15/12/2025
एम्स रायपुर : इलाज जनता का, कमाई ठेकेदार की?
एम्स रायपुर जैसे देश के सर्वोच्च सरकारी अस्पताल में इलाज जनहित के लिए होता है, मुनाफे के लिए नहीं।
लेकिन आज एक बेहद चिंताजनक सच्चाई सामने आ रही है।
पहले जहाँ एम्स रायपुर में पार्किंग निःशुल्क थी,
आज वही पार्किंग एक निजी ठेकेदार को सौंप दी गई है —
और अब बाइक की पार्किंग पर भी ₹10 वसूले जा रहे हैं।
❓ सवाल बहुत सीधा है:
👉 OPD कार्ड ₹10 का है, ओपीडी (जांच/इलाज) मुफ्त है —तो फिर गरीब मरीज से, उसके परिजन से, पार्किंग के नाम पर पैसा क्यों?
अगर सरकार चाहे तो OPD शुल्क ₹50 भी कर दे —
गरीब आदमी इलाज के लिए मुस्कुरा कर दे देगा,
क्योंकि उसे भरोसा होगा कि वह पैसा
👉 सरकारी अस्पताल के सुधार,
👉 बेहतर दवाइयों,
👉 बेहतर मशीनों और डॉक्टरों पर खर्च होगा।
लेकिन यहाँ तो पैसा जा रहा है — ➡️ एक निजी व्यक्ति की जेब में। और मामला यहीं खत्म नहीं होता।
📌 पार्किंग रसीद पर दर्ज GST नंबर गलत पाया गया है
📌 पार्किंग स्थल को GST पोर्टल पर Additional Place of Business के रूप में जोड़ा तक नहीं गया है
यानि —
👉 नियमों की अनदेखी
👉 पारदर्शिता का अभाव
👉 और आम आदमी से सीधी वसूली
क्या एम्स जैसे राष्ट्रीय संस्थान में
ऐसी व्यवसायिक मानसिकता स्वीकार्य है?
क्या इलाज के लिए आने वाला गरीब आदमी — पहले बीमारी से लड़े, और फिर ठेकेदारी व्यवस्था से?
यह सवाल सिर्फ ₹10 का नहीं है। यह सवाल है —
⚠️ नीति का
⚠️ नीयत का
⚠️ और जनहित बनाम निजी हित का।
एम्स रायपुर कोई मॉल नहीं है।
यह गरीब, किसान, मजदूर, आदिवासी और मध्यम वर्ग की आख़िरी उम्मीद है।
📢 सरकार और एम्स प्रशासन से मांग है:
1️⃣ पार्किंग ठेका व्यवस्था की तत्काल समीक्षा हो
2️⃣ नियमविरुद्ध GST और पंजीकरण की जांच हो
3️⃣ पार्किंग को फिर से निःशुल्क या सरकारी नियंत्रण में लाया जाए
क्योंकि — इलाज सेवा है, सौदा नहीं। एम्स जनकल्याण के लिए है, किसी ठेकेदार की कमाई के लिए नहीं।