Stars of Mewat - SOM

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मेवात का स्टार... परवेज़ चाहल्का...💐💐💐
18/08/2023

मेवात का स्टार... परवेज़ चाहल्का...💐💐💐

15/06/2023



मेवाती बच्चों ने नीट 2023 की परीक्षा में झंडे गाड़े हैं।

नहीं तेरा नशेमन क़स्र-ए-सुल्तानी के गुम्बद पर,
तू शाहीं है बसेरा कर पहाड़ों की चटानों में...!!

1.मोहम्मद आदिल भाकड़ौजी झिरका - 685/720
2.फहीम अहमद अगोन झिरका -660/720
3.सानिया तैय्यब धनेटा अलवर - 660/720
4.शाजिया बालोत वहाबपुर ठेरा - 651/720
5.कौशर खान नगीना नूंह - 650/720
6.मुहम्मद जहीर लूहिंगा कलां नूंह -650/720
7.सोहेल खान कफनवाड़ा अलवर - 646/720
8.अफशां पाटखोरी झिरका -642/720
9.मोइन खान खेड़ला नूंह - 641/720
10.शाहबाज खान धीरियाबास अलवर -637/720
11.तंजीम खान (Girl) तिघरा झिरका - 636/720
12.मोहम्मद सोहिम गांव नईं नूंह - 636/720
13.सफीन नियाज सराय खटेला पलवल -626/720
14.अहसान खान मेवली नूंह - 625/720
15.सोहा अली खान अहमदपुर अलवर -625/720
16.तबस्सुम खान चांदूकी अलवर -621/720
17.तस्लीम अहमद जोतरी भरतपुर - 620/720
18.आफताब फिरोजपुर झिरका नूंह - 620/720
19.रोबिन खान इंदपुर अलवर - 620/720
20.असपाक खान नंगला धनसिंह अलवर -610/720
21.सोनिया आलम ठेकड़ी झिरका -607/720
22.शाहनवाज खान चंदेनी नूंह - 602/720
23.परवेज आलम चंदेनी नूंह - 601/720

सभी को उज्ज्वल भविष्य की सुभकामनाये

 Congratulations to Rounak Afroz D/o Dr. Arshad Adbar (Mewat) for the great achievement..💐💐💐..!She got admission in the ...
14/06/2023


Congratulations to Rounak Afroz D/o Dr. Arshad Adbar (Mewat) for the great achievement..💐💐💐..!

She got admission in the LLB (Barrister) course in London, UK...!

मेवात के बढ़ते कदम

 #मुहम्मद_आदिल s/o खलील फिरोजपुर झिरका।NEET UG 2023 मै 685 नंबर All India Rank 1072OBC Rank 270Stars of Mewat - SOM की त...
14/06/2023

#मुहम्मद_आदिल s/o खलील फिरोजपुर झिरका।

NEET UG 2023 मै 685 नंबर
All India Rank 1072
OBC Rank 270

Stars of Mewat - SOM की तरफ से मेवाती सपूत को बहुत-बहुत मुबारकबाद और भविष्य के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं....💐💐💐

Many Congratulations to Aakip khan...💐💐💐
23/05/2023

Many Congratulations to Aakip khan...💐💐💐

04/10/2022

ज़रा याद करो क़ुर्बानी ---------------------------------19 सितम्बर 1990 को 92 साल की उम्र  में देश  के  स्वतंत्रता  सेनानी...
19/09/2022

ज़रा याद करो क़ुर्बानी
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19 सितम्बर 1990 को 92 साल की उम्र में देश के स्वतंत्रता सेनानी जनाब हाजी मंगल खान मेवाती साहब इस दुनिया ए फ़ानी से रुख़सत हुए थे।

हाजी मंगल खान मेवाती, जनाब नूरदीन नूर एडवोकेट साहब के वालिद साहब थे...!

