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25/08/2021

पटना के गाय घाट स्थित महिला महाविद्यालय गुलजारबाग में इंटर में उर्दू विषय लेने पर रोक लगाए जा रहा है, बिहार में दूसरी भाषा का दर्जा प्राप्त उर्दू भाषा के साथ सौतेलापन क्यों किया जा रहा है।

After meeting with PM on  , AIMIM legislature party leader akthrul iman & Bihar CM Nitish Kumar ji is briefing media out...
23/08/2021

After meeting with PM on , AIMIM legislature party leader akthrul iman & Bihar CM Nitish Kumar ji is briefing media outside PMO. Akthrul iman said that our delegation met the PM today not only for caste census in the Bihar but in the entire country.

एएमयू किशनगंज सेंटर के कैंपस को बनाने की नहीं की गई कोई कोशिश तो पूरे सीमांचल में एक बार फिर से यूनिवर्सिटी को ज़मीन पर ...
20/08/2021

एएमयू किशनगंज सेंटर के कैंपस को बनाने की नहीं की गई कोई कोशिश तो पूरे सीमांचल में एक बार फिर से यूनिवर्सिटी को ज़मीन पर उतारने के लिए एम आई एम करेगा आंदोलन।

AMU Kishanganj Centre- पिछले 8 सालों से एएमयू किशनगंज का सेंटर अल्पसंख्यक छात्रावास में चल रहा है। विश्वविद्यालय के मामले में के...

08/08/2021

एम आई एम के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरूल इमान का कहना है कि राज्य सरकार की लापरवाही के कारण एएमयू किशनगंज का मामला सुर्खियों में नही आ रहा है। अख्तरुल इमान ने नीतीश कुमार से पहल करने की मांग की है वहीं सबके साथ सब का विकास का दावा करने वाली केंद्र सरकार को भी एएमयू के मामले पर खामोशी तोड़ने की अपील की है। अख्तरुल इमान का कहना है कि सरकार की लापरवाही के कारण अब तक एएमयू का कैंपस नही बन सका है।

02/08/2021

बिहार के अल्पसंख्यक संस्थाओं के मसले को हुकूमत फौरी तौर पर हल करे। राज्य का अकेला सरकारी मदरसा, मदरसा इस्लामिया शमसुल होदा में वर्षों से खाली शिक्षको के ओहदों पर नियुक्ति की जाए, उर्दू अकादमी का गढ़न किया जाए। अल्पसंख्यक संस्थाओं की खस्ताहाली को दूर करने के लिए सरकार को गंभीर क़दम उठाना चाहिए-- अख्तरुल इमान (AIMIM बिहार प्रदेश अध्यक्ष सह अमौर विधायक)



माननीय लोकसभा अध्यक्ष श्री Om Birla जी के द्वारा सांसद जनाब सैय्यद Imtiaz jaleel सर को भारत के नामचीन विश्वविद्यालय Jami...
29/07/2021

माननीय लोकसभा अध्यक्ष श्री Om Birla जी के द्वारा सांसद जनाब सैय्यद Imtiaz jaleel सर को भारत के नामचीन विश्वविद्यालय Jamia Millia Islamia, New Delhi के कोर्ट मेंबर नियुक्त होने पर बहुत बहुत मुबारकबाद...!💐💐

28/07/2021
26/07/2021
14/07/2021

केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा NEET और अन्य परीक्षाओं में आरक्षण विरोधी नीति के ख़िलाफ़ सभी दलों के बहुजन छात्र युवा नेताओ को बहुजन छात्र छात्राओं को अपने अधिकारो की लड़ाई के लिए एकजुट होना होगा।

पटना विश्वविद्यालय के सभी छात्रावासों को छात्र छात्राओं के लिए खोल दिया गया है । आप सभी छात्र छात्रायें अपने छात्रावास म...
12/07/2021

पटना विश्वविद्यालय के सभी छात्रावासों को छात्र छात्राओं के लिए खोल दिया गया है । आप सभी छात्र छात्रायें अपने छात्रावास में रह सकते है।

शहीद पीर अली खां... 1857 क्रांति का योद्धा, जिससे खौफ खाते थे अंग्रेजपीर अली खां के बारे में जो सबसे चौंकाने वाली बात पत...
07/07/2021

शहीद पीर अली खां... 1857 क्रांति का योद्धा, जिससे खौफ खाते थे अंग्रेज
पीर अली खां के बारे में जो सबसे चौंकाने वाली बात पता चली वो ये कि अंग्रेजी हुकूमत उनसे इतना खौफ खाती थी कि उन्हें गिरफ्तार करने के दो दिन के अंदर बिना कोई मुकदमा चलाए उन्हें सरेआम फांसी दे दी गई.
शहीद पीर अली खां... 1857 क्रांति का योद्धा, जिससे खौफ खाते थे अंग्रेज

1857 की क्रांति ने देश की आजादी के रास्ते खोल दिए थे. हजारों लोग तब भारत को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद कराने की जंग में कूद पड़े थे. इतिहास की किताबों में आज भी ऐसे नायकों की शौर्य गाथा मौजूद है, लेकिन उस लड़ाई के कुछ ऐसे हीरो भी थे, जिनके बारे में ज्यादा कुछ नहीं लिखा गया.आज हम ऐसे ही एक जांबाज सिपाही की कहानी लाए है। आजादी के दीवाने इस नायक का नाम शहीद पीर अली खां था.

महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, मंगल पांडे और पीर अली खां. आजादी के सिपाहियों की फेहरिस्त में एक नाम सुनकर आप चौंक गए होंगे क्योंकि ये वो क्रांतिकारी हैं, जिनका जिक्र इतिहास की किताबों में भी नहीं मिलता. देश के लिए उनकी कुर्बानी, उनकी शौर्यगाथा वक्त के पन्नों में कहीं खोकर रह गए हैं नाम है शहीद पीर अली खां.

बिहार की राजधानी पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान से सटा एक छोटा सा पार्क, शहर से हवाई अड्डे को जोड़ने वाली एक सड़क और पटना का एक मोहल्ला. इन सभी जगहों पर शहीद पीर अली खां का नाम दर्ज है. लेकिन इस पार्क के सामने से, या फिर इन सड़कों से हर रोज गुजरने वाले ज्यादातर लोग इस नाम से अनजान हैं. जो लोग ये जानते हैं कि पीर अली खां आजादी की लड़ाई के सिपाही थे, वो भी इस बात से बेखबर हैं कि आखिर पीर अली ने आजादी की किस लड़ाई में हिस्सा लिया था.

1857 से शुरू हुआ स्वतंत्रता संग्राम 1947 तक चला, लेकिन अंग्रेजों के खिलाफ किसी जंग में पीर अली खां का नाम नहीं मिलता. आखिर क्यों। इसी का जवाब तलास करने की हमने कोसिस की है।

इतिहास का ग़ुमनाम योद्धा: शहीद पीर अली खां

पीर अली खां का जन्म 1820 में आजमगढ़ के एक गांव मोहम्मदपुर में हुआ था. किशोरावस्था में वो घर से भागकर पटना आ गए थे. पटना के जमींदार नवाब मीर अब्दुल्ला ने उनकी परवरिश की और पढ़ाया-लिखाया. बड़े होने पर नवाब साहब की मदद से उन्होंने किताबों की एक दुकान खोल ली. आगे चलकर वही दुकान बिहार के क्रांतिकारियों के जमावड़े का अहम ठिकाना बन गया. क्रांतिकारियों के सम्पर्क में आने के बाद पीर अली खां दुकान पर क्रांतिकारी साहित्य मंगाकर रखने लगे.

पीर अली ने अंग्रेजों की गुलामी से देश को आज़ाद कराने की मुहिम में अपने हिस्से का योगदान देना अपने जीवन का मकसद बना लिया. उनका मानना था कि गुलामी की जिंदगी से मौत बेहतर होती. समय के साथ उनका दिल्ली और अन्य स्थानों के क्रांतिकारियों के साथ संपर्क में आए. दिल्ली के प्रमुख क्रांतिकारियों में एक अजीमुल्लाह खान उनके आदर्श थे, जिनके सुझाव और दिशा निर्देश पर वो चलने लगे.

पटना गांधी संग्रहालय के अध्यक्ष रजी अहमद के मुताबिक 1857 की क्रांति के वक्त पीर अली खां घूम-घूमकर लोगों में आजादी की लड़ाई में हिस्सा लेने के लिए जागरूक करने लगे. 3 जुलाई 1857... ये वो तारीख है जब पीर अली ने आजादी के आंदोलन को धार देते हुए अंग्रेज हुकूमत को सीधी चुनौती दी, और उसकी गूंज इंग्लैंड तक महसूस की गई.

तब पीर अली की अगुवाई में कई टुकड़ियों में बंटकर इन हथियारबंद युवाओं ने पटना के गुलजार बाग में अंग्रेजों के एक प्रशासनिक भवन को चारों तरफ से घेर लिया. यह वही भवन था जहां से प्रदेश के लोगों की क्रांतिकारी गतिविधियों पर नजर रखी जाती थी और उनपर कार्रवाई की रूपरेखा तैयार होती थी.

वहां तत्कालीन कमिश्नर विलियम टेलर ने भीड़ पर अंधाधुंध गोलियां चलवाईं. कई क्रांतिकारी मौके पर ही शहीद हो गए. लेकिन पीर अली खां और कुछ क्रांतिकारी वहां से बच निकलने में कामयाब हो गए.

लेकिन 5 जुलाई 1857 को पीर अली को 14 साथियों के साथ गिरफ्तार कर लिया गया. पीर अली पर बगावत का आरोप लगाकर उन्हें यातनाएं दी गईं.

7 जुलाई 1857 को पीर अली को उनके कई साथियों के साथ फांसी पर लटका दिया गया. अंग्रेज अधिकारी पीर अली से उनके सभी साथियों के नाम जानना चाहते थे, लेकिन पीर अली ने देश से गद्दारी करने के बजाय मौत को गले लगाना बेहतर समझा.

फांसी के फंदे पर झूलने के पहले पीर अली के आखिरी शब्द थे 'तुम हमें फांसी पर लटका सकते हो, लेकिन हमारे आदर्श की हत्या नहीं कर सकते. मैं मरूँगा तो मेरे खून से लाखों बहादुर पैदा होंगे जो एक न एक दिन तुम्हारे ज़ुल्म का खात्मा कर देंगे.'
देश की आजादी के लिए शहीद होने वाले पीर अली खां ने क्रांति की ऐसी अलख जगाई जो अगले सौ सालों तक धधकती रही. उनकी कुर्बानी क्रांतिकारियों के लिए प्रेरणा बन गई और उनकी कहानी मौजूदा पीढ़ी के लिए भी देशभक्ति का नायाब सबक

30/06/2021

पटना में STET अभ्यर्थियों को पुलिस द्वारा बीच सड़क पर दौड़ा दौड़ा कर पीटे जाने की घटना शर्मनाक है।
आखिर ये आतंकवादी / अपराधी तो नही हैं ?
मुख्यमंत्री संज्ञान लें,,,

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