Nurpur Fort, Himachal Pradesh

Nurpur Fort, Himachal Pradesh Landmark & Historical Place

प्राचीन शिव मंदिर मठोली इतिहास सतियुग में यहां पर कोटा शहर होता था, जोकि राजा जय चन्द के रजवाड़े में आता था, जिसकी सीमा ...
12/02/2021

प्राचीन शिव मंदिर मठोली इतिहास सतियुग में यहां पर कोटा शहर होता था, जोकि राजा जय चन्द के रजवाड़े में आता था, जिसकी सीमा हरनोट कुवाल, तलवाड़ा, ज्वाली, भडवार तथा कण्डवाल तक फैली हुई थी। इसी कोटे शहर में (अब मठोली) में एक मंदिर होता था, जिसमें महात्मा निरवाण नाथ जी रहते थे। वह ज्ञानी तथा निष्ठावान थे। इसी कोटे शहर में वसोली (जम्मू-कश्मीर) के एक लड़के की शादी हुई थी। वह लड़का महात्मा निरवाण नाथ जी से आशीर्वाद लेने आता रहता। राजा जय चन्द के यहां कोई भी संतान नहीं थी। विवाह के कुछ समय बाद उसके घर एक कन्या ने जन्म लिया। नामकरण के समय राजपुरोहित ने कहा कि यह लड़की राजा के लिए अशुभ है। इसको गरेल गंगा (अब गरेली खड्ड) में बहा दो। राजा ने कन्या को एक संदूक में डालकर गरेल गंगा में बहा दिया। वहां एक धोबी कपड़े धो रहा था। उसने उस संदूक को पकड़कर जैसे ही खोला उसमें एक कन्या मिली। धोबी को इस बात का पता था कि यह लड़की राजा जय चन्द की है। धोबी ने अपने दोस्त कुम्हार को यह लड़की दे दी, क्योंकि उसकी कोई संतान नहीं थी। कुम्हार ने उस कन्या का नाम सोरठ रख दिया।
कई वर्ष बीतने के बाद एक दिन राजा शिकार खेलने वन में गया। वही कन्या सोरठ बर्तन बनाने के लिए मिट्टी लेने वन में आई हुई थी। राजा ने जैसे ही उसको देखा, राजा उस पर मोहित हो गया और शादी का विचार उसके मन में पनपने लगा। लड़की ने भारी मिट्टी की टोकरी शीघ्र उठा ली। राजा उसकी खूबसूरती तथा ताकत दोनों पर हैरान हुआ। राजा ने अपने एक वजीर को कुम्हार के घर भेजा कि राजा उसकी बेटी के साथ शादी करना चाहता है। इस बात का पता महात्मा निरवाण नाथ को चला तो वह व्याकुल हो उठा। अब राजा को भी अपनी गलती का अहसास हुआ तथा राजा दौड़े-दौड़े नंगे पांव महात्मा के पास पहुंचा। राजा महात्मा के पैरों पर सिर रखकर क्षमा मांगने लगा, लेकिन उधर, लड़की के श्राप से सारा गोटा शहर गर्क हो गया। शहर के गर्क होने से पहले महात्मा ने समाधि ले ली। कन्या सोरठ भी कोटे वाली माता के जंगलों में सती हो गई। हज़ारों वर्ष बाद मठोली (कोटा) के वजीर राम सिंह ने राजा को बताया कि मठोली में शिवलिंग है, जो हज़ारों वर्ष प्राचीन है। राजा ने वहां मंदिर का निर्माण किया व यज्ञ किया। 1905 में आए भीषण भूकम्प ने एक बार फिर कांगड़ा सहित सारा कोटा शहर (जसूर-मठोली) को नष्ट कर दिया। यहां तक कि गरेली खड्ड की दिशा भी बदल दी। उस समय केवल यही प्राचीन मंदिर बचा था। यह शहर किसी समय कोटू कचहरी के नाम से प्रचलित था। यहां राजा जय चन्द की कचहरी लगती थी। जसूर के नज़दीक गंगथ रोड पर पड़ने वाले गांव का नाम ठाणा भी राजा जय चन्द के ठाणे के नाम से है, जिसमें उस समय कैदियों को रखा जाता था। आज जिस स्थान पर आधुनिक विद्यालय है व जिसे मठोली गांव के नाम से जाना जाता है, यह सारा कोटा शहर था, जिसमें लोग खरीदो-फरोख्त करते थे। यहां मठोली गांव में वह शिव मंदिर है। यहां ज़मीन के अंदर से प्राचीन अवशेष मिलते हैं जो इस सारी ऐेतिहासिक कथा का साक्षात प्रमाण हैं। यह उत्तर भारत का ऐसा पहला मंदिर है, जिसमें शिवरात्रि वाले दिन सुबह चार बजे से ही लंगर लग जाता है। श्रद्धालुगण दूर-दूर से शिव की आराधना पूजा-अर्चना करने आते हैं और अपनी मनोकामनाएं संपूर्ण पाकर धन्य हो जाते हैं। आज भी मंदिर की शुषमा-सुरभि दूर-दूर तक है। पुजारी सुरजीत सिंह उर्फ़ बिट्टू नाथ

Himachali Playing with Leopard 🐆 पहाड़ी always खेड़ी
14/01/2021

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शेर जंगल मे रहता है ।।।और ये जंगल हमारे है।पहाड़ी always खेड़ी

08/12/2020

1. निम्न में किसे प्राचीनकाल में धरगिरी नाम से जाना जाता था ?

(A) धर्मशाला
(B) मंडी
(C) नूरपुर
(D) बिलासपुर

Choose One ??
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अपना पहाड़ अपनी पहचान《•किस किस के घर मे लग पड़े हैं??कॉमेंट कीजिए।
28/06/2020

अपना पहाड़ अपनी पहचान《•
किस किस के घर मे लग पड़े हैं??
कॉमेंट कीजिए।

Lake 🥰😍 Kon kab gya last time.??
22/06/2020

Lake 🥰😍 Kon kab gya last time.??

Kon Kon gya h... yanha??
18/06/2020

Kon Kon gya h... yanha??

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