Mera Ramnagar

Mera Ramnagar Ramnagar,west champaran ,Bihar Bhitiyaharwa ashram where Gandhi ji started Satyagrah andolan.

Ramnagar is a city and a notified area in Pashchim Champaran district in the Indian state of Bihar.Ramnagar is situated on the border of India-Nepal and Bihar - Uttar pradesh.Ramnagar is a place which is surrounded by forest, hills, mountains and in the centre there is temple which is known as "narmadeshwar raj shiw mandir" Someshwar hills, kailsah mountains range is also nice place to see.Nandangarh which is known for "Ashok Pillar" is about 20 km away from this town.

09/04/2026
मेरे शहर , रामनगर , पश्चिमी चंपारण ( बिहार ) में डॉ . अंबेडकर चौराहे से उत्तर दिशा में गोवर्धना , सोमेश्वर आदि मनोरम और ...
28/03/2026

मेरे शहर , रामनगर , पश्चिमी चंपारण ( बिहार ) में डॉ . अंबेडकर चौराहे से उत्तर दिशा में गोवर्धना , सोमेश्वर आदि मनोरम और भ्रमण योग्य स्थल हैं , जिनकी चर्चा पिछले कड़ी में मैं कर चुका हूं ।

आज पूरब दिशा की ओर जाने वाली सड़क हमें कहां ले जाती है और उस रास्ते किन - किन जगहों पर जा सकते है , उसकी चर्चा करूंगा ।

पूरब की तरफ बढ़ेंगे तो सबसे पहले बाई तरफ खस्ता हाल त्रिवेणी नहर और दाई तरफ सरकारी हस्पताल है । सरकारी हस्पताल से आगे बढ़ने पर दाई तरफ हीं " कुट मिल ( गत्ता फैक्ट्री ) " और उसी से सटे रामरेखा नदी के किनारे हमारा " नयका सिनेमा ( श्याम ज्योति सिनेमा )" है ।

इससे आगे का रास्ता करीब तीन - चार सौ मीटर के बाद तीन रास्तों में बंट जाता है । दाहिनी तरफ वाला , मिल -
बहुअरी , पंचरुखिया , नवगांवां और चीनी मिल की तरफ चला जाता है । बाई तरफ वाला मुजरा की तरफ ।

बीच वाली सड़क के दाहिनी तरफ " किशोरी मल का बगीचा " है , जो हमारे विद्यार्थी जीवन का " मुगल गार्डन " हुआ करता था । स्कूल से आने के बाद हम यहां घंटों समय बिताया करते थे और पहली जनवरी को ' पिकनिक ' भी मनाया करते थे । आज इसके एक हिस्से में विवाह भवन , बीच में पुरानी बगिया और पूरबी हिस्से में " स्टोन क्रशर " बन गया है ।

इस रास्ते नरकटियागंज ( थाना - शिकारपुर ) , भिखना ठोरी , भितिहरवा गांधी आश्रम और भारत - नेपाल सीमा का प्रमुख शहर रक्सौल जाया जा सकता है ।

नरकटियागंज रामनगर से करीब 15 - 16 किलोमीटर है । नरकटियागंज एक अच्छा शहर है और रेलवे जंक्शन है । यहां से रेल मार्ग से बेतिया , मोतिहारी होते हुए मुजफ्फरपुर जाया जाता है । इसी रेल - मार्ग पर स्थित सुगौली जंक्शन से एक रूट रक्सौल की तरफ चली जाती है । एक रेल रूट गौनाहा और भिखना ठोरी की तरफ जाती है । नरकटियागंज से सड़क मार्ग से भी बेतिया , मोतिहारी होते हुए मुजफ्फरपुर जा सकते हैं । एक सड़क लौरिया की तरफ जाती है , जहां से भी बेतिया , बगहा , वाल्मिकीनगर और गोरखपुर जाने के रास्ते हैं ।

इसके अतिरिक्त , रामनगर से करीब 45 किलोमीटर पर मनोरम पर्यटन स्थल भिखना ठोरी, करीब 20-22 किलोमीटर प्रसिद्ध भितिहरवा गांधी आश्रम और 60 किलोमीटर के करीब रक्सौल है ।

