15/03/2026
तेजस्वी यादव की दाद देनी होगी। बंदा आखिरी तक लड़ता है। राज्यसभा चुनाव में शक्तिशाली सत्ताधारी एनडीए को मात्र 3 वोट चाहिए थे जो वो बीएसपी और AIMIM को abstain कराकर आसानी से जीत सकती थी लेकिन तेजस्वी ने लड़ना उचित समझा और AD सिंह को रिंग में उतार दिया। ऐसे ही नीतीश ने जनवरी 2024 में पलटी मारी थी तब तेजस्वी ने विश्वास मत में लगभग सरकार गिरा दी थी वो तो पुलिस, प्रशासन और दो-तीन आस्तीन के सांपों और नमक हरामों ने जमीर बेच दिया था।
अगर एनडीए राज्यसभा की पांचों सीटें जीत ही रही है तो इतनी बेचैनी क्यों है? एनडीए के अंदर भोज पर भोज मीटिंग पर मीटिंग सम्राट चौधरी उपेंद्र कुशवाहा और अब विजय चौधरी के आवास पर भोज, फिर हर पार्टी की अलग अलग दफ्तरों में मीटिंग महज 3 वोट के जुगाड के लिए इतनी कसरत दर कसरत खून पानी एक किया जा रहा पहले पांचवें उम्मीदवार उपेंद्र कुशवाहा के स्थान पर और शिवेश राम को चौथे स्थान से पांचवां उम्मीदवार फिर भी पांचवां उम्मीदवार अबतक संकट में थैली के प्रयोग की भी चर्चा है।
विपक्षी माननीयों की ऊंची बोली भी लगाई जा रही दूसरी तरफ महागठबंधन या कहे राजद शांत खामोश निश्चिंत भाव में अपने उम्मीदवार एडी सिंह के जीत के लिए ज्यादा व्याकुल नहीं बल्कि शांत बैठा है। लालू-तेजस्वी ने पसीना निकलवा दिया है ही, वैसे उनके लिए मुश्किल था लेकिन हार नहीं मानी है।
ऊंट किस करवट बैठेगा यह तो चुनाव के बाद ही मालूम होगा फिलहाल राजद कुल-कुल है तो भाजपा टेंशन में फूल।