भागो मत जागो साक्षी बनो

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भागो मत जागो साक्षी बनो जिंदगी से सीखे जीने का सलीका

भगवान् का दिव्य स्वरूप अनन्त, अद्भुत गुणों से पूरित है और भगवान् के साथ रहने का सुख असीम है। दुर्भाग्यवश भौतिकतावादी लोग...
26/02/2024

भगवान् का दिव्य स्वरूप अनन्त, अद्भुत गुणों से पूरित है और भगवान् के साथ रहने का सुख असीम है। दुर्भाग्यवश भौतिकतावादी लोग ऐसे सुख की कल्पना भी नहीं कर सकते, क्योंकि वे भगवान् से प्रेम करने की ओर रंच-भर भी उन्मुख नहीं होते।
SB 11.14.12
Jai Śrila Prabhupad

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*हरे कृष्ण हरे कृष्ण*
*कृष्ण कृष्ण हरे हरे*
*हरे राम हरे राम*
*राम राम हरे हरे*
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🌺🌸🌼🌺🌸🌼🌺     *हरे कृष्ण हरे कृष्ण*     *कृष्ण कृष्ण हरे हरे*      *हरे  राम  हरे  राम*     *राम राम हरे  हरे*🌺🌸🌼🌺🌸🌼🌺
24/02/2024

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*हरे कृष्ण हरे कृष्ण*
*कृष्ण कृष्ण हरे हरे*
*हरे राम हरे राम*
*राम राम हरे हरे*
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🌹  _*जीव की स्वाभाविक स्थिति*_चैतन्य महाप्रभु जी कहते हैं--  *जीवेर स्वरूप होय कृष्णेर नित्य दास।*(चैतन्य चरित्रामृत मध्...
23/02/2024

🌹 _*जीव की स्वाभाविक स्थिति*_

चैतन्य महाप्रभु जी कहते हैं--
*जीवेर स्वरूप होय कृष्णेर नित्य दास।*
(चैतन्य चरित्रामृत मध्यलीला 20.108)
_*"श्री कृष्ण की नित्य दासता ही जीव का स्वरुप है।”*_

_स्वरुप अर्थात स्वभाव। आदत तो बदली जा सकती है परंतु स्वभाव प्राकृतिक होता है जिसको अथक प्रयास करके भी कदापि नहीं बदला जा सकता।_

_यदि कोई सचमुच मुक्ति चाहता है तो उसे भक्तों की सेवा करनी चाहिए_ किन्तु जो भौतिकवादी पुरुषों की संगति करता है वह संसार के गहन अंधकार की और अग्रसर होता रहता है। भगवान के सारे भक्त विश्व भर का भ्रमण इसलिए करते हैं जिससे वे बद्धजीवों को उनके मोह से उबार सकें। मायावादी यह नहीं जान पाते की _परमेश्वर के अधीन अपनी स्वाभाविक स्थिति को भूलना ही ईश्वरीय नियम की सबसे बड़ी अवहेलना है। जब तक जीव अपनी स्वाभाविक स्थिति को पुनः प्राप्त नही कर लेता तब तक परमेश्वर को समझ पाना या संकल्प के साथ उनकी दिव्य प्रेमाभक्ति में पूर्णतया प्रवृत हो पाना कठिन है।_

इस लिए सदैव जपें एवं ख़ुश रहें-

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*हरे कृष्ण हरे कृष्ण*
*कृष्ण कृष्ण हरे हरे*
*हरे राम हरे राम*
*राम राम हरे हरे*
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BEFORE TAKING MONEY FROM OTHERS CHECK IT PROPERLY OTHERWISE YOU WILLBE MAKE FOOLISH
22/02/2024

BEFORE TAKING MONEY FROM OTHERS CHECK IT PROPERLY OTHERWISE YOU WILLBE MAKE FOOLISH

🌹 *मन का स्वभाव बड़ा ही चंचल है जैसे कि कोई बंदर । बंदर एक डाली से दूसरी डाली पर कूदता रहता है। अपने इसी स्वभाव के कारण ह...
21/02/2024

🌹 *मन का स्वभाव बड़ा ही चंचल है जैसे कि कोई बंदर । बंदर एक डाली से दूसरी डाली पर कूदता रहता है। अपने इसी स्वभाव के कारण ही मन विचलित रहता है ।*