नेपाल की सीमा अवस्थित भिखना - ठोरी घने जंगलों , खूबसूरत पहाड़ों और कल - कल बहती पहाड़ी से इतनी मनोरम हो जाती है कि जो यहां एक बार आता है , फिर दुबारा - तिबारा आना चाहता है । यहां अब खूबसूरत ' रिसोर्ट्स ' , बच्चों के लिए " फन - पार्क " और अच्छे " होम - स्टे " बन गए हैं । यहांं खांटी देशी चिकन , पहाड़ी बकरे का मिट्टी के बर्तन और लकड़ी के चूल्हे पर बना मटन , बेहतरी दही और जंगली गाय - भैंस के दूध के शुद्ध घी का आनंद ले सकते हैं ।

भितिहरवा गांधी आश्रम , जो रामनगर से करीब 25 किलोमीटर की दूरी पर है , महात्मा गांधी के सत्याग्रह आंदोलन का शुरुआती स्थल है । 1917 में जब गांधी जी चंपारण के किसानों को नील की खेती से मुक्ति के लिए यहां आए थे तो भितिहरवा में कुछ समय के लिए रुके थे । यहां जिस कुटिया में उन्होंने निवास किया था , वैसे हीं सुरक्षित रखा गया है और एक भव्य स्मारक बना दिया गया है ।
बिहार की राजनीति और राजनीतिक पदयात्राएं समय - समय पर यहां से शुरू होती हैं ।

नेपाल का प्रवेश द्वार , रक्सौल करीब 60 किलोमीटर की दूरी पर है जहां से नेपाल के प्रमुख शहर बीरगंज जाया जा सकता है । बीरगंज से पोखरा , काठमांडू और नेपाल के अन्य जगहों के लिए बस और प्राइवेट टैक्सियां मिलती हैं ।
बीरगंज में सीमा पर बसे भारतीय , मसाले और विदेशी वस्तुएं खरीदने आते हैं । इस सीमा से तस्करी भी होती है जिसकी वजह से दोनों तरफ के कस्टम वाले और पुलिस तस्करी रोकने के लिए मुस्तैद रहते हैं ।

अगली कड़ी में दक्षिण की चर्चा करूंगा ,
अरे दक्षिण भारत की नहीं , रामनगर से दक्षिण की 🙂

मेरे  गृह नगर रामनगर , पश्चिमी चंपारण ( बिहार ) से अनेक ऐतिहासिक , प्राकृतिक और पर्यटन स्थलों पर जाया जा सकता है । इसे इ...
25/03/2026

मेरे गृह नगर रामनगर , पश्चिमी चंपारण ( बिहार ) से अनेक ऐतिहासिक , प्राकृतिक और पर्यटन स्थलों पर जाया जा सकता है । इसे इन दर्शनीय स्थलों का " बेस - कैंप " भी कहा जा सकता है ।

सबसे पहले यह शहर खुद में हीं बहुत से ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को अपने आप में समेटे हुए है । रामनगर का प्राचीन और भव्य नर्मदेश्वर महादेव मंदिर , बैकुंठवा देवी मंदिर , अष्टभुजी माई मंदिर , सबूनी पोखरा मंदिर , राजमहल और यहां की साहित्यिक - बौद्धिक संस्कृति देखने और महसूस करने योग्य है ।

रामनगर " चंपारण के लोग हंसेला " के अमर कवि स्व. ब्रजबिहारी प्रसाद ' चूर ' ; कवि स्व . सरयू सिंह ' सुंदर ' ; कवि , रंगकर्मी , संगीतकार , गायक , शिक्षाविद् और मशहूर फुटबॉलर स्व. दीपक एंथोनी ; मान्यताप्राप्त रेफरी श्री नरसिंह यादव ; स्व. कवि कामेश्वर सिंह ' विद्रोही ' ; मशहूर चिकित्सक और संस्कृति कर्मी स्व. डॉ. बी . एन . झा ; राजनीतिज्ञ , फुटबॉलर , रंगकर्मी और हरदिल अजीज स्व. अर्जुन विक्रम शाह ; नेता जी सुभाषचंद्र बोस के बेहद करीबी और नेता जी की पार्टी " फॉरवर्ड ब्लॉक " के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष , कवि , शिकार कथा लेखक और स्वतंत्रता सेनानी स्व. महंत धनराज पूरी ; पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री तथा बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. श्री केदार पाण्डेय ; अद्भुत प्रतिभा के धनी रंगकर्मी स्व. रामचंद्र बारी , श्री रामजी प्रसाद , स्व. श्री सत्यनारायण बाबू , स्व. श्री सीता बाबू आदि । ये सारी विभूतियां मिलकर रामनगर की हवा और मिट्टी को साहित्य और संस्कृति से सुवासित करते थे । आज इनमें से एक - दो को छोड़ कर कोई इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन इन्होंने जो रामनगर को पहचान दी है , उसे भुलाया नहीं जा सकता ।

