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अह्मस्मि योध: न कदापि खण्डित:मैं कभी न खंडित होने वाला योद्धा हूं। "___________________________________अर्थात : " मैं क्...
17/02/2021

अह्मस्मि योध: न कदापि खण्डित:

मैं कभी न खंडित होने वाला योद्धा हूं। "

___________________________________

अर्थात : " मैं क्षत्रिय ! अपने वचनों पर अटल रहने वाला , कभी भी संघर्षों के आगे न झुकने तथा अपने धर्म की रक्षा हेतु कभी भी पीछे न हटने वाला अखंडित योद्धा हूं । "

इतिहास में जहां भी उच्च कोटि के सात्विक त्याग की महिमा है, जहां भी अद्वितीय शूरवीरता और युद्ध कौशल की चर्चा है तथा जहां अपने वचनों पर अटल रहने का गुणगान है, वहां क्षत्रियों ( राजन्य - राजपूत - राजपुत्र ) का चरित्र सदा से ही उज्जवल और प्रशंसनीय रहा है।

"अह्मस्मि योध: न कदापि खण्डित: " की नीति का अनुसरण कर धर्म रक्षार्थ बलिदान होने क्षत्रियों का विशेष गुण है। इनकी जज्वलमान और निशंक युद्ध प्रियता का उदाहरण किसी समाज या देश के इतिहास में नहीं मिलता ।

राजपूत कभी युद्ध का परिणाम देखकर नहीं लड़ते , उन्हें अपने प्राणों का भय युद्ध स्थल से बाहर नहीं खींच सकता था । अपने क्षात्र धर्म और कर्म पर अटल रहने वाले सनातन धर्म रक्षार्थ युद्ध रूपी यज्ञ में प्राणों की आहुति चड़ाने वाले वीर सच में बेशकीमती प्रतिभा के धनी थे।

विजय या पराजय की बजाय " विजय या वीरगति " का मौलिक उद्देश्य लेकर रण क्षेत्र में कोहराम मचाने वाले ये अल्हड़ वीर जीते जी कभी शत्रु को अपनी भूमि पर अधिकार नहीं देते थे।

समर प्रांगण में काल बनकर टूटने वाले इन वीरों की प्रसंशा खुद शत्रु भी किया करते थे।

खानवा युद्ध के पश्चात् बाबर ने अपनी आत्मकथा में लिखा कि -

" राजपूत ना तो जय-पराजय का भय रखते है और ना ही युद्ध में छल प्रपंच का प्रयोग करना जानते है , उन्हें बस युद्ध स्थल में मरना प्रिय है। "

रण चंडी का आशीर्वाद लेकर जन्मे ऐसे राजपूतों का जितना बखान किया जाय कम ही है।



साभार ,
पोस्ट लेखक : भंवर देवेन्द्र सिंह रहलाना ©

जहां हुए बलिदान मुखर्जी वो  #कश्मीर हमारा है  ..
23/06/2019

जहां हुए बलिदान मुखर्जी वो #कश्मीर हमारा है ..

तुम निकले थे लेने स्वराज, सूरज की सुर्ख़ गवाही में ,पर आज स्वयं “टिमटिमा” रहे, जुगनू की नौकरशाही में...
21/05/2019

तुम निकले थे लेने स्वराज, सूरज की सुर्ख़ गवाही में ,
पर आज स्वयं “टिमटिमा” रहे, जुगनू की नौकरशाही में...

'सियासत' तुम्हारे जिगर में अगर हौसला होता लहू जवानों का सड़कों पर यू नहीं पड़ा होता'... 😢दुःखद 😥😥 श्रद्धांजलि ..!!🇮🇳
14/02/2019

'सियासत' तुम्हारे जिगर में अगर हौसला होता
लहू जवानों का सड़कों पर यू नहीं पड़ा होता'... 😢

दुःखद 😥😥 श्रद्धांजलि ..!!🇮🇳

चाल कहो या मायाजाल कहो। आर्थिक न्याय कहो या साज़िश की नींव मानो। है तो ये ऐतिहासिक। ग़रीब की जाति नहीं होती। तो जाति के ...
10/01/2019

