स्वामी विवेकानंद पुस्तकालय-बगीचा

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स्वामी विवेकानंद पुस्तकालय-बगीचा पुस्तकें मनुष्य की सर्वश्रेष्ठ मित्र हैं।

पुस्तकेँ आपके विचारोँ को उच्च बनाती हैँ, अपने व्यक्तित्व के विकास के लिए पुस्तकेँ जरूर पढेँ।
स्वामी विवेकानंद पुस्तकालय-बगीचा।

स्वामी विवेकानंद जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं
12/01/2026

स्वामी विवेकानंद जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं

पुस्तकालय में शामिल तीन और उपन्यास1. एक सड़क सतावन गलियाँ- कमलेश्वर2. छैला- विजय सौदाई3. फागुन- राजेन्द्र सिंह बेदी
03/01/2026

पुस्तकालय में शामिल तीन और उपन्यास
1. एक सड़क सतावन गलियाँ- कमलेश्वर
2. छैला- विजय सौदाई
3. फागुन- राजेन्द्र सिंह बेदी

कुछ कविता संग्रहबोलो न दरवेश - स्मिता सिन्हाअधरों के तट पर- अरुण शर्मादाग अच्छे हैं- सतीशचन्द्र शर्मा सुधांशुमेरे प्रिय-...
06/10/2025

कुछ कविता संग्रह
बोलो न दरवेश - स्मिता सिन्हा
अधरों के तट पर- अरुण शर्मा
दाग अच्छे हैं- सतीशचन्द्र शर्मा सुधांशु
मेरे प्रिय- इरा टाक
यह महज कोरा कागज नहीं है- भगवत रावत

मेजर बलवंत का एक खतरनाक मिशन   इलाहाबाद के प्रसिद्ध विजय पैलेस से आरम्भ हुआ यह हत्याओं का सिलसिला बनारस में जाकर रूका।ग्...
05/10/2025

मेजर बलवंत का एक खतरनाक मिशन
इलाहाबाद के प्रसिद्ध विजय पैलेस से आरम्भ हुआ यह हत्याओं का सिलसिला बनारस में जाकर रूका।
ग्याहर हत्याओं की अनोखी मिस्ट्री...

ग्यारह हत्याओं की कहानी देख लिया तेरा कानून मेजर बलवंत कर्नल रंजीत टेढा मकान हत्यार पुल ग्यारह बजकर बारह मिनट सां....

टेढा  मकान- कर्नल रंजीतगाजियाबाद के मुकुन्दनगर मुहल्ले की आठवीं गली में एक मकान था, जो एक मंजिल का होते हुए भी बहुत ऊंचा...
29/09/2025

टेढा मकान- कर्नल रंजीत
गाजियाबाद के मुकुन्दनगर मुहल्ले की आठवीं गली में एक मकान था, जो एक मंजिल का होते हुए भी बहुत ऊंचा था। अधिक पुराना नहीं था, लेकिन टेढ़ा जरूर था। यह मकान एक बहुत ही कंजूस बूढ़े का था। उस कंजूस बूढ़े के बारे में यह प्रसिद्ध था कि उसके पास सोने-चांदी और हीरे-जवाहरात का विशाल भंडार है जिसकी वह रात-दिन चौकीदारी करता रहता है और जानबूझकर फटे हाल रहता है। बूढ़े की इस बनी हुई साख ने कि उसके पास सोने-चांदी और हीरे-जवाहरात का विशाल भंडार है, उसे परेशान कर रखा था । कई बार उसके घर में सेंध लगाई गई। उसके हाथ-पांव और मुंह बांधकर मकान के फर्श की खुदाई की गई। दीवारें जगह-जगह से खोद डाली गई । छतों के शहतीर टटोले गए; लेकिन हीरे-जवाहरात का भंडार किसी को नहीं मिला। चोरों के हाथ बल आठ-दस रुपये या थोड़ी-सी रेजगारी लगी। कंजूस बूढ़ा एक समय में अपने आठ-दस रुपये से अधिक नहीं रखता था। उसके संदूक में पुराने घिसे पिटे और पैबन्द लगे कपड़े भरे रहते थे, जिन्हें चोर भी चुराना अपना अपमान समझते थे ।

एक अपराध कथा शिलखण्डी से सावधान टेढा मकान कर्नल रंजीत मेजर बलवंत हिंद पॉकेट बुक्स दिल्ली वह कौन था समीक्षा उपन्या....

