Navin Singh मगहीया बाबु

Navin Singh मगहीया बाबु "द्वन्द कहा तक पाला जाये ,युध्द कहा तक ट

श्रद्धेय  #शारदा_सिन्हा जी के निधन की खबर से अत्यंत दुखी एवं मर्माहत हूं!छठी मैया से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपन...
06/11/2024

श्रद्धेय #शारदा_सिन्हा जी के निधन की खबर से अत्यंत दुखी एवं मर्माहत हूं!

छठी मैया से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपनी शरण में लें और उनके प्रशंसकों व परिजनों को यह दुःख सहने का साहस प्रदान करें!

ांति 🙏😢

मेरा हमेशा से यह मानना रहा है कि दुनिया में ‌जितना बदलाव हमारी पीढ़ी ने देखा है वह ना तो हमसे पहले किसी पीढ़ी ने देखा है...
19/09/2024

मेरा हमेशा से यह मानना रहा है कि दुनिया में ‌जितना बदलाव हमारी पीढ़ी ने देखा है वह ना तो हमसे पहले किसी पीढ़ी ने देखा है और ना ही हमारे बाद किसी पीढ़ी के देखने की संभावना लगती है

हम वह आखिरी पीढ़ी हैं जिसने बैलगाड़ी से लेकर सुपर सोनिक जेट देखें हैं.बैरंग ख़त से लेकर लाइव चैटिंग तक देखा है और असंभव लगने वाली बहुत सी बातों को संभव होता देखा है.

● हम वो आखिरी पीढ़ी हैं

जिन्होंने कई-कई बार मिटटी के घरों में बैठ कर परियों और राजाओं की कहानियां सुनीं, जमीन पर बैठ कर खाना खाया है, प्लेट में चाय पी है।

● हम वो आखिरी लोग हैं…

जो मोहल्ले के बुज़ुर्गों को दूर से देख कर, नुक्कड़ से भाग कर, घर आ जाया करते थे. और समाज के बड़े बूढों की इज़्ज़त डरने की हद तक करते थे

● हम वो आखिरी पीढ़ी के लोग हैं

जिन्होंने चिमनी , लालटेन, कम या बल्ब की पीली रोशनी में होम वर्क किया है और चादर के अंदर छिपा कर नावेल पढ़े हैं।

● हम उसी पीढ़ी के लोग हैं…

जिन्होंने अपनों के लिए अपने जज़्बात, खतों में आदान प्रदान किये हैं और उन ख़तो के पहुंचने और जवाब के वापस आने में महीनों तक इंतजार किया है।

● हम उस आखिरी पीढ़ी के लोग हैं

जिन्होंने कूलर, एसी या हीटर के बिना ही बचपन गुज़ारा है। और बिजली के बिना भी गुज़ारा किया है।

जो अक्सर अपने छोटे बालों में, सरसों का ज्यादा तेल लगा कर, स्कूल और शादियों में जाया करते थे।

जिन्होंने स्याही वाली दावात या पेन से कॉपी, किताबें, कपडे और हाथ काले, नीले किये है। तख़्ती पर सेठे की क़लम से लिखा है और तख़्ती घोटी है।

जिन्होंने टीचर्स से मार खाई है. और घर में शिकायत करने पर फिर मार खाई है

जिन्होंने गोदरेज सोप की गोल डिबिया से साबुन लगाकर शेव बनाई है जिन्होंने गुड़ की चाय पी है। काफी समय तक सुबह काला या लाल दंत मंजन या सफेद टूथ पाउडर इस्तेमाल किया है और कभी कभी तो नमक से या लकड़ी के कोयले से दांत साफ किए हैं।

जिन्होंने चांदनी रातों में, रेडियो पर BBC की ख़बरें, विविध भारती, आल इंडिया रेडियो, बिनाका गीत माला और हवा महल जैसे ❣️🙏

#यादें #बचपन #बीताहुआसमय

गुरुर्ब्रह्मा ग्रुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः । गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः ॥हमारे जीवन में ज्ञान...
21/07/2024

गुरुर्ब्रह्मा ग्रुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः ।
गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः ॥
हमारे जीवन में ज्ञान का प्रकाश देने वाले गुरुजनों को सनातन संस्कृति में ईश्वर से भी ऊंचा स्थान दिया गया है। आज का दिन अपने गुरुजनों के वंदन, नमन और अभिनंदन का है। गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं।
#गुरू_पूर्णिमा

04/06/2024

हम यह भूल गए यह वही अयोध्यावासी हैं जिन्होंने वनवास से आने के बाद सीता माता पर भी संदेह किया था.. #उत्तरप्रदेश #अयोध्या

दिल्ली नेशनल म्यूज़ियम में रखा मुग़ल बादशाह औरंगज़ेब का कवच जिसे दमिश्क स्टील से बनाया गया था, जो हर तरह के हथियार का वार झ...
25/05/2024

दिल्ली नेशनल म्यूज़ियम में रखा मुग़ल बादशाह औरंगज़ेब का कवच जिसे दमिश्क स्टील से बनाया गया था, जो हर तरह के हथियार का वार झेलने में सक्षम था। कवच के नीचे पहली लाइन में "ला-इलाहा इल्लल्लाह मुहम्मद रसूल अल्लाह" दूसरे लाइन में "शहंशाह औरंगजेब आलमगीर" लिखा हुआ है।