आइये, जानते हैं जनाब हाजी मंगल खान मेवाती साहब के बारे में ---

बात स्वतंत्रता संग्राम के दौर की है। कलकत्ता के निकट जगरगच्छा जेल स्वतंत्रता संग्रामियों के प्रताड़ना का अड्डा थी। उस दौर में मंगल खान मेवाती के साथ जगरगच्छा जेल में 56 क्रांतिकारियों को कैद कर रखा था। कैदी किए हुए 56 स्वतंत्रता संग्रामियों को रोटी दी नही जातीं थी बल्कि कुत्ते बिल्लियों की तरह उनके सामने फैंकी जाती थी।

एक दिन फिरंगी अधिकारी निरीक्षण पर आया तो वह उनकी बैरक तक भी पहुंचा। ‘औह…दीज आर दी ब्रेव इंडियन ?’ फिरंगी अधिकारी नें मुंह बनाते हुए पीछे खडे अपने पिठ्ठुओं से पूछा। तो पीछे से आवाज आई ‘यस सर’। फिरंगी अफसर के दोनों हाथ बैरक के गेट में लगी लोहे की सलाखों पर थे। बैरक में बंद कैदी उसके इरादों को भांप व समझ चुके थे। हूं..इंडियन ब्रेवज ? काना कैसा मिलते हैं ? फिरंगी का यह सवाल सुन कर खून खोल गया। उसने खडे होने का प्रयास किया , परन्तु साथी बडे अफसर ने हाथ दबा दिया। फिरंगी मानने वाला कहां था , उसने फिर कहा ‘एह..अमने पूचा , काना कैसा मिलते है ?’ उसका चेहरा लाल हो गया। खडा होने लगा तो उसी अफसर ने फिर हाथ दबाने का प्रयास किया , परन्तु इस बार उसने अपने अफसर के आदेश को भी मानने से इंकार कर दिया और खडा हो गया फिरंगी अधिकारी के सामने। फिरंगी अधिकारी का घमंड चूर चूर हो गया और उसका चेहरा , गुस्से में तमतमाने लगा। ‘बोलो..बोलो ..काना कैसा मिलते हैं ?’

फिरंगी अधिकारी ने जैसे ही यह सवाल सामने खडे उस नौजवान कैदी से किया तो उसने जोर से खखार कर फिरंगी अधिकारी के मुंह पे थूक दिया। दांत पीसते हुए कहा ‘काना ऐसे मिलते हैं।’ साथ मे कैद अधिकारी ने डांटते हुए जोर से कहा ‘ मंगल खान , यह ठीक नही किया। तुम कहीं भी मेवातीपन से बाज नही आते।’ मंगल खान, साहब की तरफ देख मंद मंद मुस्कुरा रहे थे। बैरक में सभी कैदियों की चिंता बढनी लाज़मी थी और बाहर ‘इंडियन ब्रेव’ की हरकत से हल्ला मच गया। तरह तरह की आवाजें आ रही थी ‘बाहर निकालो इन्हें’। ‘सबक सिखाओ इनको’ ‘इतना मारो कि भारत का नाम भी न ले पाएं’। उसके बाद जो हुआ आप समझ सकते हैं ।

बस..यह मंगल खान कोई और नही ,दिल्ली से सटे हरियाणा के मेवात जिले के खंड नूंह के गांव खेडला में जन्मा, भारत मां का एक सच्चा सपूत था। मंगल खान मेवाती का जन्म 1-10-1898 को गांव के एक साधारण व गरीब से किसान नवाज खां के घर मे हुआ। 1924 मे वे ब्रिटिश सेना में भर्ती हुए। बाद में बाबू सुभाष चन्द्र बोस के आह्वान पर ब्रिटिश सेना से बागी हो कर आजाद हिन्द फौज में चले गए।

आजाद हिन्द फौज में , वे शाहनवाज बटालियन में सैकिंड लैफ्टिनेंट बने। जनरल शाह नवाज खान के नेतृत्व में उन्होनें रंगून , पोपाहिल , मेकटौला , नागा-साकी , इंडोग्राम , ब्रहमइंफाल जैसे असंख्य मोर्चों पर अपनी बहादुरी के जौहर दिखाए। अदम्य साहस के बलबूते पर वे बाबू सुभाष चन्द्र बोस की निजि सीकरेट सर्विस के इंचार्ज बनाए गए। लंबी लडाई के बाद बाबू जी के आदेश पर समूची आई० एन० ए० ने आत्म समर्पण कर दिया। 36 हजार की फौज में से 56 फौजियों की शनाख्त कर छांट लिया गया , जिन्हें कलकत्ता के निकट जगरगच्छा (अब बंगलादेश में) जेल में डाल दिया गया। जगरगच्छा जेल की यातनाओं के बाद फिर छटनी की गई, तो 16 जांबाजों को दिल्ली लाकर, लाल किला में कैद कर दिया गया। जिनमें मुख्य तौर पर जनरल सहगल, जनरल शाहनवाज खान, कर्नल ढिल्लों, सैकिंड लेफ्टिनेंट मंगल खान आदि शामिल थे।

