पिसावा नगर पंचायत

पिसावा नगर पंचायत Pisawa is a new Nagar Panchayat in Aligarh district of Uttar Pradesh State, India. It is located 26 km from Khurja and 15 km from Jattari.

18/08/2023

Mana the first village of India which was the Last Village of India before 2022. I went to mana this month and there ar...

21/04/2022

अच्छे समय के इंतजार में आज के आनंद को मत भूलिए।
संस्कार, संस्कृति और परिवार को मत भूलिए।

राधे राधे।

कोरोना का कहर बढ़ना शुरू हो चुका है। इस बार नया वेरिएंट डेल्टा पिछले सभी वेरिएंट से बहुत अधिक संक्रामक है। अगले 3 महीने ...
01/07/2021

कोरोना का कहर बढ़ना शुरू हो चुका है। इस बार नया वेरिएंट डेल्टा पिछले सभी वेरिएंट से बहुत अधिक संक्रामक है। अगले 3 महीने में महामारी की हद तक कोरोना का कहर देखने को मिल सकता है।
इससे लड़ने का सिर्फ एक ही उपाय है, वैक्सीन लगवाएं।

06/05/2021

आपकी हताशा, निराशा, गुस्सा सब जायज है., इसमें कुछ गलत भी नहीं है , सब समझा जा सकता है. समर्थकों के पिटने के वीडियो हम सबके लिए ही किसी पार्टी के कार्यकर्ताओं के पिटने वाले वीडियो से ज्यादा एक विचारधारा से जुड़े लोगों की प्रताड़ना के दस्तावेज हैं, इसलिए इंची टेप से 56 इंच का नाप लेते रहना और ताने मारना भी समझा जा सकता है.

लेकिन एक सच्चाई ये भी है कि ३०३ सीटें लेकर आपकी यही पार्टी कश्मीर से लेकर रामजन्मभूमि तक आपको गौरान्वित करती रही, पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान में मार खा रहे हिन्दुओं/सिखों/जैनों/बौद्धों को पहली बार का से यकीन हुआ है कि आज का भारत उनके लिए भी खड़ा है.

लेकिन मामले में पेंच कहाँ से फंसा ,पेंच फंसा का लागू करने के दौरान मचे बवाल से, आप शायद भूल गए हों, लेकिन कैसे बंगाल में ही कैसे अचानक से बलवा भड़का, ट्रेनों में आगजनी हुई जो अंत में दिल्ली के शाहीन बाग़ में हिंसक प्रोटेस्ट में परिलक्षित हुई.

एक समाज के तौर पर आपके पास उस हिंसा का जवाब न बंगाल में था, न दिल्ली में था. इतना तक नहीं हम कर पाए कि दिल्ली में एक हिस्से को घेर कर शाहीन बाग़ से बड़ा मजमा इकठ्ठा कर सकें और पाकिस्तान, बांग्लादेश में प्रताड़ित हो रहे हिन्दू भाइयों के हक के लिए बनाये कानून का विरोध करने वालों के सामने पौरुष दिखा सकें. ये पौरुष सिर्फ उत्तर प्रदेश सरकार ही दिखा सकी लेकिन इसके बावजूद अयोध्या, मथुरा बनारस जैसे शहरों में पंचायत चुनावों में यही सरकार साफ़ हो गयी (इसपर बात कभी और)

फिर दिल्ली दंगे हुए, वहाँ भी देखा कि बिना सत्ता, बिना सरकार के कोई समाज सिर्फ अपने संसाधनों के बल पर कितना बड़ा बवाल आर्गनाइज्ड तरीके से मचा सकता है..और हम और आप बस ट्विटर पर ट्रेंड या हंगामा काट सकते हैं. वो अपने कट्टरपन्थियोंको ग्लोबल आइकन बना ले गए और कपिल मिश्रा बेचारा सड़क खाली करो कह कर ही आतंकी बना दिया गया.

ये कमियां हमारी कुछ Harsh रियलिटीज हैं, जिन्हें जानते सब हैं लेकिन सोशल मीडिया पर मानना कोई नहीं चाहता.

