Sanki for nature

Sanki for nature जल है तो कल है पेड लगाओ जीवन बचाओ। We are here to present what human have done to nature n how can we make it a better place to live at?

05/08/2025

😓😓
मानव नहीं सुधरेगा पेड़ और पहाड़ काटने ज़ब तक बंद नहीं होंगे यही होगा

05/08/2025

हे प्रभु सब पर दया करना..

05/08/2025

Welcome to the Year 2040 — Where the cities are polluted with plastics The future is already choking. Our lakes, cities, and oceans are drowning in the plastic we throw away every day. This isn’t sci-fi. This is 2040 if we don’t act now. 🚫 Say no to single-use plastic 🫁 Say yes to a breathable future

05/08/2025

शंभू दया करें 🙏

Sikkim is not just a destination — it’s an inspiration! 🌿Here, tourists sip water from bamboo bottles instead of plastic...
31/07/2025

Sikkim is not just a destination — it’s an inspiration! 🌿
Here, tourists sip water from bamboo bottles instead of plastic ones.
India’s first fully organic state is showing the world how tradition and sustainability can walk hand in hand. 💚🇮🇳

कोई मोची नहीं बोलेगा समझे 😎😂
19/07/2025

कोई मोची नहीं बोलेगा समझे 😎😂

खुद के लिए ना सही 😊इनके लिए पेड़ लगायें 🙏🏽
18/07/2025

खुद के लिए ना सही 😊
इनके लिए पेड़ लगायें 🙏🏽

05/04/2025

वाह रे मानव 🙏😓

यूफोरबिया हर्टा (जिसे कभी-कभी अस्थमा-पौधा कहा जाता है) भारत में पायी जाने वाली एक उष्णकटिबंधीय खरपतवार है। यह एक बालों व...
04/04/2025

यूफोरबिया हर्टा (जिसे कभी-कभी अस्थमा-पौधा कहा जाता है) भारत में पायी जाने वाली एक उष्णकटिबंधीय खरपतवार है। यह एक बालों वाली जड़ी बूटी है जो खुले घास के मैदानों, सड़कों और मार्गों में बढ़ती है। इसका उपयोग पारंपरिक हर्बल दवा में किया जाता है।

🐒                🐒 बंदरों को खाना खिलाना फ़ायदे की बजाय नुक़सान पहुँचा रहा है। 👉            जब बंदर प्राकृतिक भोजन जंगल ...
03/10/2024

🐒 🐒 बंदरों को खाना खिलाना फ़ायदे की बजाय नुक़सान पहुँचा रहा है।

👉 जब बंदर प्राकृतिक भोजन जंगल के फल , फली ,फूल पत्तियाँ आदि खाते हैं तो वे स्वस्थ रहते हैं।इससे स्वस्थ वन परिस्थिति तंत्र भी बना रहता है , जो बीज फैलाने की प्रक्रिया में सहायक है।

बल्कि बंदरों 🐒 को खाना देकर हम उन्हें आलसी बना रहे हैं।उनके खाने की तलाश में विचरण करना , उछल कूद करना बंद हो गया क्योंकि उन्हें भोजन तय समय पर मिलने लगा।उनका प्राकृतिक स्वभाव उछल कूद, पेड़ों पर छलांग लगाना बंद हो रहा है।
वे अपने दम पर भोजन की तलाश बंद कर देते हैं। बल्कि वे अपना भोजन शहरी कूड़े कचरे में तलाश करते हैं।
प्राकृतिक भोजन से 🐒 बंदर की पानी की पूर्ति हो जाती है,जबकि इंसानों के द्वारा उपलब्ध भोजन पानी की पूर्ति नहीं करता।वे दूषित पानी पीते हैं

जिससे वे गंभीर बीमारियों से पीड़ित हो रहे हैं।
हम उन्हें आसानी से भोजन तो देने लगे परंतु उनके बीमार होने की स्थिति में उन्हें चिकित्सा उपलब्ध नहीं कराते।

उनका भोजन पैटर्न बदल गया।अब वे कमजोर और बीमार होते हैं।

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 एवं पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत भी बंदरों 🐒 को खाना खिलाना सख़्त रूप से वर्जित है।क़ानून का उल्लंघन होने पर सजा और जुर्माना दोनों का प्रावधान है।
अत: आप अपनी श्रद्धा भाव , आस्था या पशु प्रेमी होने के कारण बंदरों 🐒 को जो भोजन देते हैं वह क़ानून के उल्लंघन के साथ-साथ उनके स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक कारक हैं।
इस पोस्ट का मतलब आपको जागरूक करना है, आप अपने विवेक अनुसार निर्णय करें।

दिल्ली हाई कोर्ट ने भी 30 सितंबर 2024 के आर्डर में कहा है कि 🐒 बंदरों को खाना खिलाना बंद करें।एजेंसियाँ सख़्त उठाए।

19/06/2024

जनवरी 1990 में ओशो नहीं रहे, लेकिन उनकी किताबों में लिखी हुई बातें आज कितनी सटीक है - वृक्षों की भाषा को बादल समझते हैं ❤️

इस मॉडल को हर ग्राम प्रधानों को अपने गावँ में विकसित करना चाहिये.आपकी क्या राय हैं इस बारे मे बताये
17/06/2024

इस मॉडल को हर ग्राम प्रधानों को अपने गावँ में विकसित करना चाहिये.
आपकी क्या राय हैं इस बारे मे बताये

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