विदित हो कि दमिश्क स्टील की तकनीक खो चुकी है क्योंकि इसके सारे कारीगर मारे जा चुके है। दमिश्क स्टील से बनी तलवार जब दूसरी तलवारों से टकराती थी तो दूसरी तलवारों में क्रैक पड़ना शुरू हो जाता था।

इसी तरह एक और तकनीक थी ग्रीक फायर, ग्रीक फायर एक ऐसे तेल से जली आग होती थी जो पानी में भी जलती थी और उसपर जितना पानी डालो बेअसर रहती थी। एक बार सहाबा की फौज जब इस्तांबुल ( तब का कुस्तुनतुनिया) पर चढ़ाई करने गए तो इसी ग्रीक फायर की वजह से पीछे हटना पड़ा। इससे यह भी पता चला कि तकनीक की हर ज़माने में कदर बहुत ज्यादा की जानी चाहिए।

मुगल भी भारत में बारूद की वजह से फातेह थे और स्पेन में भी तकनीन की वजह से जीते और बाद में हारे।

परसों ही इसमें रखा हुआ एक गुप्त चित्रलेखा से अंकुरित पत्र मिला है जिसका अध्यन करने पर पता चला कि चमचे कितना ही जोर लगा लें परंतु 2024 में भी आएगा तो मोदी ही.....💪🇮🇳🙏❤️

घुघुआ मन्ना, उपजे धाना ओहि पड़े आवेले, बबुआ के मामाकनवा छेदाई दिहलें, बलवा पेन्हाई दिहलेदूनो हाथे लड्डूआ, मिठईआ धराई दिह...
09/04/2024

घुघुआ मन्ना, उपजे धाना
ओहि पड़े आवेले, बबुआ के मामा
कनवा छेदाई दिहलें, बलवा पेन्हाई दिहले
दूनो हाथे लड्डूआ, मिठईआ धराई दिहलें
बबुआ के मुंहवा में घुटूक।
______________________
गलर-गलर पूआ पाकेला
चिलरा खोईछा नाचेला
जो रे चिलरा खेत खरिहान
ले अइहे तिलकियो धान
ओही धान के चिउरा कुटइबो
बाभन बिसुन नेवता पेठइबो
बभना के पूतवा दीही असीस
बबूआ जीहें लाख बरीस
_____________________
चल बिलईया भोजपुर,
भोजपुर में का बा,
लाल लाल सिपहिया बा,
दूनो कान कटईले बा,
______________________
बबुआ खाय दूध भतवा,
बिलईया चाटे पतवा,
पतवा उधियाईल जाय,
बिलईया रगेदले जाय।
______________________
नया भीति उठेले
पुरानी भीति गिरेले
समहरिहे बुढ़िया....।

#पारंपरिक

09/04/2024
जब आम पके नही होते थे तब हम बच्चे यूं कुपोषित आम को ही पका आम मानकर खा कर खुश हो जाया करते थे।ये वो आम होता है जो डाली प...
01/04/2024

जब आम पके नही होते थे तब हम बच्चे यूं कुपोषित आम को ही पका आम मानकर खा कर खुश हो जाया करते थे।
ये वो आम होता है जो डाली पर लगा तो होता है परंतु उचित पोषण न मिलने की वजह से सूखने लगता है, सूखने की वजह से इसके गुदे पके आम की तरह पीले पड़ जाते हैं जो हमारे लिए पका हो जाता है।
हालांकि घर पर इसे खाने की अनुमति नहीं होती है क्योंकि नानी कहती थी कि धूप और पछुआ हवा के संपर्क की वजह से ये लूहा गया है यानि बीमार हो गया है और इसे खाने से तुम बीमार हो जाओगी।
नानी के कहने का तात्पर्य होता था कि इसमें गर्मी होगी और लू लगी है तो खाने से स्वास्थ्य खराब हो जायेगा लेकिन हमे इससे क्या मतलब था हम तो इसे सुसकरी (सुसक गया या सूख गया)आम कहकर खा जाते थे।
इसी तरह एक कोयलारी आम भी होता है वो भी असमय पीला हो जाता था और हम सब उसे ढूंढ कर पेड़ से तोड़कर खाते थे।
कोयलारि आम में काले रंग का धब्बा लगा रहता था जो शायद हमारे आम तोड़ने के चक्कर में ढेला लग जाता रहा होगा और चोट लगा भाग काला पड़ जाता था।

आप सबने भी कोयलारी, सुसकारी, फटलासी आम खाया हो तो कॉमेंट में अवश्य बताएं।
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तस्वीर फेसबुक साभार
Navin Singh मगहीया बाबु

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18/03/2024

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|| रघुपति राघव राजाराम, पतित पावन सीताराम ||राम मंदिर में रामलला विधि विधान से पूजन के साथ विराजमान हो गए हैं. रामलला का...
22/01/2024

|| रघुपति राघव राजाराम, पतित पावन सीताराम ||
राम मंदिर में रामलला विधि विधान से पूजन के साथ विराजमान हो गए हैं. रामलला का दिव्य स्वरूप भी सामने आ गया है. एक शब्द में करें रामलला के अलौकिक रूप का वर्णन-

#जयश्रीराम

#जयश्रीराम.🚩

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