26/11/2015
(BCCI द्वारा पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलने के निर्णय का विरोध करती मेरी नई कविता) दिलीप राज पुरोहित डी. पी. बन्ना सहनशीलता के मुद्दे पर माना मोदी फसें हुए, पेच विपक्षी नेताओं के माना उनपर कसे हुए, माना सहिष्णुता का मसला आफत बनकर छाया है, दुश्मन से लड़ने की ताकत को कमज़ोर बनाया है, लेकिन ये क्या मोदी, तुमने डाल दिए हथियार सभी,भूल गए सरहद पर होते पाकिस्तानी वार सभी,बदनसीब भारत फिर से कातिल हाथों को चूमेगा, गेंद चिता पर उछलेगी लाशों पर बल्ला घूमेगा, हमें नही मंज़ूर कि दहशत से कोई समझौता हो, वार पीठ पर करने वालों को भोजन का न्योता हो, जब तक घर आँगन में बिखरी निर्दोषों की लाशें हैं, तब तक अली गुलामों की सारी गज़लें बकवासें हैं, तब तक कला और तहज़ीबी रिश्ते पक्के फ़र्ज़ी हैं, है धोखा क्रिकेट का बल्ला चौके छक्के फ़र्ज़ी हैं,क्यों इतनी मजबूरी आखिर, क्यों उनके संग खेलें हम, पिच पर हाथ मिलाओ तुम,सरहद पर गोली झेलें हम, शर्म करो बीसीसीआई,घूँट ज़हर का पीने पर, मत गाड़ो स्टंप आज तुम हेमराज के सीने पर,शहादतों की ख़ामोशी से,जश्न निकाला जाएगा,विधवाओं की छाती पर अब टॉस उछाला जायेगा,इधर शहीद पिता से बिछड़े बचपन कांपे जायेंगे,उधर गेंद बल्ले से रुपये करोड़ों छापे जाएंगे,पीसीबी का रिक्त खजाना पुनः भराया जायेगा,और उसी के दम पर भारत को दहलाया जायेगा,पिछली सरकारों के जैसा दांत फाड़ना बंद करो,आना-जाना खाना-पीना,तब तक बिलकुल बंद करो,जब तक सीमा पर दुश्मन के धोखे-हमले जारी हैं,जब तक उनके मंसूबो में भारत से गद्दारी है,जब तक हाफ़िज़ ज़िंदा बैठा,कोई मेल नही होगा,गिरगिट की संतानों से किरकिट का खेल नही होगा,