इन 16 सपूतों पर फिरंगियों ने विभिन्न धाराओं मे मुकदमें दर्ज किए। जघन्य अपराधों में कथित रूप से लिप्त इन खूंखार ‘अपराधियों’ के केसों की सुनवाई के लिए लाल किला में ही ग्यारह जजों की बैंच (अदालत) स्थापित की गई। लगभग तीन साल चले मुकदमों में विभिन्न सजाएं सुनाई गईं। अपीलें हुईं। अंत में पंडित जवाहर लाल नेहरू नें ‘लाल किला ट्रायल’ में उक्त कथित अभियुक्तों की पैरवी की और ये वतन के सिपाही , भारत मां की स्वतंत्रता के साथ आजाद हो गए। अपनी बकिया जिंदगी उसी खुद्दारी और सादगी से जीते हुए 19 सितंबर 1990 को इस दुनिया ए फानी से कूच कर गए। परवर दिगार जन्नत उल फिरदोस में उन्हें आला मकाम अता करे। आमीन.

दोस्तों,
आज जम्हूरी निज़ाम है मगर ज़ुल्मों सितम का दौर अब भी जारी है, हम को इबरत मिलती है अपने बुजुर्गो से कि जिन्होंने ज़ुल्म का विरोध करते हुए अंग्रेज़ के मुँह पर थूका था। अफ़सोस कि आज कि पीढ़ी ज़म्हूरी तरीकों से भी संघर्ष नहीं कर पा रही है, कब तक ये पस्ती और बेहिसी का दौर रहेगा...??

माज़ी में अपना एहतजाज़ इतिहास के पन्नों में दर्ज करा चुके हमारे बुज़ुर्ग हम से सवाल करते हैं ---

"तारीख़ पढ ले अपनी, तू ही रहा है गाज़ी
दिल में करे जो नीयत, फिर हाथ में तेरे बाज़ी

भारत का अगला पन्ना, तू कब लिखेगा
संघर्ष ज़िन्दगी है, करना इसे पड़ेगा,

जो संघर्ष से डरेगा, आगे नहीं बढेगा"

एक आवाज़ ए बाजगश्त
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असद हयात सर

आप गूगल से कोई सवाल करते हैं वह सवाल के जवाब की तलाश में जो वक्त लेता है उसे सर्वर रिस्पांस टाइम कहते हैं।गूगल इसके लिए ...
18/09/2022

आप गूगल से कोई सवाल करते हैं वह सवाल के जवाब की तलाश में जो वक्त लेता है उसे सर्वर रिस्पांस टाइम कहते हैं।

गूगल इसके लिए बेहतरीन सिस्टम का इस्तेमाल कर सवाल के हिसाब से जवाब मैच करके आपके लिये लाइन अप करता है इस काम के लिये आधे से एक सेकेंड का वक्त इस्तेमाल करता है और बड़े घमंड से जवाब से पहले आपको बताता है कि आपके लिए मैने यह जवाब छ: सौ पचास मिली सेकेंड में
तलाश किया है ---

