Haryana Kisan & Agricultural Costs and Prices Commission/Haryana Kisan Ayog

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Haryana Kisan & Agricultural Costs and Prices Commission/Haryana Kisan Ayog As a progressive step to serve the cause of farmers of the State, Government of Haryana establish Haryana Farmers’ Commission on 15 July, 2010.

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भारत का अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में कोयल काम्प्लेक्स (कैथल) में शुक्रवार (10 सितम्बर, 2021) को जिला स्तरीय बासमती धान क...
16/09/2021

भारत का अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में कोयल काम्प्लेक्स (कैथल) में शुक्रवार (10 सितम्बर, 2021) को जिला स्तरीय बासमती धान के कीटनाशकों का सुरक्षित तथा न्यायसंगत उपयोग एवं उत्तम कृषि प्रक्रियाओं को अपनाना और बासमती के निर्यात में आ रही दिक्कतों के समाधान हेतु कार्यशाला का आयोजन किया गया। हरियाणा किसान एवं कृषि लागत व मूल्य आयोग (हरियाणा किसान आयोग) के सदस्य सचिव डॉ. मेहर चन्द ने मुख्य अतिथि के रूप में इस कार्यशाला में शिरकत की तथा अपने सुझाव दिए।

हरियाणा किसान एवं कृषि लागत व मूल्य आयोग द्वारा टेलीग्राम ऐप्स (Telegram app) पर एक चैनल बनाया है। किसान एवं अधिकारी गण ...
11/08/2021

हरियाणा किसान एवं कृषि लागत व मूल्य आयोग द्वारा टेलीग्राम ऐप्स (Telegram app) पर एक चैनल बनाया है। किसान एवं अधिकारी गण नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके इस चैनल से जुड़ सकते हैं तथा कृषि से संबंधित जानकारियां प्राप्त कर सकते हैं । धन्यवाद।

हरियाणा किसान आयोग के पूर्व प्रधान परोदा बोले- किसानों के लिए MSP से जरूरी खरीदार होना, मार्केट से जुड़ेंहरियाणा किसान आ...
30/04/2021

हरियाणा किसान आयोग के पूर्व प्रधान परोदा बोले- किसानों के लिए MSP से जरूरी खरीदार होना, मार्केट से जुड़ें

हरियाणा किसान आयोग के पूर्व प्रधान और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्व महानिदेशक डा आरएस परोदा ने किसानों को बड़ी सलाह दी है। उनका कहना है कि एमएसपी की गारंटी से जरूरी खरीददार मिलना है। किसान मार्केट से जुड़ें।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आइसीएआर) के महानिदेशक रह चुके और हरियाणा किसान आयोग के पूर्व चैयरमैन डा. आरएस परोदा ने किसानों के आंदोलन (Farmers Protest) के बीच उनको बड़ी सलाह दी है। डा. परोदा ने कहा है कि किसान खुद को मार्केट से जाेड़ें। जो किसान मार्केट से जुड़ गया समझाे वह तैर गया। न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से जरूरी खरीदार का मिलना है।

बोले- जाे किसान मार्केट से जुड़ गया समझो तैर गया :-

डा. परोदा को 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में कृषि के क्षेत्र में बेहतरीन कार्यों के लिए पद्म भूषण सम्मान से अंलकृत किया गया था। डिपार्टमेंट आफ एग्रीकल्चरल रिसर्च एंड एजुकेशन के सचिव के तौर पर कृषि जगत उनकी सेवाओं को आज भी याद करता है। किसान आयोग के गठन (2010) से 2014 तक डा. आरएस परोदा किसान आयोग के चेयरमैन थे। अब परोदा ट्रस्ट फार एडवांसमेंट आफ एग्रीकल्चर साइंस (टास) के चेयरमैन के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्व महानिदेशक डा. आरएस परोदा को जब नहीं मिले बाजरे के खरीदार :-

डा. परोदा मूल रूप से किसान हैं। वह रहते गुरुग्राम में हैं, कार्यक्षेत्र दिल्ली है...और करीब 20 एकड़ जमीन राजस्थान में है। किसानों के लिए लाभकारी नीतियां बनाने में उनका अहम योगदान रहा है। राजस्थान में चूंकि बाजरे की अधिक खेती होती है, इसलिए उन्होंने अपनी जमीन में बाजरा उपजा लिया। कृषि राज्य सरकारों का विषय है। हरियाणा सरकार ने अपने प्रदेश में बाजरे का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2150 रुपये क्विंटल तय कर रखा है। राजस्थान में बाजरे का एमएसपी घोषित नहीं है। वहां मार्केट में बाजरे का कोई खरीददार नहीं है।

