23/01/2026
देश को एक सूत्र में पिरोने वाली शिक्षा व्यवस्था की अपेक्षा थी, परंतु UGC द्वारा लाए गए Promotion of Equity Regulations, 2026 उच्च शिक्षण संस्थानों में संतुलन के बजाय असमंजस और असुरक्षा का वातावरण बना रहे हैं। यह विमर्श किसी विशेष वर्ग के विरोध में नहीं, बल्कि उस ढांचे पर है जहाँ न्याय की प्रक्रिया समान और पारदर्शी प्रतीत नहीं होती।
हम समाज के प्रत्येक वर्ग के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों के पूर्ण समर्थन में हैं। किंतु समानता के नाम पर यदि न्याय व्यवस्था चयनात्मक हो जाए, तो वह समानता के मूल सिद्धांत को ही कमजोर करती है। न्याय किसी पहचान या वर्ग के आधार पर नहीं, बल्कि तथ्यों और निष्पक्ष प्रक्रिया पर आधारित होना चाहिए।
इन प्रावधानों के अंतर्गत बनाई गई इक्विटी कमेटियों में स्वतंत्र और संतुलित प्रतिनिधित्व का अभाव दिखता है। शिकायतों की परिभाषा अत्यधिक व्यापक है, जबकि निराधार या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों पर स्पष्ट उत्तरदायित्व तय नहीं किया गया है। शिक्षा संस्थान भय का नहीं, विचार-विमर्श और बौद्धिक स्वतंत्रता का केंद्र होने चाहिए।
हम यह मांग करते हैं कि इन नियमों की गंभीर समीक्षा की जाए, सभी विद्यार्थियों के लिए एक समान और निष्पक्ष शिकायत तंत्र स्थापित हो तथा न्याय प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। राष्ट्र को विभाजन नहीं, बल्कि समावेश और संतुलन की दिशा में आगे बढ़ाने वाले निर्णयों की आवश्यकता है।