07/05/2023
जय माँ कोकिला कनार 🚩🚩🚩🚩
जय ईष्ट देव 🚩🚩🚩🚩🚩.............
कनार गांव वैसे तो देवी-देवताओं का घर माना जाता है क्योंकि यही आस्था से आने वाले कभी खाली हाथ नही जाते ,आज भी देव भूमि में झोड़ा -चांचरी, जागर ,भगनोल, फ़ाग(सगुना) भजन और ठुल खेल होते आ रहे है लेकिन अब जो नई पीढ़ी है ओ इन चीजों में कम रुचि लेने लग गयी है जिस से अब यह विलुप्त होने की कगार में पहुँच चुकी है ,ढोल नगाड़ों दमाऊ के जगह अन्य बड़े वाद्य यंत्रों का प्रयोग होने लगा है, फिर बहुत से लोग है जो इस संस्कृति को बचाने में लगे हुए अगर सरकार से एक अच्छी मुहिम चलाई जाए तो संस्कृति और अपनी बोली बचाई जा सकती है ।
आज भी कनार गांव में झोड़ा -चांचरी, जागर और सगुना आदि बड़े लगाओ से सुना जाता है ।काफी समय पहले तो ठुल खेल (गंजा) काफी होता था लेकिन अब ठुल खेल (गंजा) कम ही होता है लेकिन अब भी कनार में खेल शादी-व्याह, कौतिक में खेल खेला जाता है गांव की महिलाएं ये पुरूष गोल घेरे में खेल गाते रहते है कभी कभी बीच मे दोहरिया होते है जो उस गीत को बड़े प्यार सजाते है जितना मुझे पता है कनार के अंदर जो दोहरिया है उनको सम्मनित रूप में देखा जाता है जैसे दीवान सिंह(सरपंच जी), जीत सिंह, उमेद सिंह ,कुशल सिंह बिष्ट, खगेन्द्र सिंह,पुष्कर सिंह, भूमि देवी, कीड़ी देवी आदि लोग है जो दोहरिया के रूप में जाने जाते है इसी का एक रूप में एक खेल(गंजा)जो आपके बीच मे ला रहा हूं यह माँ भगवती के प्रागण शिलिंग खाल में गाया जा रहा है
धन्यवाद 🙏🙏🙏🙏🙏🙏