25/09/2025
पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती पर सादर नमन
क्या जंग लगी तलवारों में, जो इतने दुर्दिन सहते होI
राणा प्रताप के वंशज हो,क्यों कुल को कलंकित करते हो II
आराध्य तुम्हारे राम-कृष्ण,जो कर्म की राह दिखाते थेI
जो दुश्मन हो आततायी, वो चक्र सुदर्शन उठाते थेI
श्री राम ने रावण को मारा, तुम गद्दारों से डरते होI
Iजब शस्त्रों से परहेज तुम्हें, तो राम राम क्यों जपते हो
क्या जंग लगी तलवारों में, जो इतने दुर्दिन सहते हो II
अंग्रेजों ने दौलत लूटी, मुगलों ने थी इज्जत लूटीI
दौलत लूटी, इज्जत लूटी, क्या खुद्दारी भी लूट लिया,
गिद्धों ने माँ को नोंच लिया,तुम शांति-शांति को जपते होI
इस भगत सुभाष की धरती पर,क्यों ना मर्दों से रहते हो?
क्या जंग लगी तलवारों में जो इतने दुर्दिन सहते होII ......
हिन्दू हो, कुछ प्रतिकार करो, तुम भारत माँ के क्रंदन का
यह समय नहीं है, शांति पाठ और गांधी के अभिनंदन का
यह समय है शस्त्र उठाने का,गद्दारों को समझाने का,
शत्रु पक्ष की धरती पर,फिर शिव तांडव दिखलाने काI
इन जेहादी जयचंदों की घर में ही कब्र बनाने का,
यह समय है हर एक हिन्दू के,राणा प्रताप बन जाने काI
इस हिन्दुस्थान की धरती पर ,फिर भगवा ध्वज फहराने का II
ये नहीं शोभता है तुमको,जो कायर सी फरियाद करो I
छोड़ो अब ये प्रेमालिंगन,कुछ पौरुष की भी बात करो II
इस हिन्दुस्थान की धरती के,उस भगत सिंह को याद करो,
वो बन्दूको को बोते थे,तुम तलवारों से डरते हो I
क्या जंग लगी तलवारों में जो इतने दुर्दिन सहते हो II......
पंडित दीन दयाल जी में कर्तृत्व और विचार एकात्मता के साथ मूर्तिमत थे। उनकी कर्मशक्ति बड़ी थी या बौद्धिकता, इसका फैसला आसान नहीं है। वे वैचारिक निष्ठा एवं व्यावहारिक कर्मशीलता के अप्रतिम उदाहरण थे। वे राजनीति में भारतीय तत्व के विवेचक एवं प्रवक्ता थे। उनके विचार सर्वांगीण थे; आने वाली अनंत पीढ़ियों की अनमोल विरासत हैं उनके विचार। उन्होंने स्वयं अपने बारे में कहा, "मैं राजनीति में संस्कृति का राजदूत हूँ।" वे जीवन भर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के नाते व्रती जीवन के वाहक रहे। राजनीति का उन पर असर नहीं हुआ, उनका राजनीति पर असर हुआ। सभी उपहासों व् विरोधों को उन्होंने जनसंघ का विस्तार करके करारा जवाब दिया। १९६७ के आम चुनाव में कांग्रेस के बाद भारतीय जनसंघ दूसरे नंबर की पार्टी बन गयी। इसी वर्ष जनसंघ ने भी उन्हें अपना अध्यक्ष चुन लिया। अनाम रहकर काम करने वाले दीनदयाल नामवर हो गए। पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितम्बर 1916 को धनकिया नामक स्थान ,जयपुर अजमेर रेलवे लाइन के पास राजस्थान में हुआ था। उन्हीं अंत्योदय व एकात्म मानववाद के प्रणेता, प्रखर राष्ट्रवादी विभूति की जयंती पर सदर नमन।