शाहीन बाग़ की गुंडागर्दी के बावजूद हम दिल्ली में शाहीन बाग़ के साथ खड़े होने वालों को चुनते हैं. ख़ैर केंद्र और राज्य के चुनावों में अंतर् होता है इसलिए इस पॉइंट का बहुत ज्यादा महत्त्व नहीं हैं, लेकिन फिर भी कहने लायक बात तो है ही.

शाहीन बाग़ ख़त्म होते ही कोरोना आ जाता है, फिर मजदूरों के पलायन से लेकर, गरीबी रेखा पर जीने वालों को फ्री में खाना, राशन, और राहत पैकेज पर काम शुरू हो जाता है. काम धंधे चौपट होने लगते हैं, ग्लोबल व्यापार ठप पड़ जाता है, डोमेस्टिक व्यापार आल टाइम लो हो जाता है. सरकार की आमदनी का बड़ा हिस्सा और कार्य का प्रमुख फोकस यही व्यवस्था बन जाती है..

इसी बीच चीन LAC पर भारत को चुनौती देता है और हालिया समय का सबसे मुंहतोड़ जवाब पाता है.

फिर पहले किसान नेता धरने पर बैठते हैं....और फिर किसानों की आढ़ में अलगावादी अरजातक तत्त्व २६ जनवरी को लाल किले पर आने वाले समय का ट्रेलर देके चले जाते हैं.

जैसे ही लगने लगा कि कोरोना से हम जीत गए हैं और राज्य अपने अपने स्तर पर कोरोना संभाल लेंगे वैसे ही कोरोना दूसरी वेव में ऐसी तबाही बन कर वापस आ जाता है कि हमारे अस्पताल, स्वास्थ्य, चिकत्सा व्यवस्था सब चरमरा जाती है ..

अब वर्तमान हालत ये है इकॉनमी को रिवाइव करना, काम धंधे पटरी पर लाना आज के दौर में सबसे बड़ा चैलेंज है , वो भी तब जब सेकण्ड वेव पीक पर है और थर्ड वेव की भविष्यवाणी अभी से एक्सपर्ट करने लगे हैं.

इकॉनमी में सबसे महत्वपूर्ण फैक्टर बाहर के देशों से आने वाला निवेश होगा, और वो निवेश उन्हीं देशों में आता है जिनकी इमेज ट्रांसपेरेंट accountable डेमोक्रेसी की हो.

उसी इमेज को हिट करने के लिए कभी ग्रेटा की टूल किट में भारत की चाय और योग इमेज को अटैक करने की बात होती है, तो कभी रिहाना और मिया खलीफा उस हमले का हिस्सा बनती हैं.

उसी कड़ी का एक हिस्सा है भारत को फासीवादी साबित करना, जिसका प्रयास सतत रूप से बाहरी, और भीतरी दोनों तरफ से बहुत महीन तरीके से चल रहा है , उसी कडी में कभी फ्रीडम हाउस भारत के लोकतंत्र पर टिपण्णी करता है तो कभी वीडेन इंस्टिट्यूट से टिपण्णी करवाई जाती है .

बाहर सक्रिय लॉबियों को बस एक मौका चाहिए जिस से वो साबित कर सकें कि भारत में फासीवाद आ चुका है और कॉर्पोरेट्स पर दवाब बना कर उनका भारत में इन्वेस्टमेंट रोकने की दिशा में बढ़ें.
ट्रम्प के बदलने से कुछ चीजें बदली हैं और ग्लोबल रिश्तों को वापस से री डिफाइन होने में थोड़ा समय लगेगा.

कोरोना पूरे विश्व के लिए ही UnPlanned घटना है और १३५ करोड़ आबादी में से मेजरटी को फ्री राशन पहुंचवाना अपने आप में मैराथन प्रयास है. दूसरी वेव से लड़ना है और तीसरी की तैयारी करनी है, लोगों का रोजगार सुनिश्चित करना है और ये भी सुनिचित करना है कि कोई भूख से न मरे.

साथ ही ये भी है कि आने वाले वक़्त में जल्द ही शाहीन बाग़ वाला मजमा भी वापस लगेगा, किसानों को अभी और भड़काया जाएगा, चीन भी अपनी हरकतें रिज्यूम करेगा, नक्सली भी फिर से कमर कसने लगे हैं और भी अन्य कई समूह जिनके बारे में चर्चा करना अभी सही नहीं होगा को जमीन पर उतारने की तैयारी होती दिख रही है..

