05/09/2026
“यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥
परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्।
धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे॥”
भगवान श्रीकृष्ण का जीवन हमें सिखाता है कि अन्याय और अधर्म के सामने मौन रहना नहीं, बल्कि सत्य और धर्म के पक्ष में साहस के साथ खड़ा होना ही सच्चा कर्तव्य है।
जब समाज में अहंकार, स्वार्थ, अनीति और अराजकता बढ़ती है, तब परिवर्तन की शुरुआत स्वयं से करनी होती है। अपने भीतर के कंस रूपी विकारों का अंत कर सत्य, सेवा, समर्पण और कर्मयोग को जीवन का आधार बनाना ही श्रीकृष्ण के मार्ग पर चलना है।
राजनीति केवल सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि जनसेवा, न्याय, सुशासन और समाज के अंतिम व्यक्ति के सम्मान एवं अधिकार की रक्षा का संकल्प है।
आइए, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर संकल्प लें कि अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाएंगे, सकारात्मक परिवर्तन के सहभागी बनेंगे और मां भारती की सेवा एवं जनकल्याण के लिए सदैव समर्पित रहेंगे।
जब नीयत में सेवा, कर्म में समर्पण और नेतृत्व में सत्य हो, तो कोई भी अधर्म समाज की प्रगति को रोक नहीं सकता।
“जब-जब होइ धरम कै हानी।
बाढ़हिं असुर अधम अभिमानी॥
करहिं अनीति जाइ नहिं बरनी।
सीदहिं बिप्र धेनु सुर धरनी॥
तब-तब प्रभु धरि बिबिध सरीरा।
हरहिं कृपानिधि सज्जन पीरा॥”
जय श्री राधे कृष्ण, जय सियाराम! 🙏🚩
:-विजय कुमार सिन्हा