पूर्व सांसद कार्यालय, पूर्णिया

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पूर्व सांसद कार्यालय, पूर्णिया कृपया अपने क्षेत्र की समस्याओं से संबंधित सूचना के निदान हेतु इस पेज के माध्यम से हमे बतावे।

15/09/2026

वीर नारायण चंद महाविद्यालय धमदाहा के संगीत विभाग में तबला वादक के पद पर कार्यरत हसन जमीर साहब के निधन का समाचार सुनकर दुखी हूं। हसन जमीर एक उच्च कोटि के संगीतज्ञ थे, उन्होंने तबला वादन के क्षेत्र में महारत हासिल किया था। उनके आकस्मिक निधन से महाविद्यालय परिवार को अपूरणीय छति हुई है। मैं उनके आकस्मिक निधन पर अपना दुख प्रकट करता हूं।
अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए और उनके अहले-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता करे।

#भावपूर्ण_श्रद्धांजलि
#जनाब_हसन_जमीर
#विनम्र_नमन

12/09/2026

पूर्णिया ज़िले के अमौर विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक एवं बिहार सरकार के पूर्व मंत्री जनाब जलील मस्तान साहब के इंतिक़ाल की ख़बर से दिल बेहद ग़मगीन है।

वह एक नेकदिल और इंसानियत-पसंद शख़्सियत थे। ग़रीबों, बेबसों और ज़रूरतमंदों की मदद व ख़िदमत का जज़्बा उनके किरदार की ख़ास पहचान थी। उनके इंतिक़ाल से अमौर ही नहीं, बल्कि पूरी सियासी और समाजी ज़िंदगी में एक बड़ा ख़ला पैदा हुआ है।

मैं इस दुख की घड़ी में उनके अहले-ख़ाना और तमाम मुतअल्लिक़ीन के साथ अपनी गहरी हमदर्दी और पुरख़ुलूस ताज़ियत का इज़हार करता हूँ।

अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला से आला मक़ाम अता फ़रमाए और उनके अहले-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता करे। आमीन।

02/09/2026
26/08/2026

ईद मिलाद-उन-नबी ﷺ की दिली मुबारकबाद।

नबी-ए-करीम ﷺ की पैग़ाम-ए-मोहब्बत हमें याद दिलाता है कि इंसानियत से बड़ा कोई मज़हब नहीं और भाईचारे से खूबसूरत कोई रिश्ता नहीं।

आइए, इस मुबारक दिन अपने समाज में अमन, मोहब्बत और इंसाफ को मजबूत करने का संकल्प लें।

मिलाद-उन-नबी मुबारक। 🤲

18/08/2026

मुझे नहीं पता कि यह पोस्ट मुझे भी प्रधानमंत्री जी की नई श्रेणी के किसी “दिमागी नक्सल” में डाल देगी या नहीं — लेकिन सवाल पूछने की पुरानी आदत अभी गई नहीं है।

रीतिका खेड़ा का लेख VB-GRAM-GA को लेकर एक सीधा सवाल उठाता है: जो दिक्कतें अभी दिख रही हैं, वे सिर्फ शुरुआती अड़चनें हैं या किसी बड़ी गड़बड़ी के संकेत?

जुलाई में इस नई योजना के तहत मिला रोजगार, पिछले साल जुलाई के मनरेगा रोजगार का लगभग आधा रहा। नई और बेहतर योजना के लिए यह शुरुआत बहुत उत्साहजनक नहीं कही जा सकती।

और असली चिंता इससे भी बड़ी है। कागज पर 100 की जगह 125 दिनों की गारंटी दी गई है, लेकिन साथ ही राज्यों पर खर्च का बोझ भी काफी बढ़ा दिया गया है। गरीब राज्यों के लिए यही सबसे बड़ी मुश्किल बन सकती है — जहां रोजगार की जरूरत सबसे ज्यादा है, वहीं सरकारों के पास अतिरिक्त पैसा सबसे कम है।

असल सवाल बहुत साधारण है:

जब कोई गरीब ग्रामीण परिवार काम मांगेगा, तो क्या उसके लिए पैसा वास्तव में उपलब्ध होगा?

अगर रोजगार का अधिकार इस बात पर निर्भर करने लगे कि आप किस राज्य में पैदा हुए हैं और उस राज्य की तिजोरी कितनी भरी है, तो यह राष्ट्रीय रोजगार गारंटी कम और किस्मत की लॉटरी ज्यादा हो जाएगी।

इसे सिर्फ “teething trouble” कहकर टालना जल्दबाजी होगी।

और हां, अगर इतना सोचना भी अब “दिमागी नक्सल” होने की निशानी है, तो क्या कीजिए!

15/08/2026
15/08/2026

आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ!🇮🇳

#स्वतंत्रता_दिवस

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Moul Babu Hata, Madhubani
Purnea
854301

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