District & Sessions Court, Mewat at Nuh

District & Sessions Court, Mewat at Nuh Nuh is the district headquarters of the Mewat district in the Indian State of Haryana.

21/01/2026
09/01/2026

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07/01/2026

#कहानी: अभ्यास का महत्व

प्राचीन काल में एक छोटे से गांव में #वरदराज नाम का एक बालक रहता था। वह गरीब ब्राह्मण परिवार से था, लेकिन पढ़ने का बड़ा शौक था। उसके पिता ने उसे गुरुकुल भेज दिया, जहां वह अन्य शिष्यों के साथ रहकर विद्या ग्रहण करने लगा। गुरुकुल में संस्कृत व्याकरण, वेद और शास्त्र पढ़ाए जाते थे। लेकिन वरदराज की बुद्धि मंद थी। गुरुजी जो भी सिखाते, उसे समझने में उसे बहुत कठिनाई होती। अन्य बालक जल्दी सीख जाते, लेकिन वरदराज बार-बार भूल जाता।

साथी उसका उपहास उड़ाते। "अरे मंदबुद्धि, तू कभी विद्वान नहीं बन पाएगा!" वे चिढ़ाते। गुरुजी ने भी बहुत प्रयास किए। वे उसे अलग से पढ़ाते, उदाहरण देते, लेकिन वरदराज की प्रगति नगण्य थी। एक दिन गुरुजी ने कहा, "बेटा, तेरी विद्या में रुचि तो है, लेकिन बुद्धि साथ नहीं दे रही। अब तू घर जाकर खेती-बाड़ी में मदद कर। यहां समय बर्बाद न कर।" वरदराज उदास हो गया। वह भारी मन से गुरुकुल छोड़कर घर की ओर चला।

रास्ते में दोपहर हुई। प्यास लगी तो वह एक कुएं के पास रुका। वहां कुछ महिलाएं पानी भर रही थीं। कुएं के पत्थर पर रस्सी के गहरे निशान बने थे। वरदराज ने उत्सुकता से पूछा, "माताजी, ये निशान कैसे बने?" एक महिला ने मुस्कुराते हुए कहा, "बेटा, ये कोमल रस्सी ने सालों तक पानी खींचते हुए ठोस पत्थर पर खुद ही बना लिए। बार-बार घर्षण से ये गहरे हो गए।"

वरदराज स्तब्ध रह गया। सोचा, 'अगर नरम रस्सी पत्थर को काट सकती है, तो निरंतर अभ्यास से मैं विद्या क्यों न सीख सकूं?' उसके मन में नई आग जल उठी। वह तुरंत गुरुकुल लौट आया। गुरुजी को सब बताया। गुरुजी प्रसन्न हुए और बोले, "बेटा, अभ्यास ही विद्या की कुंजी है।" वरदराज ने दिन-रात एक कर दिया। सुबह उठकर श्लोक रटता, रात को दोहराता। थकान होती तो कुएं की रस्सी याद आती और वह फिर जुट जाता।

महीनों की कड़ी मेहनत रंग लाई। वरदराज न केवल पिछड़ गया, बल्कि संस्कृत व्याकरण का महान विद्वान बन गया। उसने 'लघुसिद्धांतकौमुदी', 'मध्यमसिद्धांतकौमुदी' जैसी अमर रचनाएं लिखीं, जो आज भी पढ़ी जाती हैं। दुनिया ने उसे ' #वरदराजाचार्य' के नाम से जाना।

# # नैतिक शिक्षा

यह कहानी सिखाती है कि प्रतिभा से ज्यादा अभ्यास महत्वपूर्ण है। चाहे कितनी भी बाधा हो, लगन से असंभव संभव हो जाता है।💪📖

07/01/2026

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03/01/2026

आखिरी ‘लास्ट सीन’
रात के करीब डेढ़ बजे, बोकारो की सुनसान सड़क पर रवि अपनी बाइक से घर लौट रहा था।
ठंडी हवा, चारों तरफ सन्नाटा, और सड़क के किनारे–किनारे धुंधली लाइटें टिमटिमा रही थीं।

जैसे ही वह पुराने कब्रिस्तान के पास पहुँचा, मोबाइल पर मैसेज की टन–टन हुई।
स्क्रीन देखी तो व्हाट्सऐप पर एक अनजान नंबर से मैसेज था – “इतनी देर में अकेले घर मत जाया करो… आज कुछ हो सकता है।”

रवि ने सोचा किसी दोस्त की शरारत होगी, हंसी में इग्नोर किया और आगे बढ़ गया।
डेढ़ मिनट बाद उसी नंबर से फिर मैसेज आया – “इग्नोर मत करो, हेलमेट के शीशे में पीछे देखो।”

धड़कन तेज हो गई, लेकिन जिगर करके उसने शीशे में देखा।
पीछे कोई नहीं था… सड़क पूरी खाली।

रवि अब थोड़ा परेशान हो चुका था, बाइक की स्पीड बढ़ा दी।
शहर की लाइटें नज़र आने लगीं तो उसने चैन की सांस ली, तभी तीसरा मैसेज आया – “मत भागो… मैं तो शुरू से तुम्हारे पीछे ही बैठा हूँ।”

