07/07/2026
💔 😓😭सोचिए और गौरो फिकर कीजिए!😥😓💔
कितनी दर्दनाक और शर्मनाक खबर है कि जो इमाम हमें दीन सिखाता है, हमें हलाल और हराम की तालीम देता है, आज वह कर्ज के बोझ तले दबकर इस कदर परेशान है।
चायबास की मदीना मस्जिद में एक इमाम साहब (मौलाना शाहबाज अंसारी) की आर्थिक तंगी और कर्ज के कारण खुदकुशी की घटनाहमारी कौम पर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान खड़ा करती है।
अफ़सोस! आज हमारी मस्जिदों के इमामों से ज्यादा इज्ज़त और कमाई तो चाय की दुकान पर कप धोने वाले को मिल जाती है। हमने अपने रहबरों और इमामों को किस हाल में पहुँचा दिया है?
जो कौम उर्स, जलसों, और जुलूस-ताजिया पर लाखों-करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा देती है, उसी कौम की इमामत करने वाले को कर्ज और मुफ़लिसी की वजह से फांसी के फंदे पर लटकना पड़ रहा है।
आज के इस कमरतोड़ महंगाई के दौर में एक आम मजदूर की दिहाड़ी भी कम से कम 600 रुपये प्रतिदिन (यानी महीने के 18,000 रुपये) होती है। ऐसे में हमारे इमाम साहब की सैलरी कम से कम 20 हजार रुपये तो होनी ही चाहिए, ताकि वे सम्मान के साथ अपना और अपने परिवार का पेट पाल सकें।
मुस्लिम वेलफेयर कमेटी राजगढ चुरु सभी मस्जिद कमेटी मिम्बरान से अपील करती है कि दिखावे के खर्चों को बंद करें और अपनी मस्जिदों के इमामों, मुअज्जिनों और खादिमों की तनख्वाहों में सम्मानजनक बढ़ोतरी करें। खुदा के लिए जागिए, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए!
निवेदक: → मुस्लिम वेलफेयर कमेटी, राजगढ़ (चुरु)