैंक अधिकारी को अपने बेटे की कंपनी में निवेश को लेकर कैसे कह सकती हैं सीएस
इधर प्रदीप यादव समेत दूसरे विधायक पदाधिकारियों पर कार्रवाई के लिए शोर मचाने लगे. प्रदीप यादव ने कहा कि यह जांच का विषय है कि कैसे एक बैंक अधिकारी को सीएस राजबाला वर्मा अपने बेटे की कंपनी में निवेश करने को कहती है. प्रदीप यादव ने जैसे ही अपनी बात रखनी शुरू की सत्ता पक्ष के विधायक मनीष जायसवाल, राज सिन्हा, बिरंची नारायण, अनंत ओझा, राजकुमार पाहन समेत कई विधायक उनका विरोध करने लगे.
सीएम के सारे आश्वासन गलत, एक भी नहीं हुआ पूरा : हेमंत
वहीं अमित महतो जेपीएससी आरक्षण नियमों की अनदेखी को लेकर कार्यस्थगन का प्रस्ताव लाया. जिसे अध्यक्ष ने अमान्य कर दिया. वहीं भानु प्रताप ने निकाय चुनाव में कुछ पार्टियों के नामांकन नहीं किए जाने पर विरोध जताया. इधर हेमंत सोरेन ने कहा कि पदाधिकारी और सरकार एक ही तरह की बात कर रहे हैं. सीएम गलत तरीके से आश्वासन देते हैं. क्योंकि सीएम की तरफ से दिया गया एक भी आश्वासन पूरा नहीं हो पाया है. पीटीपीएस की नियुक्ति का मामला हेमंत सोरेन ने उठाया और कहा कि आश्वासन मिला था कि झारखंड के लोगों को ही थर्ड ग्रेड और फोर्थ ग्रेड में नौकरी दी जायेगी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. जेपीएससी का मामला भी हेमंत ने उठाया और कहा कि जेपीएससी के बच्चों को लाठी डंडे से मारा जा रहा है. आखिर सदन है किस लिए. हम यहां क्यों बैठे हैं. अगर किसी पदाधिकारी की वजह से एक भी आदमी की मौत होती है तो क्या उसपर कार्रवाई नहीं होनी चहिये. हेमंत ने कहा कि डीजीपी जांच करने वाले अधिकारियों को जांच धीमा करने का निर्देश देते हैं. क्या ऐसा करने वाले पर कार्रवाई नहीं होनी चाहिये. अगर सदन को पसंद नहीं कि हम गरीबी, भुखमरी और दर्द की बात करें तो हमें छुट्टी दे दिया जाए. चलाये सरकार सदन खुद अकेले. इतने में प्रदीप यादव फिर से जेपीएसी का मामला उठाते हैं. साथ ही यह भी कहा की सीएस एक बैंक अधिकारी पर दबाव बनाती है कि वह उनके बेटे की कंपनी में निवेश करे. क्या ऐसे अधिकारी पर कार्रवाई नहीं होनी चहिये.
सत्ता पक्ष का नारा सदन को हाइजैक करना बंद करो, तो विपक्ष का नारा अफसरों के चाटुकार होश में आओ
इसपर सीएम ने कहा कि मामले की जांच स्पेशल ब्रांच से करवायी जा रही है. सीएम के इतना कहते ही सदन में विपक्ष का हंगामा और तेज हो गया. विपक्ष ने नारेबाजी करनी शुरू कर दी. जिसके बाद सत्ता पक्ष की ओर से नारे गलाये गये कि सदन को हाइजैक करना बंद करो तो विपक्ष ने नारा लगाया कि अफसरों के चाटुकार होश में आओ... होश में आओ. जिसके बाद अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही 11.24 मिनट पर 12.45 तक स्थगित कर दी.
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बाकी सदन के बाहर विधायक कुणाल षाड़ंगी, राजकुमार यादव और इरफान अंसारी धरने पर बैठ गये. तीनों विधायक जेपीएसी में आरक्षण, सरकार का शराब बेचना और पारा शिक्षकों को नियमित करने को लेकर धरना दिया.
12.45 तक सदन को स्थगित किये जाने के बाद 12.51 में सदन की कार्यवाई वापस शुरू की गयी. लेकिन लगभग दो मिनट तक सदन की कार्यवाई चली और उसके बाद वापस से 12.53 में सदन को दो बजे तक के लिये स्थगित कर दिया गया. गौरतलब है कि सदन जैसे ही शुरू किया गया विपक्ष फिर से हंगामा करने लग गया. विपक्ष के विधायक और नेता हंगामा करते हुये वेल में आ जा रहे थे. जिसे देखते हुए अध्यक्ष ने सदन को स्थगित कर दिया.