इस बार मैसेज के साथ एक फोटो भी थी।
फोटो में वही सड़क, वही समय, और रवि की बाइक – लेकिन पीछे की सीट पर एक काला साया साफ़ दिखाई दे रहा था, जो धीरे–धीरे कैमरे की तरफ मुस्कुरा रहा था।

रवि ने डर के मारे अचानक ब्रेक लगा दिए, बाइक फिसली और वह सड़क के बीचों–बीच गिर गया।
होश आने पर उसने इधर–उधर देखा – आस–पास कोई नहीं, बस उसका मोबाइल थोड़ा दूर घास पर पड़ा था।

वह घिसटते हुए मोबाइल के पास पहुँचा, स्क्रीन उठाकर देखा तो आखिरी नोटिफिकेशन चमक रहा था –
“Screenshot saved: ‘Last Scene.jpg’ ”

और नीचे छोटा सा टेक्स्ट खुद ब खुद टाइप हो चुका था –
“Next victim is reading this story right now…”

“अगर आखिरी लाइन तक पढ़ लिया… तो आज रात शीशे में ज़रूर देखना।
District & Sessions Court, Mewat at Nuh रेल जानकारी
#कहानी

बहुत दिनो से स्कूटी का उपयोग नही होने से, विचार आया Olx पे बेच दे..।कीमत Rs 30000/- डाल दीबहुत आफर आये 15 से 28 हजार तक।...
13/11/2024

बहुत दिनो से स्कूटी का उपयोग नही होने से, विचार आया Olx पे बेच दे..।
कीमत Rs 30000/- डाल दी
बहुत आफर आये 15 से 28 हजार तक।
एक का 29 का प्रस्ताव आया।
उसे भी waiting में रखा।
कल सुबह एक कोल आया। उसने कहा-
"साहब नमस्कार 🙏 ,
आपकी गाडी का add देखा। पसंद भी आयी है। परंतु 30 जमाने का बहुत प्रयत्न किया, 24 ही इकठ्ठा कर पाया हूँ। बेटा इंजिनियरिंग के अंतिम वर्ष में है। बहुत मेहनत किया है उसने। कभी पैदल, कभी सायकल, कभी बस, कभी किसी के साथ। सोचा अंतिम वर्ष तो वह अपनी गाडी से ही जाये। आप कृपया स्कूटी मुझे ही दिजीएगा। नयी गाडी मेरी हैसियत से बहुत ज्यादा है। थोडा समय दिजीए। मै पैसो का इंतजाम करता हूँ। मोबाइल बेच कर कुछ रुपये मिलेंगें। परंतु हाथ जोड़कर कर निवेदन है साहब,मुझे ही दिजीएगा।"
मैने औपचारिकता में मात्र Ok बोलकर फोन रख दिया।
कुछ विचार मन में आये।
वापस काल बैक किया और कहा
"आप अपना मोबाइल मत बेचिए, कल सुबह केवल 24 हजार लेकर आईए, गाडी आप ही ले जाईए वह भी मात्र 24 में ही"
मेरे पास 29 हजार का प्रस्ताव होने पर भी 24 में किसी अपरिचित व्यक्ति को मै स्कूटी देने जा रहा था।
सोचा उस परिवार में आज कितने आनंद का निर्माण हुआ होगा।
कल उनके घर स्कूटी आएगी।
और मुझे ज्यादा नुकसान भी नहीं हो रहा था।
ईश्वर ने बहुत दिया हैं और सबसे बडा धन समाधान हैं, जो कूट-कूटकर दिया हैं।
अगली सुबह उसने कम से कम 6-7 बार फोन किया
"साहब कितने बजे आऊ, आपका समय तो नहीं खराब होगा। पक्का लेने आऊं, बेटे को लेकर या अकेले आऊ। पर साहब गाडी किसी को और नहीं दिजीएगा।"
वह 2000, 500, 200, 100, 50 के नोटों का संग्रह लेकर आया था। साथ में बेटा भी था। ऐसा लगा, पता नहीं कहां कहां से निकाल कर या मांग कर या इकठ्ठा कर यह पैसे लाया हैं।
बेटा एकदम आतुरता और कृतज्ञता से स्कूटी 🛵 को देख रहा था। मैने उसे दोनो चाबियां दी, कागज दिये। बेटा गाडी पर विनम्रतापूर्वक हाथ फेर रहा था। रुमाल निकाल कर पोछ रहा था।
उसनें पैसे गिनने को कहा। मैने कहा आप गिनकर ही लाये हैं, कोई दिक्कत नहीं।
जब जाने लगे, तो मैने उन्हे 500 का एक नोट वापस करते कहाँ, घर जाते मिठाई लेते जाएगा। सोच यह थी कि कही तेल के पैसे है या नही। और यदि है तो मिठाई और तेल दोनो इसमें आ जायेंगे।
आँखों में कृतज्ञता के आंसु लिये उसने हमसे विदा ली और अपनी स्कूटी 🛵 ले गया। जाते समय बहुत ही आतुरता और विनम्रता से झुककर अभिवादन किया। बार बार आभार व्यक्त किया।
दोस्तो जीवन में कुछ व्यवहार करते समय नफा - नुकसान नहीं देखना चाहिए।
अपने माध्यम से किसी को क्या सच में कुछ आनंद प्राप्त हुआ यह देखना भी होता हैं।

" COPIED "

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Nuh
122107

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