बंगाल चुनाव के बाद जो घट रहा है वो निराशाजनक है, देश के लिए सेवा भाव रखने वालों लोगों का पिटना निराशाजनक है, और उसपर मोदी जी का एक ट्वीट तक न आना और भी निराशाजनक है..कुछ जगह से बंगाल में राष्ट्रपति शासन की मांग भी उठ रही है पर वो इमोशनल आउटबर्स्ट समझा जा सकता है.

ये ऐसा समय चल रहा है जब ३०३ सीटें हो, या ४०४..एक साथ सारे फ्रंट खुल के सामने आ रहे हैं..हमारे आत्मनिर्भर बनके लड़ने की गुंजाईश पर कोरोना हावी हो गया है...इसलिए बार बार जो बात कही जा रही है कि ३०३ सीट इस दिन के लिए नहीं दी थीं वो बेमानी है...हम युद्ध के बीच में हैं..और बीच युद्ध में विलाप नहीं किया जाता...ये युद्ध अभी लम्बा चलेगा....जिनको समझ आता है वो लड़ें..जिनको नहीं आ रहा वो खुश रहने के अपने विकल्प तलाश लें..क्यूंकि आजकल लाइक और कमेंट का स्कोप हर तरह की बात लिखने में है..

कोई जोर जबरदस्ती नहीं है कि जो लिखा है वो आप मान ही लें...लेकिन जो समझते हैं वो समझ जाएंगे..और इस नए सज रहे संग्राम में अपनी भूमिका खुद तलाश लेंगे...

बाकी जय राम जी की. 🙏

28/04/2021
25/02/2021

नई नवेली पिसावा नगर पंचायत अपने पहले चुनाव की खुशबू से महकने लगी है। कई चेहरे भी स्पष्ट रूप से सामने आ चुके हैं। कोई पैसे के दम पर, कोई जाति के आधार पर तो कोई युवा नए चेहरे के रूप में जनता के बीच पहुंचने लगे हैं। इस बीच एक वोटर के तौर पर आप सब की राय भी बहुत मायने रखती है। तो आप बताइए आप किसे चुनना पसंद करेंगे?
1. जो पैसे के दम वोट खरीदने की सोचे वो?
2. जो जाति और अपने प्रभाव के दम खड़ा है वो?
3. जो साधारण युवा नए चेहरे और बदलाव की गुंजाइश के साथ आपके बीच है वो?
कृपया कमेंट करके की अपनी राय जरूर बताएं।

नगर पंचायत द्वारा पुरानी पंचायत घर से पथवारी मार्ग तक सफाई कार्य किया गया। कृपया लाइक और शेयर जरुर करें।
21/01/2021

नगर पंचायत द्वारा पुरानी पंचायत घर से पथवारी मार्ग तक सफाई कार्य किया गया। कृपया लाइक और शेयर जरुर करें।

सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के बारे में जानें और उनका लाभ उठाएं। 🙏
16/01/2021

सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के बारे में जानें और उनका लाभ उठाएं। 🙏

उत्तरायण होते सूर्य की कृतज्ञ वंदना का पर्व मकर संक्रांति आप सब के लिए शुभ हो। आज के दिन का उत्सव देश भर में अलग-अलग नाम...
14/01/2021

उत्तरायण होते सूर्य की कृतज्ञ वंदना का पर्व मकर संक्रांति आप सब के लिए शुभ हो। आज के दिन का उत्सव देश भर में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। मकर संक्रांति, उत्तरायण, खिचड़ी, पोंगल, तिल संक्रांति, टुसू, माघ बिहु, सकट पर्व या कोई और नाम हो, उत्सवधर्मिता, प्रकृति की उपासना और सौहार्द का भाव इन सब में समान रूप से निहित है। आप सब में भी सूर्य की सात्विकता, ऊर्जा और तेज का संचार हो। शुभकामनाएँ। ❤️🙏☀️

अपनी जड़ों के साथ खड़ा एक इंसान अपनी जड़ों से कट चुके सैकड़ों इंसानो से मजबूत होता है|
08/01/2021

अपनी जड़ों के साथ खड़ा एक इंसान अपनी जड़ों से कट चुके सैकड़ों इंसानो से मजबूत होता है|

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