24/05/2021
2 दिन पहले एक ऐसा वाकया हुआ जिसने मेरी ज़िन्दगी के कईं पहलुओं को छू लिया और खुद को खुद की नजरों में गिरने से नहीं बचा पाया...
करीब दोपहर के 2:00 बजे होंगे, जैसा कि वर्तमान दौर में सभी नेता अपने आप को जन हितैषी दिखाने का प्रयास कर रहे हैं, मैं भी उन्हीं में से एक हूँ। जेब से रुपैया भी खर्च नहीं हो और रुतबा भी डॉलर जैसा बरकरार रहे, लगभग सारे नेता इसी मूल सिद्धांत पर राजनीति कर रहे हैं। सामान्यतः इस कोरोना काल मैं सभी नेता अपने-अपने क्षेत्र में कोरोना पीड़ितों से बात कर उन्हें मानसिक रूप से संबल प्रदान कर रहे हैं। मैं भी मेरे जिला परिषद वार्ड में कोरोना पीड़ितों का डाटा निकलवा कर उनसे बात कर रहा था और हर पीड़ित को वही तीन रटी रटाई बातें बता रहा था की ऑक्सीजन लेवल और तापमान हर 3 घंटे में नापते रहना है, ज्यादा से ज्यादा नारियल का पानी पीना है और सुबह शाम प्राणायाम करना है... लगभग 8 से 9 महानुभावों से बात करने के बाद जब मैंने एक सज्जन को फोन किया नमस्ते किया और अपना परिचय दिया और यह तीनों टिप्स बताए तो उनका सामने से जवाब था बेटा तू ऑक्सीजन और तापमान की बात कर रहा है पर इसके लिए ऑक्सीजन नापने वाला और बुखार मापने वाला साधन भी तो होना चाहिए, मेरा बेटा लक्ष्मणगढ़ गया था लाने के लिए ऑक्सीजन नापने वाला ₹2700 का बताया और बुखार वाला 300 का इस कठिन समय में 3 हजार कहां से लेकर आएँ और तुम नेता भी सुखा ज्ञान देते हो करते तुम भी कुछ नहीं। यहां कोई बुखार नापने वाला गांव में कोई नापने के लिए उधार नहीं देता है और तू कह रहा है नारियल पानी पियो... मैं जो धड़ाधड़ फोन पर ज्ञान बांट रहा था 1 मिनट में शर्म से पानी-पानी हो गया। मैंने कहा अंकल जी और गांव में कितने परिवार हैं जिनके घर में कोरोना के पीड़ित है उनका जवाब आया 5, मैंने तुरंत 5 ऑक्सीमीटर, तापमान मापने के लिए थर्मामीटर उनके गांव शाम को पहुँचाए और आज 20 ऑक्सीमीटर और थर्मामीटर और मंगवाए हैं जिनकी कीमत लगभग 46 हजार पड़ी। शायद मैं मेरे क्षेत्र के सभी पीड़ितों को तो ऑक्सीमीटर और थर्मामीटर उपलब्ध ना करवा पाऊँ पर किसी भी जरूरतमंद को इसके अभाव में नहीं रहने दूँगा और प्रयास कर रहा हूँ ऐसे व्यक्ति जो यह खरीदने में सक्षम नहीं है उन तक जरूरत का सामान पहुंचा सकूँ। हर समय हम सिस्टम से सवाल करके इतिश्री नहीं कर सकते, कईं बार स्वयं के अंदर भी झांकना पड़ता है। आप सभी से भी अपेक्षा है इस समय मानवता की इस मुश्किल घड़ी में अपनी हैसियत अनुसार जिससे जितनी मदद हो सके वो मदद करें मदद करने के बाद दिल में एक अजीब सा सुकून मिलेगा और दिल से निकली हुई दुआएं भी मिलेंगी।
आपका - महिपाल महला, फतेहपुर