चाल कहो या मायाजाल कहो। आर्थिक न्याय कहो या साज़िश की नींव मानो। है तो ये ऐतिहासिक। ग़रीब की जाति नहीं होती। तो जाति के नाम पर आरक्षण से वंचित क्यों रहते।

जिनका  #कर्म युद्ध.. #धर्म युद्ध.. #जीवन का मर्म युद्ध....उनके सर पर हमेशा मां भवानी का हाथ रहता है… और उनकी हमेशा विजय ...
09/01/2019

जिनका #कर्म युद्ध.. #धर्म युद्ध.. #जीवन का मर्म युद्ध....
उनके सर पर हमेशा मां भवानी का हाथ रहता है…
और उनकी हमेशा विजय होती है…
" #वीर_भोग्या_वसुन्धरा"

*या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता*
*नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:*

याद रखना गद्दार लोग अगर समझाने से समझ जाते तो बांसुरी बजाने वाला न कभी सुदर्शन उठाता औरन महाभारत कराता…
09/01/2019

याद रखना गद्दार लोग अगर समझाने से समझ जाते तो बांसुरी बजाने वाला न कभी सुदर्शन उठाता और
न महाभारत कराता…

 #क्षत्रिय ⛳⛳⛳राजपूतो के बारे में कहा जाता है.. #बारह_बरस_ले_कुकुर_जीये_औ_सोलह_ले_जिये_सियार। #वर्ष_अठारह_क्षत्रिय_जीये_...
09/01/2019

#क्षत्रिय ⛳⛳⛳
राजपूतो के बारे में कहा जाता है..

#बारह_बरस_ले_कुकुर_जीये_औ_सोलह_ले_जिये_सियार।
#वर्ष_अठारह_क्षत्रिय_जीये_आगे_जीये_ते_धिक्कार।

अजी साहब बहुत भेदभाव हुआ दलितों के साथ।उनसे खेतों में काम कराया गया।हरवाही कराई गई।गोबर उठवाया गया।उन्हें शिक्षा से वंचित रखा गया।
साब बहुत जुल्म हुआ दलितों पे ..!

यह बात बहुत जोरों से सोशल मीडिया,मास मीडिया के माध्मय से में लोगो को बताई जा रही है।

मगर 1400 साल पहले जब मक्का से इंसानी खून की प्यासी इस्लाम की तलवार लपलपाते हुए निकली तो ...
एक झटके में ही...ईरान,इराक,सीरिया,मिश्र,दमिश्,अफगानिस्तान, कतर, बलूचिस्तान से ले के मंगोलिया और रूस तक ध्वस्त होते चले गए।

स्थानीय धर्मों परम्पराओं का तलवार के बल पर लोप कर दिया गया और सर्वत्र इस्लाम ही इस्लाम हो गया।

शान से इस्लाम का झंडा आसमान चूमता हुआ अफगानिस्तान होते हुए सिंध के रास्ते हिंदुस्तान पहुंचा।

पर यहां पहुंचते ही इस्लाम की लगाम आगे बढ़ के क्षत्रियों ने थाम ली जिसके कारण भीषण रक्तपात हुआ।
आठ सौ साल तक क्षत्रिय राजवंशों से ले के आम क्षत्रियों ने इस्लाम की नकेल ढीली न पड़ने दी।इनका साथ भी दिया जाटों ने,गुज्जरों ने, यादवों ने, ब्राह्मणों ने वैश्यों ने ..!

पर ये लोग फ्रंट लाइनर नही रहे कभी।सिर्फ आत्मरक्षार्थ डटे रहते थे ..!

असली लड़ाई राजपूतो (ठाकुरों) ने ही लड़ी ..!