हमारे छः मुख्य शत्रु हैं – काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद्य एवं मत्सर ।
जब तक हम स्वयं को इनसे शुद्ध नहीं कर पायेंगे तब तक हमें वास्तविक शांति की प्राप्ति नहीं हो पायेगी ।
और इनसे शुद्धि किसी यान्त्रिक पद्धति द्वारा नहीं मिलेगी ।
भगवान् का आश्रय लेकर हम इनसे छुटकारा पर सकते हैं ।

और इस कलियुग में भगवान् का आश्रय लेकर इनसे स्वयं को शुद्ध करने का सबसे सरल एवं प्रभावशाली *उपाय भगवान् के नामों का कीर्तन ही है ।*

कलेर्दोषनिधे राजन्न अिस्त हि एको महान् गुणः ।

कीर्तनादेव कृष्णस्य मुक्तसंगः परम व्रजेत ।। *(श्रीमद्भागवतम् १२.३.५१)*

यद्यपि कलियुग दोषों का सागर है किन्तु इसका एक महान् गुण यह है कि केवल भगवान् के नामों का कीर्तन करने से व्यक्ति को परम आनंद की अनुभूति हो सकती है ।

*भगवान् के नामों का कीर्तन करने से हमारी वासनाए तो समाप्त होती ही हैं साथ–साथ हम भगवान् के प्रति अपने भूले हुए प्रेममय सम्बन्ध को भी पुनः जागृत कर लेते हैं ।* और भगवान् के साथ उस प्रेममय सम्बन्ध में ही वह परमसुख है जिसकी खाेज में हम इस भौतिक जगत् में जन्म से मृत्यु तक अनेक विफल प्रयास करते रहते हैं ।

इस लिए सदा जपें👇

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*हरे कृष्ण हरे कृष्ण*
*कृष्ण कृष्ण हरे हरे*
*हरे राम हरे राम*
*राम राम हरे हरे*
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शुद्ध भक्ति में हृदय को शुद्ध करने की शक्ति होती है। यह भगवान् की संगति प्राप्त करने में समर्थ बनाती है। चूँकि भक्त भगवा...
20/02/2024

शुद्ध भक्ति में हृदय को शुद्ध करने की शक्ति होती है। यह भगवान् की संगति प्राप्त करने में समर्थ बनाती है। चूँकि भक्त भगवान् को अत्यन्त प्रिय होता है और सदैव उनके निकट रहता है, इसलिए वह आगे समूचे ब्रह्माण्ड को शुद्ध कर सकता है। अविचल भगवद्भक्ति के कारण, भक्त कभी भी इन्द्रिय-भोग के विषयों की ओर उन्मुख नहीं होता, चाहे वह प्रारम्भ में अपनी इन्द्रियों पर नियंत्रण न कर सकता हो।

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*हरे कृष्ण हरे कृष्ण*
*कृष्ण कृष्ण हरे हरे*
*हरे राम हरे राम*
*राम राम हरे हरे*
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🌹 _*अभिमान/अहंकार से मुक्ति*_ *_नाम जितना जपोगे, उतना मान (अभिमान/अहंकार) शिथिल होगा। दोनों साथ साथ नहीं रह सकते। नाम जप...
19/02/2024

🌹 _*अभिमान/अहंकार से मुक्ति*_

*_नाम जितना जपोगे, उतना मान (अभिमान/अहंकार) शिथिल होगा। दोनों साथ साथ नहीं रह सकते। नाम जपते हुए भी अगर मान बना हुआ है तो समझना कि गन्दगी अन्दर भरी हुई है। और अधिक नाम जपो। नाम ही मान का पूर्ण रूप से नाश करेगा। प्रेमपूर्वक नाम जपो, सब प्रकार के अहं मिटेंगे।_*

_सभी ग्रंथों में वेद सर्वोपरि हैं। उपनिषद् वेदों का सार है और उपनिषदों का सार गीता है। गीता और रामायण का सार भगवत् शरणागति है। इसलिए जैसे भी हो मन वाणी से यही सोचना चाहिए, यही कहना चाहिए कि मैं भगवान की शरण में हूँ। *बार-बार कहने से मन पर असर पड़ेगा।* विद्वान बुद्धिमान की शरणागति एक बार कहने से हो जाती है पर हम सरीखे लोगों को बार-बार इसलिए कहना चाहिए कि हम दृढ़ प्रतिज्ञा वाले नहीं हैं। भूल जाने का हमारा स्वभाव है। अतः *हे नाथ! मैं आपकी शरण में हूँ !* बार-बार प्रणामादि के समय अवश्य कहना चाहिए👇

