Ganga Flood Control Commission

Ganga Flood Control Commission Ganga Flood Control Commission (GFCC), a subordinate office of Ministry of Jal Shakti, with its head

31/07/2026

"Quiz"

मध्य प्रदेश की कौन-सी नदी पश्चिम दिशा में बहकर अरब सागर में मिलती है?

कॉमेंट में बताएँ अपना जवाब .....

31/07/2026

हर सप्ताह की तरह इस रविवार भी आइए, माँ यमुना की सेवा में अपना एक घंटा समर्पित करें।

'एक दिन, एक घंटा, एक साथ' के संकल्प के साथ जुड़िए और श्रमदान कर स्वच्छ एवं निर्मल यमुना के निर्माण में अपना योगदान दीजिए।

आपकी छोटी-सी भागीदारी, एक बड़े परिवर्तन की शुरुआत बन सकती है।

📍 आईटीओ छठ घाट, नई दिल्ली
📅 2 अगस्त 2026
🕗 प्रातः 8:00 बजे से 9:00 बजे तक





C R Paatil Rekha Gupta Parvesh Sahib Singh Ministry of Jal Shakti, Department of Water Resources, RD & GR Ministry of Environment, Forest & Climate Change, Government of India Swachh Bharat Mission - Urban Press Information Bureau - PIB, Government of India

31/07/2026
31/07/2026

पुआल जलाना किसान का सबसे महँगा "मुफ्त" काम है। दो मिनट की आग में वो परत राख हो जाती है जो मिट्टी को पूरे साल बचाती है।

उसी पुआल को खेत में बिछा दीजिए। यही पलवार है, यही मल्चिंग।
फिर एक ही बारिश दोनों खेतों का फर्क खुद बता देती है। बिना पलवार वाले खेत की ऊपरी मिट्टी पानी के साथ बह जाती है, नमी धूप में उड़ जाती है, खरपतवार बेकाबू हो जाते हैं। पलवार वाले खेत में मिट्टी अपनी जगह टिकी रहती है, नमी हफ्तों बनी रहती है, सिंचाई का अंतराल अपने आप बढ़ जाता है।
एक पुआल, तीन फायदे। मिट्टी की नमी, खरपतवार पर काबू, ऊपरी परत की सुरक्षा।
जलाने से धुआँ मिलता है, बिछाने से अगली फसल।

31/07/2026
31/07/2026
31/07/2026

बारिश की हर बूंद अपने साथ जीवन की संभावना लेकर आती है।

जब यह पानी जमीन में उतरता है, तो भूजल बढ़ता है, कुएँ भरते हैं और खेतों को नई हरियाली मिलती है।

इसलिए बारिश को केवल गिरने न दें—उसे सहेजें और जमीन तक पहुँचने का रास्ता दें।



Ministry of Jal Shakti, Department of Water Resources, RD & GR MyGovIndia All India Radio News Press Information Bureau - PIB, Government of India Ministry of Environment, Forest & Climate Change, Government of India

31/07/2026
29/07/2026

यमुना का प्राकृतिक संसार 🌿

बुरांश।
वैज्ञानिक नाम: Rhododendron arboreum
कुल (Family): Ericaceae
स्थानीय नाम: बुरांश, बुरांस (Rhododendron)

हिमालय के मध्य और ऊँचे पर्वतीय क्षेत्रों में पाया जाने वाला बुरांश सामान्यतः लगभग 1,500 से 3,600 मीटर की ऊँचाई तक उगता है। वसंत ऋतु में इसके चमकीले लाल फूल पूरे पर्वतीय वन क्षेत्र को रंगीन बना देते हैं, जिससे यह हिमालय के सबसे आकर्षक वृक्षों में से एक माना जाता है।

बुरांश के फूलों से पारंपरिक रूप से शरबत और स्थानीय पेय बनाए जाते हैं। आयुर्वेद और लोक चिकित्सा में भी इसके फूलों का उल्लेख मिलता है। यह वृक्ष मधुमक्खियों, तितलियों तथा अन्य परागण करने वाले जीवों के लिए भोजन (मधुरस और पराग) का महत्वपूर्ण स्रोत है, जिससे पर्वतीय जैव विविधता को सहारा मिलता है।

यमुना के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में बुरांश जैसे वृक्ष जैव विविधता को बनाए रखने, अनेक पक्षियों, कीटों तथा अन्य वन्यजीवों को भोजन एवं आश्रय उपलब्ध कराने तथा हिमालयी वन पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

Address

1st Floor, Ganga Bhawan, Amarnath Path, Adalatganj
Patna
800001

Opening Hours

Monday 9:30am - 6pm
Tuesday 9:30am - 6pm
Wednesday 9:30am - 6pm
Thursday 9:30am - 6pm
Friday 9:30am - 6pm

Telephone

+916122215222

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