एक समय ऐसा आया जब 18 साल से ऊपर के लड़के ही न रहे क्षत्रियों में।विधवाओं का अंबार लग गया। इसी वजह से सती प्रथा जौहर जैसी व्यवस्थाएं आकार लेने लगी।

राजपूतानिया खुद आगे बढ़कर अपने पति,बेटो को युद्ध मे तिलक लगाकर भेजती थी और खुद जोहर करती थी।ताकि कोई गैर उनके शरीर को हाथ भी न लगा सके।

परिणामतः UP जैसे बड़े राज्य में ये राजपूत घट के 1 % से भी नीचे आ गए। जनसँख्या बढ़ने के बाद अब लगभग 8% तक पहुंचे हैं। किसी-किसी राज्य में तो इनकी जड़ ही गायब हो गई।

जबकि तथा कथित शोषित वर्ग खुद को 54% बतलाता है ..!

जिसका नतीजा यह हुआ के इस्लाम यहीं फंस के रह गया और आगे नही बढ़ पाया।

परिणामतः-- चाइना, कोरिया,जापान, नेपाल जैसे भारत के पूर्वी राज्य इस्लाम के हमले से बच गए।

इतना सब कुछ झेलने के बाद भी कहीं किसी इतिहास में ये नही मिलेगा, की इस्लाम के खिलाफ लड़ाई में क्षत्रियों ने खुद न जा के किसी और जाति को मरने के लिए आगे कर दिया।

बाकी जातियों में जो लड़े वो आत्म रक्षार्थ ही लड़े।

राजपूत अपने नाबालिग बेटे कुर्बान करते रहे पर कभी अपने कर्म से विमुख न हुए। सामाजिक जातीय वर्ण व्यवस्था का पूरा ख्याल रखा।जिसके वजह से आज की हिन्दू पीढ़ी मुसलमान होने से बची रह गई।

राजपूतो में आपसी मतभेद होने के वजह से मुसलमानों का भारत पे अधिकार तो हो गया लेकिन 800 सालों में भी भारत को इस्लामिक देश नही बना पाया।

कुछ को छोड़ बाकी पूरा समाज सदा ही इनका ऋणी रहेगा।⚔🚩

बाकी तो हर जगह राजपूतों को अत्याचारी ही बताया गया है रही सही कसर बॉलीवुड ने पूरी कर दी हर फिल्मों में इन्हें अत्याचारी ठाकुर दिखा दिखा के लोगो के दिमाग मे इनकी गलत छवि पेश की गई।

लेकिन ये नही दिखाया कि जब मुस्लिम तलवारे रक्त मांगती थी तब पहला सिर इन राजपूतानी माँओ ने अपने पति और बेटों के दिया है। कद्र करो इनकी सभी लोग और अहसान मानो ये न होते तो आज किसी मस्जिद में नमाज पढ़ रहे होते।

जिनके दादा परदादा राजपूती तलवार के छत्रछाया में न केवल जिंदा रहे बल्कि अपने धर्म को बचाये रखने में कामयाब रहे आज वही लोग राजपूतों पर जातिवाद का आरोप लगाते है। इतिहास पता करो राजपूतों को गाली देने से पहले। हिंदुत्व की रक्षा में इस कौम ने अपनी संतानों की बलि चढ़ा दी धन्य है वो राजपूती नारियां।

धन्य है ऐसे राजपुताना वीरों को जिनके शब्दकोह में #डर शब्द नही था।
मेरा हमेशा नमन रहेगा राजपुतो आपको और आपके वंश को

देश_का_पहला_चौकीदार_प्रधानमंत्री_चोर_था? #राहुल_गांधी_कांग्रेस_जवाब_देंआज़ादी के ठीक 2 साल बाद 1949 में सेना ने जब सरकार ...
07/01/2019

