16/04/2026
मुझे बताते हुए खुशी हो रही है कि मेरी नई पुस्तक
🌹अरबी-फ़ारसी लिपि में लिखित हिंदी साहित्य : प्रतिनिधि काव्य 🌹
अब पाठकों के लिए उपलब्ध है। मेरी यह पुस्तक हिंदी और उर्दू की साझा सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत को एक नई दृष्टि से प्रस्तुत करती है। इतिहास के एक महत्वपूर्ण पहलू को सामने लाते हुए यह कृति बताती है कि हिंदी का बहुत-सा पुराना साहित्य अरबी–फ़ारसी लिपि में लिखा गया, जो समय के साथ आम पाठकों से दूर होता चला गया।
इस पुस्तक के माध्यम से उस अमूल्य साहित्य को देवनागरी लिपि में प्रस्तुत किया गया है, ताकि पाठक उसे आसानी से पढ़ और समझ सकें। इसमें विभिन्न कालखंडों के प्रतिनिधि शायरों—मीर, ग़ालिब, ज़ौक, दाग़, हाली, इक़बाल आदि—की रचनाओं का सुविचारित संकलन उनके जीवन परिचय सहित किया गया है।
यह कृति इस बात को उजागर करती है कि भाषा की असली पहचान उसकी अभिव्यक्ति में होती है, न कि केवल लिपि में। साथ ही, ग़ज़ल और नज़्म जैसी महत्वपूर्ण काव्य विधाओं को भी सरल रूप में समझाया गया है।
📖 शोधार्थियों, विद्यार्थियों और साहित्य प्रेमियों के लिए यह पुस्तक विशेष रूप से उपयोगी है। यह हिंदी-उर्दू के बीच बने कृत्रिम विभाजन को समझने और गंगा-जमुनी तहज़ीब को पहचानने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
📍 प्रकाशक: हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, पंचकूला
💰 मूल्य: ₹300 (वर्तमान में 30% छूट पर रु. 210 में उपलब्ध)
👉 पुस्तक मंगवाने के लिए आप इन्हें संपर्क करें
📱 दिनेश जी - 9646361236
📱बलदेव जी - 9467377308
ईमेल [email protected]