कहा- एमएसपी की गारंटी देने से जरूरी है मार्केट में फसलों का खरीददार का होना :-

कृषि जगत के लिए कल्याणकारी योजनाएं बनाने वाले डा. आरएस परोदा को राजस्थान में अपनी बाजरे की फसल 1100 से 1200 रुपये क्विंटल की दर पर बेचनी पड़ी, क्योंकि उन्हें इससे अधिक पर कोई खरीदार नहीं मिल रहा था। साथ ही पैसा भी चाहिए था। अगली फसल के लिए खेत खाली करने थे। या तो सरकार एमएसपी तय कर बाजरे की खरीद करती और अगर एमएसपी की गारंटी दे देती तो इस बात की भी क्या गारंटी थी कि बाजरा 1100 रुपये क्विंटल में प्राइवेट खरीदार खरीद ही लेता।

बोले- केंद्र के तीन कृषि कानून किसानों के हित में मगर किसान बेवजह हो रहे भ्रमित :-

अब परोदा ने अपने खेतों में आंवला, कीनू, बेर, चीकू, नींबू, अमरूद और अनार लगाने की कार्ययोजना तैयार की है। वह खेती में नया प्रयोग कर रहे हैं। किसानों को संदेश देना चाहते हैं कि नए अनुसंधान करो। मार्केट से जुड़ो। सिर्फ एमएसपी की गारंटी की लकीर पर मत अटके रहो। अपने बच्चों को खेती के नए तरीके सिखाओ। थोड़ा रिस्क लो। केंद्र सरकार के तीनों कृषि कानून सिर्फ कारपोरेटर जगत के लिए नहीं हैं। इनमें किसानों की भलाई छिपी है। इन्हें लागू होने दें। फिर और बेहतरीन के लिए सरकार से अनुरोध करें। उनका कहना है कि केंद्र सरकार के तीन कृषि कानून किसानों के हित में हैं, लेकिन वे बेवजह भ्रमित हो रहे हैं।

जीएसटी की तरह कृषि काउंसिल से हल होंगे मसले :-

इंडियन साइंस कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके डा. आरएस परोदा के मुताबिक, तीन कृषि कानून बनाने के पीछे सरकार की मंशा बिल्कुल पाक-साफ है। वह किसानों को फायदा पहुंचाना चाहती है। लागत से अधिक लाभ कमाने के लिए हमें खेती में नए प्रयोग करने होंगे। किसानों को अपनी आने वाली पीढ़ी को सक्षम बनाना होगा। इसमें सरकार सहयोग करने को तैयार है। आज तीन कृषि कानून आए हैं, कल कृषि रिफार्म (सुधार) भी आएंगे।

उन्‍होंने कहा कि जीएसटी काउंसिल की तरह कृषि एवं किसान काउंसिल भी बन सकती है। तब कृषि किसी एक राज्य का मसला नहीं रहेगी। किसी राज्य में यदि खेती के पानी पर विवाद है तो उसका समाधान कृषि काउंसिल के जरिये होगा। किसानों को उनकी लागत से ज्यादा आमदनी नहीं हो रही तो कृषि काउंसिल उसका रास्ता निकालेगी।

किसान दुकानें खोलकर खुद के बाजार चलाने को तैयार ही नहीं :-

डा. परोदा कहते हैं, तीन कृषि कानून सेल्फ हेल्फ ग्रुप और एफपीओ की वकालत करते हैं। इन्हीं में किसानों का भला है। इनमें यदि किसानों के बाजार भी विकसित कर दिए जाएं तो सोने पर सुहागा। एजेंट का कंट्रोल कम होगा। हरियाणा किसान आयोग के चेयरमैन रहते हुए हमने किसानों के लिए करनाल, रोहतक व पंचकूला में मंडियां बनाई। उन्हें खुद दुकानें चलाने को कहा, लेकिन वह इसके लिए तैयार नहीं होते, क्योंकि उन्हें खुद पर भरोसा नहीं है। उन्हें अपने मन और दिमाग से भ्रम दूर करने होंगे।

कृषि सब्सिडी की बजाय मनोहर सरकार का रास्ता अपनाए केंद्र :-

डा. आरएस परोदा के मुताबिक नए कानूनों में मंडियां बिल्कुल भी खत्म नहीं हो रही। न ही एमएसपी पर कोई फर्क पडऩे वाला है। इन मंडियों में प्रबंधन को मजबूत करने की जरूरत है, जो केंद्र व राज्य सरकार दोनों का विषय बने। हमें समझना होगा कि जो मार्केट से जुड़ गया, समझो वह कामयाब हो गया। पूरे देश में किसानों को सवा दो से ढ़ाई लाख करोड़़ रुपये तक की सब्सिडी दी जा रही है। इस सब्सिडी को देने की बजाय यदि हम दस एकड़ तक के किसानों को एक दस हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दे दें, जो कि हरियाणा में भाजपा-जजपा सरकार छह हजार रुपये दे रही है, तो इससे किसानों को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।

