11/12/2022
कहते हैं चेस राजा-महाराजाओं का खेल है, इसकी उत्पत्ति भी स्वयं भारत में हुई है, लेकिन शायद ही किसी ने इसे इतनी गंभीरता और जूनून से लिया हो कि इसके जरिए अपनी पहचान विश्व स्तर पर बना पाए।
हाँ, हम एक नाम जानते हैं, विश्वनाथन आनंद!
विश्वनाथन आनंद का जन्म 11 दिसंबर 1969 को तमिलनाडु के एक शहर मयीलाडुतरै में हुआ था। आनंद के पिता विश्वनाथन कृष्णमूर्ति इंडियन रेलवे में नौकरी करते थे। माँ को चेस खेलने में रुचि थी, वह अच्छा खेलती भी थीं, लेकिन उन्हें कभी अपना टैलेंट दिखाने का मौका नहीं मिला। माँ की यही रूचि बेटे के नाम का कारण बनेगी, यह उस वक़्त आखिर किसको पता था। आनंद को उम्र की पहली सीख चेस के रूप में मिली। 6 साल की उम्र में पहली बार शह-मात दे रहे थे, फिर तो आनंद को इस खेल का ऐसा चस्का लगा कि छूटा ही नहीं।
जब उनके पिता को फिलीपींस में काम करने का ऑफ़र मिला, तब आठ साल की उम्र में आनंद मनीला पहुंचे। वहां उनकी चेस की क्लास लगी। उनकी माँ रोज उनको छोड़ने जाती थी और क्लास खत्म होने तक क्लब के बाहर इंतज़ार करतीं। माँ का यही परिश्रम आनंद के लिए प्रेरणा बना।
उस वक़्त मनीला में टीवी पर चेस का एक प्रोग्राम आता था। उस प्रोग्राम में चेस की बारीकियां बताई जाती थीं और अंत में एक कॉन्टेस्ट होता था। आनंद उस कॉन्टेस्ट में अपनी एंट्री भेजते और जीत भी जाते थे। हर बार प्राइज़ में चेस की एक किताब मिलती थी। ऐसा 8-9 बार हुआ, फिर एक दिन उन्हें स्टूडियो से बुलावा आया।
उन्होंने कहा, "यहां से जितनी किताबें ले जा सकते हो, ले जाओ। लेकिन प्लीज, आज के बाद एंट्री मत भेजना। हमें पता है कि तुम्हारे अलावा कोई और ये शो नहीं देखता है।"
एक इंटरव्यू में आनंद ने एक दिलचस्प किस्सा बताया था, यह किस्सा तब का है जब वह लोगों के बीच प्रचलित होने लगे थे।
वह एक बार ट्रेन में सफ़र कर रहे थे। आमने सामने बैठे पैसेंजर्स के बीच बातें चल रही थी। पास बैठे शख्स ने उनसे पूछा, बेटा, तुम करते क्या हो?
आनंद ने कहा, मैं चेस खेलता हूँ।
उस व्यक्ति ने सवाल दुहराया, वह सब तो ठीक है, लेकिन तुम करते क्या हो?
आनंद ने फिर जवाब दिया, ‘मैं रेगुलर चेस खेलता हूँ।’
उस आदमी ने कहा, ‘बेटा, एक सलाह देता हूँ। अगर तुम विश्वनाथन आनंद नहीं हो, तो तुम्हें कोई ढंग का काम करना चाहिए।’
विश्वनाथन आनंद पांच बार वर्ल्ड चेस चैंपियनशिप का खिताब जीत चुके हैं, लगातार 21 महीनों तक वर्ल्ड चेस रैंकिंग में पहले स्थान पर रह चुके हैं। इसके अलावा उनके खाते में कई फर्स्ट का रिकॉर्ड भी दर्ज है। वह देश के पहले ग्रैंडमास्टर हैं। पहला राजीव गांधी खेल रत्न अवॉर्ड भी सबसे पहले विश्वनाथन आनंद को दिया गया था, 2007 में उन्हें देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म विभूषण’ से नवाजा गया।
इतनी उपलब्धियों को देखकर तो मन में बस एक बात आती है कि भारत में अगर चेस का दूसरा नाम विश्वनाथन आनंद कहा जाए तो गलत नहीं होगा।
जन्मदिन पर ढेरों बधाइयाँ !
तस्वीर : अपनी माँ के साथ विश्वनाथन आनंद चेस खेलते हुए।