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*हरे कृष्ण हरे कृष्ण*
*कृष्ण कृष्ण हरे हरे*
*हरे राम हरे राम*
*राम राम हरे हरे*
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🌹 _*वैराग्य*_ _*प्रतिकूल परिस्थिती तो वैराग्य पैदा करती है। अनूकूल परिस्थिती मोह पैदा करती है।*_ _प्रतिकूल परिस्थिती - घ...
16/02/2024

🌹 _*वैराग्य*_

_*प्रतिकूल परिस्थिती तो वैराग्य पैदा करती है। अनूकूल परिस्थिती मोह पैदा करती है।*_ _प्रतिकूल परिस्थिती - घर मे झगड़ा अशांति कलह इससे मन क्षुब्ध हो जाता है। हे भगवान एक बार यहां से निकल जायें तो खूब भजन करेंगे देख लिया संसार, बहुत दुखदायी है। हाय हम कहां फस गये।_

_ऐसा सोचने से मन मे वैराग्य पैदा होता है, संसार के प्रति अनासक्ति आ जाती है और इसके विपरीत अनुकूल परिस्थिती - सब प्रेम करते हैं बहुत मानते हैं सम्मान करते हैं तो फ़िर मोह के कारण साधन / भजन की चेष्टा भी नहीं होगी।_

इस लिए सदा जपें👇

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*हरे कृष्ण हरे कृष्ण*
*कृष्ण कृष्ण हरे हरे*
*हरे राम हरे राम*
*राम राम हरे हरे*
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15/02/2024

जब मन या इन्द्रियाँ भौतिक भोग की ओर आकर्षित होती हैं, तो श्रेष्ठ बुद्धि को ऐसे मोह का तुरन्त पता लगा लेना चाहिए। इस तरह,...
15/02/2024

जब मन या इन्द्रियाँ भौतिक भोग की ओर आकर्षित होती हैं, तो श्रेष्ठ बुद्धि को ऐसे मोह का तुरन्त पता लगा लेना चाहिए।
इस तरह, मनुष्य को अपनी मनोवृत्ति को शुद्ध बनाना चाहिए।
भगवद्भक्ति से, ऐसी विरक्ति तथा बुद्धि स्वतः जाग्रत होती हैं और अपने आदि आध्यात्मिक स्वरूप को भलीभाँति जानकर, मनुष्य शुद्ध चेतना में उचित रूप से स्थित होता है।
SB 11.13.25
Jai Śrila Prabhupad

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*हरे कृष्ण हरे कृष्ण*
*कृष्ण कृष्ण हरे हरे*
*हरे राम हरे राम*
*राम राम हरे हरे*
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दिव्य ज्ञान प्राप्त हो जाने पर, मन तथा इन्दिय-विषयों का पारस्परिक आकर्षण समाप्त हो जाता है। आध्यात्मिक मन विषय-वासनाओं क...
14/02/2024

दिव्य ज्ञान प्राप्त हो जाने पर, मन तथा इन्दिय-विषयों का पारस्परिक आकर्षण समाप्त हो जाता है। आध्यात्मिक मन विषय-वासनाओं की वस्तुओं के प्रति आकृष्ट नहीं होता।
इस तरह मन को आध्यात्मिक बनाने से भौतिक जीवन स्वतः ही शिथिल पड़ जाता है।
SB 11.13.22
Jai Śrila Prabhupad

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*हरे कृष्ण हरे कृष्ण*
*कृष्ण कृष्ण हरे हरे*
*हरे राम हरे राम*
*राम राम हरे हरे*
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भगवान् किसी भी जीव के प्रति पक्षपात नहीं करते | जीवात्मा अपने कर्मों के लिए स्वयं उत्तरदायी है | भगवान् उसे प्रकृति अर्थ...
13/02/2024

भगवान् किसी भी जीव के प्रति पक्षपात नहीं करते |
जीवात्मा अपने कर्मों के लिए स्वयं उत्तरदायी है |
भगवान् उसे प्रकृति अर्थात् बहिरंगा शक्ति के माध्यम से केवल सुविधा प्रदान करने वाले हैं |
जो व्यक्ति इस कर्म-नियम की सारी बारीकियों से भलीभाँति अवगत होता है, वह अपने कर्मों के फल से प्रभावित नहीं होता |
वह कृष्णभावनामृत में अनुभवी होता है |
अतः उस पर कर्म के नियम लागू नहीं होते ।

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*हरे कृष्ण हरे कृष्ण*
*कृष्ण कृष्ण हरे हरे*
*हरे राम हरे राम*
*राम राम हरे हरे*
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