हे हिन्दुओ तुम एक बार अपने अतीत पर दृष्टिपात करो और पुन: वर्तमान को निहारो| फिर देखो की क्या दृष्टिगोचर हो रहा है ? एशिया में अखिल इस्लाम संघ , यूरोप में इसाई और राजनितिक संघ अफ्रीका तथा अमेरिका में नीग्रो जाती का संघ बन रहा है| इस के बाद हिन्दुओ, तुम भी विचार करो की क्या तुम्हारा भविष्य इसी हिन्दू देश के साथ बंधा हुआ है या नहीं? और अंततः क्या इस हिन्दू देश का भविष्य तुम हिन्दुओ की ही शक्ति पर अवल
म्बित नही है?हम लोग आज जी भरकर ऐसा प्रयास कर रहे है तथा यह प्रयास करना हमारा कर्तव्य है कि हम देश में निवास करने वाले हिन्दुओ, मुसलमानों, ईसाईयों और यहूदियो में यह पुनीत भाव जाग्रत करे कि हम सब सर्वप्रथम हिंदुस्थानी है और तदुपरान्त कुछ और| इस दिशा में अब तक भारत ने जो कुछ भी प्रगति की हो , किन्तु एक तथ्य तो सुस्पष्ट ही है जिसको हम विस्मृत नही कर सकते|वह यह तथ्य है हिन्दुस्थान हो अथवा विश्व का कोई अन्य राष्ट्र , उसका कोई अधिष्ठान और अधर भूमि होनी आवश्यक है जिसपर वः खड़ा हो, वह आधार भूमि यह है कि किसी राष्ट्र की शक्ति उन्ही नागरिकों में समाहित होती है जिनके पारस्परिक हित इतिहास और सद अभिलाषाएँ उस राष्ट्र के हित के साथ ही संलग्न होती है| वस्तुतः ये ही वे लोग है जिन्हें हम उस राष्ट्र के आधार – स्तम्भ की संज्ञा दे सकते है| इस तथ्य के स्पष्टीकरण हेतु हम तुर्की का उदाहारण ले सकते है| राज्क्रान्ति के पश्चात् युवा तुर्कों को अपनी संसद और सामरिक संस्थाओ को पूर्ण धर्म निरपेक्ष रूप देने हेतु उन्हें ईसाईयों और अर्मिनियो के लिय भी खोल देने पड़े थे| उन्होंने इनको भी अपने राष्ट्र का अविभाज्य अंग स्वीकार कर लिया था | किन्तु जब तुर्की और साइबेरिया में युद्ध हुआ तो ईसाईयों से अनेक लोग शत्रु पक्ष से जा कर मिलगए| क्योकि राजनैतिक तथा धार्मिक दृष्टि से वे तुर्की की अपेक्षा साइबेरिया के सन्निकट थे | अब दूसरा उदाहरण अमेरिका का लेते है | जब जर्मन युद्ध आरम्भ हुआ तो जर्मन वंश के अमेरिकी भी अमेरिका से निष्क्रमण करने लगे और अमेरिका के लिए यह स्थिति संकट प्रद स्थिति के रूप में उपस्थित हुई| आज भी यह तथ्य सुस्पष्ट है की अमेरिकावासी नीग्रो अपने आप को अमेरिकावासी नीग्रो जन के जितना समीप अनुभव करते है वे अपने आपको अन्य अमरीकावासी के निकट नहीं समझते| अत: अमरीका का भाग्य वहाँ के आंग्ल सैक्सन नागरिको के साथ ही बंधा हुआ है|ऐसी ही स्थिति हिन्दुओ की भी है | उनका भुत , वर्तमान और भविष्य तीनो ही हिन्दुस्थान के साथ अविभाज्य रूप से बंधे है | यही देश उनकी मातृभूमि , पितृभूमि, अवतार भूमि तथा पूण्य भूमि है| अत: हिन्दू बंधुओ, भारतीय राष्ट्रीयता के नाते भी तुम्हे अपनी हिन्दू राष्ट्रीयता को सुदृढ़ और सुसंगठित करना ही होगा| अपने अहिंदू बंधुओ अथवा विश्व के अन्य किसी प्राणी को किशी प्रकार का कष्ट पहुचाने हेतु नहीं अपितु इसलिए की आज विश्व में जो विभिन्न संघ और वाद प्रभावी हो रहे है , उनमे से किसी को भी हम पर आक्रान्ता बनकर चढ़ दौड़ने का दुस्साहस न कर सके