रामनगर के उत्तर में शिवालिक का विस्तृत रेंज और घने जंगल हैं । यहां से गोबर्धना रेंज , मगुराहां रेंज , जंगल - सफारी और सोमेश्वर पर्वतमाला की सबसे ऊंची चोटी पर स्थित मां कालिका स्थान है । मां कालिका स्थान पहुंचने का ट्रैक बहुत खूबसूरत और मनोहारी तो है हीं , बहुत दुरूह भी है ।

साल में केवल एक बार चैत्र नवरात्र में यहां का रास्ता खुलता है और श्रद्धालुओं की भारी भिंड जुटती है । आज कल यह यात्रा चल रही है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं । यद्यपि सरकार द्वारा श्रद्धालुओं के लिए अभी पर्याप्त सुविधाएं नहीं मुहैया कराई गई है लेकिन " सीमा सुरक्षा बल " के जवान पूरी यात्रा की मुस्तैदी से देखरेख करते हैं और शीतल जल , गुड़ और चना की मुफ्त व्यवस्था रखते हैं ।

- शेष दो - चार दिन बाद

रामनगर के रामरेखा घाट पर चैती छठ के सझिया घाट पर सूर्योपासना के लिए जुटे व्रती 🙏🏻
24/03/2026

रामनगर के रामरेखा घाट पर चैती छठ के सझिया घाट पर सूर्योपासना के लिए जुटे व्रती 🙏🏻

मेरे गृह नगर रामनगर , पश्चिमी चंपारण ( बिहार ) के बीच से रामरेखा नदी और त्रिवेणी नहर गुजरती है । इस नदी और नहर की चर्चा ...
13/03/2026

मेरे गृह नगर रामनगर , पश्चिमी चंपारण ( बिहार ) के बीच से रामरेखा नदी और त्रिवेणी नहर गुजरती है । इस नदी और नहर की चर्चा कभी बाद में , आज रामरेखा नदी के ऊपर से जहां त्रिवेणी नहर क्रास करती है , सिंचाई विभाग द्वारा ' सायफन ' बनाया गया है । ऐसा हीं एक ' सायफन ' मसान नदी के ऊपर भी बना है । नीचे से नदी और ऊपर से नहर ।
इसके लिए इस तरह की रचना बनाई गई है कि नदी और नहर दोनों निर्बाध बहते रहें ।

रामनगर में " नयका सिनेमा " के पास बना ' सायफन ' बचपन से लेकर युवावस्था तक हमारे लिए बहुत महत्व का था । शाम के समय हमारी बैठकी और मस्तियां यहीं हुआ करती थीं । साफ - सुथरी शांत और ठंडी हवाओं की प्रचुरता वाली यह हमारी पसंदीदा जगह थी । रात में कभी - कभी देर तक यहाँ बैठकी होती थी । इस जगह पहले एक लोहे की पतली पुल हुआ करती थी , जिस पर लकड़ी की पटरियां लगी रहती थी । बाद में एक - एक कर पटरियां गायब होती गईं और बमुश्किल दो - ढाई फुट चौड़ी पुल के दोनों ओर तार की कमजोर सी रेलिंग और मध्य में छह इंच चौड़ा पुल के शुरू से अंत तक लोहे का गार्डर । उस गार्डर पर बैलेंस बना कर चलना , हमारा खेल हुआ करता था । नहर के " नयका सिनेमा " साइड में नहर के पानी को रामरेखा नदी में गिरने के लिए करीब तीन - तीन फीट का गैप बना था । उसको भी फलंगाते हुए एक तरफ से दूसरी तरफ और फिर दूसरी तरफ से वापस होना भी हमारा खेल था । मजे की बात यह थी कि कभी कोई इस मस्ती के क्रम में गिरा नहीं । नहर के दूसरी तरफ एक ऊंचा चबूतरा जैसा था , जिस पर हम थोड़ी ज्यादा हवा खाने के चक्कर में बैठा करते थे । अक्सर हमारी चौकड़ी नहर में नहाया भी करती थी । स्कूल से बंक कर उसी ऊंचे चबूतरे से नहर में छलांग लगा कर खूब नहाते भी थे लड़के । मुझे चुकी तैरना नहीं आता था , मैने कभी इस तरह नहाने का प्रयास नहीं किया ।

