28/05/2026
पटना हाईकोर्ट के भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ( CPI) से जुड़े वकीलों की पहलकदमी पर आज कोर्ट परिसर में अधिवक्ताओं को “कॉकरोच” कहे के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया।
जिस प्रकार 'बार काउंसिल ऑफ इंडिया' के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने यह दावा किया कि "30 से 40 प्रतिशत अधिवक्ता फर्जी हैं।"
वह सीधे तौर पर उनके गैर-जिम्मेदाराना रवैये को दर्शाता है। यदि इतनी बड़ी संख्या में अधिवक्ता फर्जी हैं, तो वर्ष 2012 से अध्यक्ष पद पर रहते हुए उन्होंने इस दिशा में क्या कार्रवाई की? यह उनकी कार्यक्षमता पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है।
सवाल यह भी है कि बिना किसी ठोस डेटा और आंकड़ों के आधार पर इस प्रकार का बयान देना न्यायपालिका और अधिवक्ताओं के प्रति समाज में जो विश्वास है, उसे कमजोर करने और तोड़ने का एक कुत्सित प्रयास है।
इस विरोध-प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए उच्च न्यायालय के वरीय अधिवक्ता योगेशचंद्र वर्मा ने कहा " यह पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना बयान है और हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की बातें नहीं की जानी चाहिए, जिससे समाज में वकीलों और न्यायपालिका के प्रति लोगों का भरोसा कम हो या समाप्त हो। यह न्यायपालिका और अधिवक्ताओं को समाज से दूर करने का प्रयास है, और इसी के विरोध में हम अपनी नाराज़गी दर्ज कराने के लिए यह प्रदर्शन कर रहे हैं। हम किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन अधिवक्ता समाज को जिस प्रकार बदनाम करने का प्रयास किया गया है, उसकी हम कड़ी निंदा करते हैं। "
इस प्रदर्शन में वरीय अधिवक्ता एवं एडवोकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश चंद्र वर्मा जी के नेतृत्व में इंडियन एसोसिएशन ऑफ लॉयर्स के महासचिव अधिवक्ता उदय प्रताप सिंह, इंडियन एसोसिएशन ऑफ लॉयर्स के वरिष्ठ नेता अधिवक्ता रामजीवन बाबू, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन के राज्य अध्यक्ष सुधीर कुमार, पटना उच्च न्यायालय के अधिवक्ता विजेता कुमारी, अधिवक्ता रिचा मोहन, अधिवक्ता कुमार संदीप, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन के पटना जिला सचिव मीर सैफ अली, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन के राज्य नेता तौसीफ आलम, अधिवक्ता सागर सुमन, अधिवक्ता साकिब अयाज, अधिवक्ता मणि लाल प्रसाद, अधिवक्ता मंजू शर्मा सहित अनेक अधिवक्ता एवं समर्थक शामिल हुए।