02/06/2026
बात आज से करीब 26 साल पहले 1999 की है. तारिक थी 17 मई इसी दिन, कैप्टन अमित भारद्वाज को लेफ्टिनेंट कालिया और उनकी टीम को बचाने की जिम्मेदारी दी गई थी।🙏💔
क्यूँकि पाकिस्तानी घुसपैठ की जानकारी मिलने पर सौरभ कालिया की टीम केवल पेट्रोलिंग करने और जानकारी इकट्ठा करने पोस्ट की तरफ बढ़ी थी। उन्होंने भारी मात्रा में हथियार नहीं रखा था, लिहाजा बेहद कम वक्त में ही उनके हथियार खत्म हो गए और अन्ततः पाकिस्तानी सेना द्वारा बंधक बना लिए गए। जब सौरभ कालिया की टीम लापता हो गई तो उस समय कैप्टन अमित भरद्वाज अपने 30 जवानों की टीम के साथ उन्हें ढूंढने निकले।
यह टीम जब बजरंग पोस्ट के पास पहुंची तो कैप्टेन अमित भारद्वाज को इस बात का आभास हुआ कि पाकिस्तानी घुसपैठिये यहाँ बड़ी संख्या में छिपे बैठे हैं। ऐसे समय में उन्होंने अपनी टुकड़ी की फॉर्मैशन को कुछ इस तरह से बनाने के आदेश दिए कि एक सुरक्षित स्थान से मौर्चा संभाला जा सके और नीचे बेस कैम्प तक पाकिस्तानी घुसपैठ की सूचना दी जा सके।
घायल होने के बाद भी अकेले 10 पाकिस्तानी सैनिकों को कर दिया ढेर:
अमित भारद्वाज ने समझदारी का परिचय देते हुए अपनी टुकड़ी को थोड़ा नीचे उतरने के आदेश दिए और खुद एक जवान हवलदार राजबीर के साथ मोर्चा संभाला ताकि अपनी टुकड़ी को कवर फायर दिया जा सके। तभी अचानक पाकिस्तानी सैनिकों को भारतीय सेना के इस टुकड़ी का आहट मिला। पाकिस्तानी सेना ने फायरिंग शुरू कर दी।
पाकिस्तानी सेना बेहद सुरक्षित स्थान पर पहाड़ के ऊपर की तरफ थी, लेकिन बावजूद इसके कैप्टेन अमित और हवलदार राजबीर ने पाकिस्तानियों को मुहतोड़ जवाब दिया।
इस गोलीबारी के बीच अमित के दोनों पैरो में गोलिया लगी थी लेकिन उसके बाद भी हिम्मत ना हारते हुए वे लड़ते रहे। आखिरकार अपने उत्तम युद्ध कौशल से कैप्टन अमित ने कम से कम 10 के करीब पाकिस्तानी सैनिकों को ढेर कर दिया था।
57 दिनों तक बर्फ में रहा अमित का पार्थिव शरीर
आखिरकार देश की सुरक्षा में तैनात रहने वाले कैप्टन अमित पाकिस्तानी सैनिकों से लोहा लेते हुए 17 मई 1999 को युद्ध के मैदान में वीरगति को प्राप्त हो गए। जब वो दुश्मनों से लोहा लेते हुए वीरगति को प्राप्त हुए तब उनकी उम्र 27 वर्ष थी।
कैप्टेन अमित भारद्वाज का मृत शरीर करीब 57 दिनों तक पहाड़ी पर भारी बर्फबारी के बीच पड़ा रहा। अमित के परिवार वाले इस बात को मानने को ही तैयार नहीं थे कि उनका बेटा अब जीवित नहीं है। 13 जुलाई , 1999 को युद्ध की समाप्ति के बाद अमित भारद्वाज का पार्थिव शरीर बरामद हुआ।
हड्डिया कंपा देने वाली ठंड में किस तरह से हमारे देश के जवानो ने पाकिस्तानी सेना का डटकर मुकाबला किया होगा, इस बात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जब उनका शव बरामद हुआ तब भी कैप्टेन अमित भारद्वाज ने अपनी बन्दूक हाथ में पकड़ी थी मानो दुश्मन को अभी भी वो चुनौती दे रहे हो।💐💐🇮🇳🇮🇳