आयोग (HKACPC) ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर किसानों के पंजीकरण का डेटाबेस (सॉफ्टवेयर) शरू किया है। यह डाटाबेस सॉफ्टवेयर श्...
22/02/2021

आयोग (HKACPC) ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर किसानों के पंजीकरण का डेटाबेस (सॉफ्टवेयर) शरू किया है। यह डाटाबेस सॉफ्टवेयर श्री प्रदीप कुमार, कंप्यूटर प्रोग्रामर, द्वारा विकसित किया गया है। इस सॉफ्टवेयर के दो मॉड्यूल (ऑनलाइन और ऑफलाइन) विकसित किए गए हैं, आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध "किसान पंजीकरण लिंक" द्वारा किसान खुद को पंजीकृत कर सकते हैं। (http://www.haryanakisanayog.org/FarmerReg.aspx)

यह सॉफ्टवेयर किसानों के विवरण को संग्रहीत करेगा। यह डेटाबेस उन किसानों के बारे में रिकॉर्ड के कम्प्यूटरीकरण को संभालता है जो खुद को आयोग के साथ ऑनलाइन पंजीकृत करना चाहते हैं या जो आयोग की विभिन्न बैठक में भाग लेते हैं। आयोग समय-समय पर किसानों के साथ विभिन्न बैठकें आयोजित करता है। विशेषज्ञों द्वारा किसानों की समस्याओं को सुना जाता है, जो इस बातचीत के आधार पर विशिष्ट रिपोर्ट तैयार करते हैं और बाद में सरकार को विचार के लिए प्रस्तुत करते हैं। किसानों का विवरण कागज़ कॉपी के रूप में फाइलों में एकत्र किया जाता है और इन विवरणों को आयोग के कर्मचारियों द्वारा इस डेटाबेस सॉफ्टवेयर में ऑफ़लाइन मॉड्यूल के माध्यम से संग्रहित किया जाएगा।
आज के कंप्यूटर युग में, किसानों का डेटाबेस उनके साथ जुड़े रहने के लिए एक आवश्यकता बन गया है। यह डेटाबेस आयोग और किसानों दोनों के लिए सहायक और लाभदायक होगा। आयोग ईमेल, फोन और व्हाट्सएप आदि के माध्यम से किसानों से आसानी से जुड़ सकेगा और अपनी आधिकारिक बैठकों में विशेष श्रेणी और क्षेत्र के किसानों को आमंत्रित कर सकेगा।
यह डेटाबेस समाचार पत्र, प्रकाशन और अन्य महत्वपूर्ण किसान संबंधित जानकारीयों को mKisan पोर्टल से SMS द्वारा, व्हाट्सएप ग्रुप पर और ई-मेल के माध्यम से भेजने के लिए सहायक होगा। इस सॉफ्टवेयर मॉड्यूल का उपयोग करके राज्य के किसानों की जिलेवार, फसलवार आदि रिपोर्ट तैयार की जा सकेगी। किसानों को ये महत्वपूर्ण जानकारियाँ समय पर मिल सकेंगी और इस संबंध में वे नवीनतम जानकारी से अवगत रहेगें।

26/01/2021

देश की एकता और अखंडता के प्रतीक "गणतंत्र दिवस" की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं।

आइए, हम सभी सशक्त, समृद्ध, उज्ज्वल भारत बनाने में और संविधान में निहित आदर्शों और मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता सुनिश्चित कर देश व लोकतंत्र की प्रगति में योगदान देने का संकल्प लें।
सदस्य सचिव,
किसान आयोग

Newspaper clips
19/01/2021

Newspaper clips

हरियाणा सरकार ने डाॅ0 मेहर चन्द प्रधान वैज्ञानिक चौै0 चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, क्षेत्रीय अनुसंधान केन्द्र कर...
18/01/2021

