05/09/2021
औरत जब तक तंग रहेगी!
जंग रहेगी जंग रहेगी!!
पितृसत्ता - पूंजीवाद गठबंधन मुर्दाबाद!!
दिल्ली की देश की राजधानी रूप में पहचान तो है, लेकिन आज यही दिल्ली एक बलात्कारी राजधानी होने का नया कीर्तिमान स्थापित कर रही है। बड़े शर्म की बात है कि सत्ता पक्ष, प्रशासन, मुख्य धारा की मीडिया, संवेदनाशून्य लोग इस घिनौने कृत्य के मूक साक्षी बन रहे हैं। और जहां कहीं ऐसे घिनौने, अमानवीय अपराधों के खिलाफ आवाज उठती है, उसे किसी न किसी तरह दबाया, छिपाया जाता है ।
दिल्ली में साबिया सैफी (राबिया सैफी) के साथ हुई बलात्कार और निर्मम हत्या केवल एक घटना मात्र नहीं है बल्कि यह समस्त महिलाओं की सुरक्षा और जीवन जीने के अधिकार का सवाल है। दिल्ली के संगम विहार की रहने वाली राबिया सिविल डिफेंस में काम करती थी। सिविल डिफेंस में कार्य करते हुए उसे हरियाणा, फरीदाबाद के सूरजकुंड पाली रोड पर ले जाया गया और बलात्कार करने के बाद गला रेत कर निर्मम तरीके से उसकी हत्या कर दी गयी। बताया यह भी जा रहा है कि उसके शरीर पर जगह- जगह लगभग 50 बार चाकू से वार किया गया है। इतनी बर्बरता, इतनी हैवानियत के बाद भी ताज्जुब की बात है कि महिलाओं की सुरक्षा को लेकर डिंग हांकने वाले, पार्लियामेंट और टीवी चैनलों में बड़ी बड़ी तथाकथित बहसें करने वाले चुप्पी साधे हुए हैं और मेन स्ट्रीम मीडिया से तो यह खबर इस कदर नदारद है मानो ऐसा कुछ कहीं हुआ ही न हो ।
सवाल यह है कि महिलाएं चाहें घर में हो, किसी कार्यालय या विभाग में कार्यरत हो, सड़क , बाजार, काॅलेजों - स्कूलों में कहीं भी हो उनकी सुरक्षा का सवाल विशेषकर आज भी जीवंत और ज्वलंत है। बलात्कार, हत्या और शरीर को निर्ममता से जख्मी करना जैसी हैवानियत का जिक्र तक करते हुए जहां सिहरन और आक्रोश पैदा होता है,ऐसे में हर दूसरे दिन महिलाओं की सुरक्षा और उनपर होते तमाम तरह के अत्याचार न सिर्फ़ खौफ और असुरक्षित समाज को दर्शाते है, बल्कि इससे कहीं ज्यादा इस सड़ान्ध मारती पितृसत्तात्मक- पूंजीवादी व्यवस्था की कुरूपता को नंगे रूप में चित्रित करता है । संसद भवनों, विधानसभाओं, प्रेस कॉन्फ्रेंसों, नेताओं के भाषणों ,तथाकथित बुद्धिजीवियों के लेखों और चिंताओं में तो महिलाएं सुरक्षित है सिवाय अपने घर, गली-मोहल्ले, बाजार, स्कूलों-काॅलेजों, कार्यस्थलों, सड़कों में।
पटना घरेलू कामगार यूनियन इस घिनौने, अमानवीय और हैवानियत की हद पार करते हुए घटना की कड़ी निंदा करती है और इस जघन्य अपराध के सभी दोषियों को तत्काल गिरफ़्तार कर स्पीडी ट्रायल चलाकर सख्त से सख्त सज़ा देने की मांग करती है। इस प्रकार के लगातार बढ़ते अपराधों के मूल में यह पितृसत्तात्मक पूंजीवादी महिला विरोधी सोच और संस्कृति है जिसे विभिन्न निम्न कोटि के साहित्य , फिल्मों, अश्लील गानों के माध्यम से प्रचारित- प्रसारित किया जा रहा हैl आज पूंजीवाद ने महिलाओं को भी एक माल के रूप में स्थापित कर दिया है और इसी मानसिकता से ऐसे निम्नतर , घृणित और दिल दहला देने वाली बलात्कार की घटनाएं हमारे ही गांव-शहर, हमारे ही आस-पास लगातार घट रही है। आज इसके खिलाफ हमें एकजुट होकर आवाज़ बुलंद करनी होगी।