06/05/2021
हे राम!
अब भेजो दूत हनुमान को ,
कह दो लाएं संजीवनी ,
तुम्हारे लक्ष्मण फिर मूर्छित हैं ।
रावण अब सहस्त्रग्रीव है,और
मेघनाद भी अट्टहास करता है तन्त्र पर ,
भगवान!बोध कराओ अब शक्ति
और कहो कि ललकारें ,और
बचाएं मानवता को संकट से ।
कलयुग के अवतारी हैं वो ,
महादेव का रुद्रावतार भी ,
महासमर में कृष्ण के ध्वज वाहक भी ,
जगदम्बा के सुत और जानकी के प्रिय,
देह पर लाली लस कर मोह लेते है ,
प्रभु के दर्शन कराते है वक्ष के अन्तःस्थल में,
फिर भी प्रभु युग कराह रहा है ,
और ,मूर्छित पड़े हैं अनन्य सेवक और दास ।
हे राम!कहकर पुकार रहे हैं,
त्राहि-त्राहि मची है चहुँ दिसि ,
गूंज रहा है करुण आर्तनाद ,
विह्वल हैं माता ,आहत है सुत।
प्रभु ,भेज दो संजीवनी लेकर हनुमान को ।
कह दो ,विलम्ब न करें ,शीघ्र आये,
बोलो प्रभु ,
सबहिं आस हनुमान ।।
विनय सहित ,
कमलेश बहादुर सिंह