अब ना तो वह पतली लोहे की पुल है , ना हीं वह ऊँचा चबूतरा , ना ही स्वच्छता और ना हीं वहां बैठने वाले लोग ।
रामरेखा नदी का वह हिस्सा , जहां नहर का पानी गिरा करता है , गंदगी और बेतरतीब उगे घास - पात से भरा हुआ है । " नयका सिनेमा " की तरफ की रामरेखा तो लगता है गायब हीं हो गई है । ' सायफन ' का ना तो कोई रखरखाव है नहीं गंदगी फैलाने वालों पर कोई रोक - टोक । मेरे समय के लोग आज इन तस्वीरों को देखें तो उन्हें निश्चय हीं बेहद अफसोस होगा कि उनके बचपन का खूबसूरत टाइम पास स्थल आज इतनी बदहाल स्थिति में है कि वहां दो मिनट खड़ा होना भी मुश्किल है ।

मेरे गृह नगर रामनगर , जिला - पश्चिमी चंपारण ( बिहार ) में दो थियेटर थे । एक " हिंद सिनेमा " और एक        "श्यामज्योति सि...
11/03/2026

मेरे गृह नगर रामनगर , जिला - पश्चिमी चंपारण ( बिहार ) में दो थियेटर थे । एक " हिंद सिनेमा " और एक "श्यामज्योति सिनेमा " ।

" हिंद सिनेमा " को पुरनका सिनेमा और " श्यामज्योति " को नयका सिनेमा कहा जाता था । पुरनका पिछले साल मालिकों द्वारा जमींदोज कर दिया गया और नयका कोविड के समय से हीं बंद है ।

अब हम कह सकते हैं कि हमारे शहर में एक भी थियेटर नहीं है और सिनेमा घरों में जाकर तीन घंटे मगजमारी करने का हमारे पास समय भी नहीं है । हम ' रील ' देख कर मजे में हैं ।

लेकिन आज मैं जब नयका के सामने से गुजरा तो बरबस मेरे कदम रुक गए । ऐसा लगा नयका कुछ कहना चाहता था । लेकिन मैं सुन कर कर भी क्या सकता था ।

' रील ' के जमाने में कुछ ' फील ' करना बेमानी है 😔

बस कुछ दिन , और तुम भी गिरा दिए जाओगे
नयके 😔

पं. अखिलेश्वर नाथ त्रिपाठी बगहा , पश्चिमी चंपारण , बिहार सेवानिवृत शिक्षक , अब अधिवक्ता , बगहा , सिविल कोर्ट बेहद शालीन ...
23/01/2026

पं. अखिलेश्वर नाथ त्रिपाठी

बगहा , पश्चिमी चंपारण , बिहार

सेवानिवृत शिक्षक ,
अब अधिवक्ता , बगहा , सिविल कोर्ट

बेहद शालीन , शांत व सबके प्रिय

हिंदी , संस्कृत , अंग्रेजी , उर्दू व कई क्षेत्रीय भाषाओं के
उद्भट विद्वान

हस्तलिपि मोतियों समान

मेरी नजर में राष्ट्रीय स्तर के कवि व साहित्यकार लेकिन
आत्मप्रचार से हमेशा दूर रहे ।

खुद को चुपचाप अध्ययन , लेखन और बाकी समय में कोर्ट में व्यस्त रखने की वजह से आपका सही मूल्यांकन साहित्य के क्षेत्र में न हो सका ।

मेरा गिलहरी प्रयास है कि आपके व्यक्तित्व व कृतित्व के बारे में लोगों को बताऊं।

आज प्रस्तुत है उनकी हस्तलिपि में उनकी दो रचनाएं ।,

10/01/2026
श्री सुजल सिंह के पोस्ट से , साभार ।
09/01/2026

श्री सुजल सिंह के पोस्ट से , साभार ।

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