शोएब अख्तर या ब्रेट ली बालिंग कर रहे हैं सामने सचिन तेंदुलकर है गेंद एक सौ पचास किमी / घंटे के हिसाब से फेंकी गई विकेट की लम्बाई बीस दशमलव एक दो मीटर है
एक तरफ से दोसरी तरफ पहुँचने में बाल को चार सौ अस्सी मिली सेकेंड लगेगी गेंद को बींच पिच पर टप्पा दिया गया तब बैट्समैन को एहसास होता है कि यह बाउंसर है और बैठ जाता है गेंद सर के उपर से गुजर जाती है इस वक्त उसके पास
दो सौ पचीस मिली सेकेंड यानि एक सेकेंड का करीब एक चौथाई वक्त बचता है -!
इस एक चौथाई सेकेंड से भी कम वक्त में इंसानी जिस्म क्या क्या कारनामा अंजाम देता है सबसे पहले आँख गेंद को देखती है और यह बात दिमाग तक पहुँचती है दिमाग कहता है बाउंसर आ रही शाट लगाना जोखिम भरा है बैठ जाने में ही भलाई है
इस फैसले के बाद दिमाग के छियासी अरब तान्त्रिक कोशिकाओं में से कुछ लाख सूचना देने में लग जाती है
और पता करती हैं कि कौन सा मसल्स किस पोजीशन में है
सब सूचनाएं दिमाग तक पहुँचती है तब दिमाग तान्त्रिक कोशिकाओं के जरिए मेरुरज्जु (हराम मगज) को सिग्नल देता है मेरुरज्जु यह सिग्नल नीचे की कोशिकाओं तक पहुचाता है और मसल्स को अलग अलग हिदायत जारी होता है जो सारे सिस्टम से होते हुए आखरी सिरे पर एक कैमिकल acetylcholine पैदा किया जिसने मसल्स तान्त्रिक कोशिका जंकशन पर अमल करके मसल्स को जो खिंचाव चाहिए वह जारी कर दिया--

जब बैट्समैन बैटिंग पोजीशन से बैठी हुई हालत में पहुंचा तब करोड़ों नही अरबों अम्ल (क्रिया) एक सेकेंड के एक चौथाई से भी कम वक्त में अंजाम पाये --!!
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कसम खुदा की आप अपने आपको ठीक से नही जानते आप ह्यूमन नही सुपर ह्यूमन हैं उस ख़ालिक की सबसे सुन्दर रचना हैं अपनी ताकत को पहचानते हुए अपने हिस्से की खुशियाँ छीन लीजीए खुदा की कसम आप कर सकते हैं 🙏

एक उर्दू लेख से-- अकलीम हैदर
वाया: जैद पठान

इस बच्ची का नाम "मारवा" है उम्र 10 साल है यह बच्ची मिस्र के असवान शहर में सड़कों पर  टिश्यू पेपर बेचती है।एक दिन वो रोज़...
18/09/2022

इस बच्ची का नाम "मारवा" है उम्र 10 साल है यह बच्ची मिस्र के असवान शहर में सड़कों पर टिश्यू पेपर बेचती है।

एक दिन वो रोज़ की तरह अपने काम पर थी दौड़ दौड़ कर अपने टिशु पेपर बेचने के लिए मेहनत कर रही थी एक जगह उसने देखा की वहां बच्चों के लिए मैराथन दौड़ का आयोजन हो रहा है वो दौड़ कर वहां पहुंची और किसी से पूछा क्या वो भी इस रेस में हिस्सा ले सकती है ?

हालांकी की उसके पास इंट्री फीस के पैसे भी नहीं थे जो की 200 पाउंड थी और ना ही उसके पास ड्रेस थी और ना ही रेसिंग शूज़ थे लेकिन वो भाग लेना चाहती थी आयोजक इसकी मासूमियत देखकर उसे मना नहीं कर पाए उसने रेस में भाग लिया और बिना जूतो के ही दौड़ी ठीक वैसे ही जैसे रोज़ सड़कों लोगो के पीछे टिशू बेचने के लिए दौड़ती है।

उसे लगता था वो आसमान की की तरफ दौड़ रही है वो फिनिश लाइन को गले लगाना चाहती थी
आयोजको और दर्शकों की हैरत का ठिकाना नहीं था वो लड़की जो नं'गे पैर दौड़ रही थी वो सबको पीछे छोड़ चुकी थी और अब गोल्ड मैडल उसका था।

उसने अपनी कमियों को और हालतो को अपने ऊपर हावी नही होने दिया उसने विश्वास बनाए रखा और अपने लक्ष्य को पूरा किया।

Bravo Golden Girl

1947 में आजादी के वक्त की ऐतिहासिक तश्वीर, नूंह (मेवात)...!
17/09/2022

1947 में आजादी के वक्त की ऐतिहासिक तश्वीर, नूंह (मेवात)...!

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