देश_का_पहला_चौकीदार_प्रधानमंत्री_चोर_था?
#राहुल_गांधी_कांग्रेस_जवाब_दें
आज़ादी के ठीक 2 साल बाद 1949 में सेना ने जब सरकार से 4600 जीप मांगी तो सरकार ने लन्दन की कम्पनी से 1500 जीप खरीदीं और पूरा भुगतान एडवांस कर दिया। लेकिन केवल 155 जीप भारत आईं जो मानक पर खरी नहीं उतरीं तथा सेना ने उन्हें कबाड़ घोषित कर के उपयोग करने से साफ इनकार कर दिया। शेष 1345 जीप कभी भारत नहीं आयीं। आज 69 साल बाद भी देश उन 1345 जीपों तथा उन जीपों के लिए एडवांस दी गयी पूरी रकम की वापसी की प्रतीक्षा कर रहा है।
सरकारी खजाने की इस सरकारी लूट की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति उस समय बनाई गई थी। जांच कमेटी ने इसे घोटाला माना और न्यायिक जांच की सिफारिश की, पर सरकार ने वह जांच कभी नहीं कराई। इस तरह देश के ख़ज़ाने से सरेआम हुई इस सरकारी लूट के लिए किसी के खिलाफ ना कोई कार्रवाई हुई। ना किसी को कोई सज़ा मिली। इसके बजाय जो कृष्ण मेनन उस सरकारी लूट के मुख्य अपराधियों में से एक था उसे दंडित करने के बजाय 1956 में उस कृष्ण मेनन केंद्रीय मंत्री बना दिए गया था। जबकि जीप घोटाला जब हुआ था तब कृष्ण मेनन लंदन में भारतीय उच्चायुक्त था। कहा यह जाता है कि कृष्ण मेनन को केन्द्रीय मंत्री बनाकर उसको अपना मुंह बंद रखने की कीमत दी गयी थी। क्योंकि यदि वो मुंह खोलता तो सरकारी खजाने की सरकारी लूट का मुख्य अपराधी सबूतों के साथ पकड़ा गया होता।
सरकारी फैसले से सरकारी लोगों द्वारा सरकारी ख़ज़ाने से जब इस जघन्य लूट/चोरी को दिनदहाड़े अंजाम दिया गया था उस समय राहुल गांधी का पुरखा जवाहरलाल नेहरू ही देश के ख़ज़ाने का चौकीदार प्रधानमंत्री था।
इसलिए आजकल देश के प्रधानमंत्री को चोर कह रहे राहुल गांधी और कांग्रेस से देश अपने इस सवाल का जवाब मांग रहा है कि क्या देश का पहला चौकीदार प्रधानमंत्री चोर/लुटेरा था.?

अगर बेहूदगी और बदतमीजियां बंद नहीं हुईं तो ऐसे ही ज्वलंत तथ्यों/सबूतों के साथ यह भी याद दिलाना पड़ेगा कि... #इसका_बाप_चोर_था ???

स्वागत योग्य कदम , अभिनंदन !!!
07/01/2019

स्वागत योग्य कदम , अभिनंदन !!!

कोई जन्नत का तालिब है ,कोई गम से परेशान है ,जरूरत सजदा करवाती है , ईबादत कौन करता है
05/06/2018

कोई जन्नत का तालिब है ,कोई गम से परेशान है ,
जरूरत सजदा करवाती है , ईबादत कौन करता है

जो लोग इतिहास से नहीं सीखते हैं वे इसे दोहराने के लिए बर्बाद हो जाते हैं।गोधरा में ऐसा ही हुआ क्योंकि हम एक हजार साल के ...
27/02/2018

जो लोग इतिहास से नहीं सीखते हैं वे इसे दोहराने के लिए बर्बाद हो जाते हैं।

गोधरा में ऐसा ही हुआ क्योंकि हम एक हजार साल के हमारे खूनी इतिहास से नहीं सीखते थे, हमने धार्मिक अलौकियों, उनके सम्मान की कमी, उनकी चालाक और कायरता के तरीके और उनके प्रतिद्वंद्विता से सबक नहीं लिया या शायद हमने इसे भूलना चुना।

आज धार्मिक दुराग्रह के 59 पीड़ितों के लिए एक दुखद श्रद्धांजलि है जो हमारे देश को बहुत लंबे समय तक पीड़ित है। लेकिन ये जीवन शिरा में चलेगा यदि हमें याद नहीं है कि वे इतने भयानक मौत क्यों मारे गए।

#गोधरा_कांड

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