28/03/2026
मेरे शहर , रामनगर , पश्चिमी चंपारण ( बिहार ) में डॉ . अंबेडकर चौराहे से उत्तर दिशा में गोवर्धना , सोमेश्वर आदि मनोरम और भ्रमण योग्य स्थल हैं , जिनकी चर्चा पिछले कड़ी में मैं कर चुका हूं ।
आज पूरब दिशा की ओर जाने वाली सड़क हमें कहां ले जाती है और उस रास्ते किन - किन जगहों पर जा सकते है , उसकी चर्चा करूंगा ।
पूरब की तरफ बढ़ेंगे तो सबसे पहले बाई तरफ खस्ता हाल त्रिवेणी नहर और दाई तरफ सरकारी हस्पताल है । सरकारी हस्पताल से आगे बढ़ने पर दाई तरफ हीं " कुट मिल ( गत्ता फैक्ट्री ) " और उसी से सटे रामरेखा नदी के किनारे हमारा " नयका सिनेमा ( श्याम ज्योति सिनेमा )" है ।
इससे आगे का रास्ता करीब तीन - चार सौ मीटर के बाद तीन रास्तों में बंट जाता है । दाहिनी तरफ वाला , मिल -
बहुअरी , पंचरुखिया , नवगांवां और चीनी मिल की तरफ चला जाता है । बाई तरफ वाला मुजरा की तरफ ।
बीच वाली सड़क के दाहिनी तरफ " किशोरी मल का बगीचा " है , जो हमारे विद्यार्थी जीवन का " मुगल गार्डन " हुआ करता था । स्कूल से आने के बाद हम यहां घंटों समय बिताया करते थे और पहली जनवरी को ' पिकनिक ' भी मनाया करते थे । आज इसके एक हिस्से में विवाह भवन , बीच में पुरानी बगिया और पूरबी हिस्से में " स्टोन क्रशर " बन गया है ।
इस रास्ते नरकटियागंज ( थाना - शिकारपुर ) , भिखना ठोरी , भितिहरवा गांधी आश्रम और भारत - नेपाल सीमा का प्रमुख शहर रक्सौल जाया जा सकता है ।
नरकटियागंज रामनगर से करीब 15 - 16 किलोमीटर है । नरकटियागंज एक अच्छा शहर है और रेलवे जंक्शन है । यहां से रेल मार्ग से बेतिया , मोतिहारी होते हुए मुजफ्फरपुर जाया जाता है । इसी रेल - मार्ग पर स्थित सुगौली जंक्शन से एक रूट रक्सौल की तरफ चली जाती है । एक रेल रूट गौनाहा और भिखना ठोरी की तरफ जाती है । नरकटियागंज से सड़क मार्ग से भी बेतिया , मोतिहारी होते हुए मुजफ्फरपुर जा सकते हैं । एक सड़क लौरिया की तरफ जाती है , जहां से भी बेतिया , बगहा , वाल्मिकीनगर और गोरखपुर जाने के रास्ते हैं ।
इसके अतिरिक्त , रामनगर से करीब 45 किलोमीटर पर मनोरम पर्यटन स्थल भिखना ठोरी, करीब 20-22 किलोमीटर प्रसिद्ध भितिहरवा गांधी आश्रम और 60 किलोमीटर के करीब रक्सौल है ।
नेपाल की सीमा अवस्थित भिखना - ठोरी घने जंगलों , खूबसूरत पहाड़ों और कल - कल बहती पहाड़ी से इतनी मनोरम हो जाती है कि जो यहां एक बार आता है , फिर दुबारा - तिबारा आना चाहता है । यहां अब खूबसूरत ' रिसोर्ट्स ' , बच्चों के लिए " फन - पार्क " और अच्छे " होम - स्टे " बन गए हैं । यहांं खांटी देशी चिकन , पहाड़ी बकरे का मिट्टी के बर्तन और लकड़ी के चूल्हे पर बना मटन , बेहतरी दही और जंगली गाय - भैंस के दूध के शुद्ध घी का आनंद ले सकते हैं ।
भितिहरवा गांधी आश्रम , जो रामनगर से करीब 25 किलोमीटर की दूरी पर है , महात्मा गांधी के सत्याग्रह आंदोलन का शुरुआती स्थल है । 1917 में जब गांधी जी चंपारण के किसानों को नील की खेती से मुक्ति के लिए यहां आए थे तो भितिहरवा में कुछ समय के लिए रुके थे । यहां जिस कुटिया में उन्होंने निवास किया था , वैसे हीं सुरक्षित रखा गया है और एक भव्य स्मारक बना दिया गया है ।
बिहार की राजनीति और राजनीतिक पदयात्राएं समय - समय पर यहां से शुरू होती हैं ।
नेपाल का प्रवेश द्वार , रक्सौल करीब 60 किलोमीटर की दूरी पर है जहां से नेपाल के प्रमुख शहर बीरगंज जाया जा सकता है । बीरगंज से पोखरा , काठमांडू और नेपाल के अन्य जगहों के लिए बस और प्राइवेट टैक्सियां मिलती हैं ।
बीरगंज में सीमा पर बसे भारतीय , मसाले और विदेशी वस्तुएं खरीदने आते हैं । इस सीमा से तस्करी भी होती है जिसकी वजह से दोनों तरफ के कस्टम वाले और पुलिस तस्करी रोकने के लिए मुस्तैद रहते हैं ।
अगली कड़ी में दक्षिण की चर्चा करूंगा ,
अरे दक्षिण भारत की नहीं , रामनगर से दक्षिण की 🙂