27/09/2019
*जो लोग बहन जी की नितियों और उनके प्रतिनिदित्व पर सवाल उठा रहे हैं वे इस पोस्ट को एक बार जरूर पढ़े*
साथियो जब आपका जन्म भी नहीं हुआ था तब से मामनीय बहन जी ने समाज के लिये संघर्ष करना सुरू कर दिया था, इसमें उनका कोई व्यक्तिगत लालच या राजनितिक लालच नहीं था, जब बसपा की सुरूआत भी नहीं हुई थी तब मा. काशीराम जी दिस०1977 में आधी रात उनके घर मिलने के लिये गये थे, उन्हें प्रेरित किया इस समाज को न्याय दिलाने के लिये, साथियो यकीन मानना आज के हिसाब से उस समय यकीन करना भी असंभव था कि हम कभी सत्ता में भी आ सकेगें, और दोनों ने कड़ी मेहनत की और असंभव को संभव कर के भी दिखाया, जो लोग पुराने है वे भली भांति जानते है कि बहन जी ने मान्यवर साहब के साथ मिलकर कितनी मेहनत की है पार्टी को बनाने में उनके बगैर यहां तक पहुँचपाना असंभव सा ही था। 1984 में जब पार्टी बनी तो बहन जी ने पूरी मेहनत और इमानदारी के साथ पार्टी को आगे बढ़ाया,ब्लैक बोर्ड पर कैडर और रात को लालटेन में सभाएं कीं तब बनीं बसपा की चार-चार बार सरकारें,जो लोग साल छह महीने में ही बहनजी की जगह पहुँचना चाहते हैं उन्हे जिन रास्तों से चलकर बहनजी यहां तक पहुंची है, उसकी जानकारी शायद उन लोगों को नहीं है, टीवी के सामने बैठ कर सलाह देने में मस्त हैं, अभी भी वक्त है सुधर जाओ नहीं तो पूरी जिंदगी इसी अफ़सोस में गुजर जायेगी कि रास्ता क्यूँ भटके और ये कहां पहुंच गए। यह तस्वीर जो मेनें लगाई है 1982 में सहारनपुर हुई एक सभा की है जब DS-4 समाज को अन्याय के विरुद्ध खड़ा कर रहा था, गाँव गाँव जाकर बहन जी ने समाज को जगरूक किया, उनके दुख दर्द में सामिल हुईं,तब जाकर सत्ता का शिखर मिला। मा. काशीराम जी ने भी उनकी योग्यता को देखकर ही बसपा का उत्तराधिकार दिया, और ये नाकारा निकम्मा समाज आज बहन जी को ज्ञान दे रहा है उन्हें सड़क पर संघर्ष करने की नसीहत दे रहा है,क्यों करें वो सड़क पर संघर्ष और किसके लिऐ करें ?अरे जब आपके माँ-बाप बूढ़े हो जाते है तो ये आपका दायित्व बनता है कि आप उनकी सहायता करें उनकी लाठी बनें न कि उनको और मेहनत कर खुद घर में बैठ कर सलाह देने का। बहन जी की देन है कि संविधान सुरक्षित रहा, आपके अधिकार सुरक्षित रहे। मत दो आप बहन जी का साथ मत करो समाज के लिऐ संघर्ष मैं पूरे यकीन के साथ कह सकता हूँ आपकी आने वाली पढी़ इसका खामियाजा भुगतेगी...!!!
जय भीम...!!!