10/10/2022
Ops लागू होने और तीव्र आंदोलन से लगी मिर्ची से आहत लोगों द्वारा उठाए गए प्रश्न और हमारे उत्तर...
प्रश्न _ पुरानी पेंशन देश पर भार है।
उत्तर _ सुनिए, मैं बताता हूं देश की अर्थव्यवस्था पर क्या क्या भार है_ राज्य सभा भार है, विधान परिषदें भार हैं, अनेक आयोग भार हैं, अनेक परिषदें भार हैं। इन पर भी हर साल हजारों करोड़ बरबाद होते हैं?
प्रश्न _ पुरानी पेंशन मुफ्त की रेवड़ी है।
उत्तर _ नहीं, वह कर्मियों का अधिकार है। मुफ्त की रेवड़ी वह है जिस पूंजीपति की आय हर साल दुगनी हो रही है परंतु उसका अरबों का लोन माफ कर दिया जाता है और यह बार बार किया जाता है। अपनी सत्ता को बचाने के लिए भी आजकल चुनावी रेवड़ी भी बांटी जा रही।
प्रश्न _ पुरानी पेंशन देश पर वित्तीय बोझ है।
उत्तर _ क्यों, जब करोड़पति नेता 4,5 पेंशन लेते हैं तो आपके मुंह को लकवा मार जाता है असली बोझ वह है। फालतू के बड़े खर्चीले निर्माण व आयोजनों से देश पर वित्तीय बोझ नहीं पड़ता है ?
प्रश्न _ पुरानी पेंशन देना आर्थिक रूप से एक जोखिमपूर्ण नीति है।
उत्तर _ पुरानी पेंशन नहीं Nps ही जोखिमपूर्ण है क्योंकि वह बाजार आधारित पेंशन है। लोग देख रहे है कि किस तरह डूब रहा देश व कर्मियों का पैसा और पूंजीपति मौज कर रहा।
प्रश्न _ पुरानी पेंशन का सामाजिक न्याय या सुरक्षा के साथ कोई संबंध नहीं है।
उत्तर _ सामाजिक न्याय पता भी है क्या ? तो सुनो ! हर किसी के पास इतने न्यूनतम संसाधन हो कि वे ‘उत्तम जीवन’ की अपनी संकल्पना को धरती पर उतार पाएँ। क्या Nps कटौती से कोई ऐसा प्रयोजन सिद्ध हो रहा है ? नही न... बल्कि उल्टे पूंजीवाद अपने चरमोत्कर्ष पर जा रहा है। उल्टे यह वर्ग अंतर और बढ़ता जा रहा है। उल्टे और असुरक्षा पांव फैलाती जा रही है। साथ ही कर्मियों की पेंशन बाजार आधारित होने के कारण किसी तरह की कोई सामाजिक सुरक्षा भी नही है। कर्मचारी 400, 700, 1300, 1800, 2700 पेंशन लेकर दर दर की ठोकरें खा रहा है।
#पुरानी_पेंशन_जिंदाबाद