हरियाणा सरकार ने डाॅ0 मेहर चन्द प्रधान वैज्ञानिक चौै0 चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, क्षेत्रीय अनुसंधान केन्द्र करनाल को हरियाणा किसान एंव कृषि लागत व मूल्य आयेाग का सदस्य सचिव नियुक्त किया और आज दिनांक 18.01.2021 को पद ग्रहण कर लिया हैं। इससे पूर्व डॅा0 मेहर चन्द पिछले 26 वर्षो से चौै0 चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार में गन्ना, मक्का, खरपतवार नियंत्रण, फसल विविधीकरण, मशीनीकरण, अन्तः फसलीकरण और प्राकृतिक ससांधनों के उपयोग पर अनुसंधान कर रहे थे। उन्होंने इस नियुक्ति के लिए माननीय मुख्यमंत्री, हरियाणा व कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री, हरियाणा सरकार का आभार व्यक्त किया है और कहा कि वे उनकी अपेक्षाओं पर खरा उतरने की कोशिश करेगें।

डाॅ0 मेहर चन्द ने लगभग 250 अनुसंधान लेख विभिन्न राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय सेमीनार व पुस्तिकाओं में प्रकाशित किये हैं। उनकी लगभग 26 अनुसंधान तकनीकें भी चौ0 चरण सिहं हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय
द्वारा प्रकाशित फसलो की समग्र सिफारिशों में शामिल की गई हैं और ये सभी तकनीकें किसानो द्वारा व्यापक स्तर पर अपनाई जा रही हैं। वे इस से पहले लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, हिसार के प्रबंधन मंडल, हरियाणा राज्य पर्यावरण प्रभाव मुल्याकंन प्राधिकरण, हरियाणा तालाब व अपशिष्ट प्रंवधन प्राधिकरण के सदस्य भी रह चुके है। वे चौ0 चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार में विभिन्न कमेटी के सदस्य भी रहे है।

उन्होने बताया उनकी प्राथमिकताओं में कृषि, उद्यान, पशुपालन, मत्स्य विभाग, चौ0 चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार, लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एंव पशु विज्ञान विश्वविद्यालय और महाराणा प्रताप बागवानी विज्ञान विश्वविद्यालय की भागीदारी के साथ उनकी प्राथमिकताओं में किसानों के कम खर्च पर ज्यादा आय सुनिशचित करना हैं। इसके अलावा सबंधित विभागों के सहयोग से गिरते भूजल के स्तर को रोकना, मौसम सबंधी समयबद्ध जानकारी किसानों तक पहुंचाना, फसल अवशेषो का उचित प्रबंधन, मशीनीकरण को बढ़ावा देकर जमीन की उपजाऊ शक्ति बढा़ना और समेकित कृषि प्रणाली पर कार्य करना इत्यादि रहेगा।

Second Meeting of the committee to conduct the study on feasibility of e-NAM under the Chairmanship of Dr. R.S. Balyan, ...
26/06/2020

Second Meeting of the committee to conduct the study on feasibility of e-NAM under the Chairmanship of Dr. R.S. Balyan, Member-Secretary, HKACPC, was held on 26th Jun, 2020 in the office of Ayog (HKACPC) at 11 AM.

First Meeting of the committee to conduct the study on feasibility of e-NAM under the Chairmanship of Dr. R.S. Balyan, M...
26/06/2020

First Meeting of the committee to conduct the study on feasibility of e-NAM under the Chairmanship of Dr. R.S. Balyan, Member-Secretary, HKACPC.(24-06-2020)

Additional Chief Secretary, Haryana Agriculture and Farmers’ Welfare Department, Mr. Sanjeev Kaushal released six Workin...
23/06/2020

Additional Chief Secretary, Haryana Agriculture and Farmers’ Welfare Department, Mr. Sanjeev Kaushal released six Working Group reports and proceeding publications of Haryana Kisan and Agricultural Costs and Prices Commission, Panchkula. (19-Jun-2020)
Mr. Sanjeev Kaushal appreciated the efforts made by Haryana Kisan and Agricultural Costs
and Prices Commission for preparing these reports. He said that these publications are highly useful for the benefit of the farmers and are also important for implementation of the recommendations from these publications by the agriculture and allied departments for progress of agriculture in Haryana.
The reports include, Working Group Report on Promotion of Organic Farming in Haryana, Working Group Report on Promotion of Mushroom Cultivation in Haryana, Working Group Report on Maize Cultivation in Haryana, Proceedings of the Workshop on Growing of Poplar Yield: Bottlenecks and Policy Issues. Besides this, Working Group Report on Promotion of Organic Farming in Haryana, Working Group Report on Maize Cultivation in Haryana, were released in
Hindi languages.

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Haryana Kisan & Agricultural Costs And Prices Commission, Anaj Mandi, Sector/20
Panchkula
134116

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Tuesday 9am - 5pm
Wednesday 9am - 5pm
Thursday 9am - 5pm
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