एक नाद से राग छत्तीसोसंगीत, नृत्य, नाट्य आदि कलाएं काल के अनंतर अपना अलग समय गढ़ती हैं। यह हैं तभी तो उनमें रमते, उनमें ...
25/08/2025

एक नाद से राग छत्तीसो
संगीत, नृत्य, नाट्य आदि कलाएं काल के अनंतर अपना अलग समय गढ़ती हैं। यह हैं तभी तो उनमें रमते, उनमें बसते बहुतेरी बार यह भी अनुभूत होता है कि यह वह समय नहीं है, जिसमें हम जी रहे हैं। यह कला का समय है। मुझे लगता है, समय कलाओं को नहीं, बल्कि कलाएं अपने समय को रचती है। यह कलाएं ही हैं, जो काल से परे सौन्दर्य की सर्जना करती हैं।
पुस्तक- रस निरंजन
लेखक- डाक्टर राजेश कुमार व्यास

 िनों_मेरी_किताब   रानियां रोती नहीं- लक्ष्मी शर्माबोधि प्रकाशन से प्रकाशित एक पठनीय पुस्तक ।कुछ कहानियांपूस की एक और रा...
09/03/2025

िनों_मेरी_किताब
रानियां रोती नहीं- लक्ष्मी शर्मा
बोधि प्रकाशन से प्रकाशित एक पठनीय पुस्तक ।
कुछ कहानियां
पूस की एक और रात
अथ! मोबाइल कथा
मोनालिसा की आँखें
विषकन्या

 #किताब_मित्र  िनों_मेरी_किताब   THE डेड MAN'S प्लानमेरा नाम अजय शास्त्री है! एक सीधी साधी और प्यारी सी बेटी का बाप। वीण...
03/03/2025

#किताब_मित्र िनों_मेरी_किताब
THE डेड MAN'S प्लान

मेरा नाम अजय शास्त्री है! एक सीधी साधी और प्यारी सी बेटी का बाप। वीणा, मेरी बच्ची ! मेरी मासूम चिड़िया। जिसके बिना मैं एक पल भी नहीं रह सकता। पर मुझे अपनी उस लाड़ली से हमेशा के लिए दूर जाना होगा। इतनी दूर जहां से वो मुझे कभी बुला नहीं पाएगी। मुझे जाना ही होगा। क्योंकि जो खेल मैंने रचा है, वो मेरी मौत के बिना शुरू नहीं हो सकता और मेरी मौत ही इस खेल की पहली आहुति है। जी हाँ, पहली। क्योंकि मेरी मौत के बाद इस शहर में मौत का एक ऐसा खेल शुरू होगा, जो इस दुनिया ने पहले कभी नहीं देखा। जिन लोगों की मौत मैंने तय कर दी है, मैं उन्हें मरने के बाद भी मारता रहूँगा। कानून अपनी पूरी ताकत लगा ले उन्हें बचाने के लिए, पर मैं उन्हें मारता रहूँगा। अब क़ानून का मुकाबला एक ऐसे खिलाड़ी के साथ है, जो अपनी हर एक चाल, हर मोहरा अपनी मौत से पहले ही चल चुका है। और ये मरा हुआ आदमी, तुम्हें जीतने नहीं देगा।

अगर तुम ये जान लो कि मौत का ये खेल मैंने क्यूँ रचा, तो शायद मुझे रोक लो, पर मेरे इस खेल का मजा ही ये है कि, मुझे जितना हराओगे, मैं अपनी जीत के उतने करीब पहुँचता जाऊँगा। अब मेरे दोस्त, अगर आपको लगता है कि शायद आप मुझे रोक सकते थे,
तो खुद को आजमा कर देख लो !

में कहानीकार नहीं हूँ, सिर्फ एक बिजनसमैन हूँ। जिसने कहानी के रूप में एक ऐसी पहेली लिखी है जिसका जवाब आपको पहले पन्ने पर ही मिल जायेगा, लेकिन इसके बावजूद आप अंत तक इसको सुलझाते ही रहेंगे। अगर मैं इस कहानी के आखरी पन्ने तक आपको बाँध कर नहीं रख सका तो ये मेरी लिखी पहली और आखरी किताब होगी। ये मेरा आपसे वादा है, और मैं अपने वादे कभी नहीं तोड़ता।

- समीर सागर

पुस्तकालय में शामिल चार और रचनाएँहम नहीं चगे, बुरा न कोय- सुरेन्द्र मोहन पाठकहंडिया भर खून- नानक सिंह1857 का महासंग्राम-...
09/03/2024

पुस्तकालय में शामिल चार और रचनाएँ
हम नहीं चगे, बुरा न कोय- सुरेन्द्र मोहन पाठक
हंडिया भर खून- नानक सिंह
1857 का महासंग्राम- सत्यनारायण शर्मा
सरहद पर बिखरा खून- वेदप्रकाश वर्मा

स्वामी विवेकानंद जयंती की शुभकामनाएं...
12/01/2024

स्वामी विवेकानंद जयंती की शुभकामनाएं...

पुस्तकालय में दो विशेष उपन्यासदेशभक्त - जयंत कुशवाहातीसरा किनारा- सजल कुशवाहा
01/01/2024

पुस्तकालय में दो विशेष उपन्यास
देशभक्त - जयंत कुशवाहा
तीसरा किनारा- सजल कुशवाहा

दौलत के दानव- सतीश जैनकिसी से न कहना- शंकर सुल्तानपुरीमसूरी में खून- विद्याऔर लहू बहता रहा- कर्नल अशोकफहरो अमर तिरंगे- स...
22/12/2023

दौलत के दानव- सतीश जैन
किसी से न कहना- शंकर सुल्तानपुरी
मसूरी में खून- विद्या
और लहू बहता रहा- कर्नल अशोक
फहरो अमर तिरंगे- सुरेश श्रीवास्तव

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