21/05/2024
भारत को द्विपक्षीय चुनाव प्रणाली मे धकेलने की मनुवादी मीडिया के जरिये लगातार कोशिशें की जा रही हैं। मतलब देश में दो पार्टियाँ या दो ग्रुप ही हो, इन्हीं में से किसी एक की सरकार बननी चाहिये । क्या भारत की विविधताएं भी इन्ही दो ग्रुपों में जाकर सिमट सकती हैं। इस देश में किसानों की समस्याओं पर, दलितों की समस्याओं पर, आदिवासियों की समस्याओं पर, भुमिहीनो की समस्याओं पर, जातिवाद के मुद्दे पर, धर्म के आधार पर नफरत के मुद्दे पर, अल्पसंख्यकों की समस्याओं पर, अति पिछड़े वर्ग की जातियों की समस्याओं पर, आरक्षण के मुद्दे पर इन दो दलो या ग्रुपों की सोच क्या हैं, क्या इनको इग्नोर करके देश के सभी वर्गो और जातियों का विकास संभव हो सकता हैं ?
कारपोरेट जगत का लाखो करोड़ों का लोन माफ करके जनता पर टैक्सो का बोझ लाद देना या लोगों का बैंको में रखे पैसे पर कम ब्याज देकर पैसा लुट लेना ये बेरोकटोक जारी ही रहेंगा ' ये क्या कारपोरेट जगत से अरबो रुपये का चंदा लेने वाले दल उनके खिलाफ खड़े होकर फैसला ले पायेंगे, इतना आसान तो नहीं दिखता?
देश के कई राज्यों मे आदिवासी समाज कारपोरेट से जंगल बचाने की कोशिशो में हैं, क्या द्विपक्षीय चुनावी प्रणाली इसके समाधान की तरफ एक भी कदम चलती नजर आ रही हैं। सरकारों की 5 साल बाद अदला बदली हो जाती हैं लेकिन देश के तकरीबन इलाको मे दलित आदिवासी अति पिछड़े व अल्पसंख्यक समाज की समस्याएं यूँ ही मुँह चिढ़ाते नजर आती हैं, कारण क्या हो सकता हैं ?
हमारे देश की जनता युरोपियन या अमेरिकन लोगो की तरह पोलिटिकली जागरूक नहीं हैं, सीखने की गति बहुत ही धीमी हैं, क्या द्विपक्षीय चुनावी प्रणाली बची खुची उम्मीदें खत्म नहीं कर देगी, ये सोचने का विषय हैं।
बहुपक्षीय चुनाव प्रणाली के अपने नुकसान भी हैं लेकिन इतनी गहरे मतभेदो और विविधता वाले देश में द्विपक्षीय चुनावी प्रणाली सब कुछ कारपोरेट मीडिया और कारपोरेट के हितो में नहीं पहुंचायेगी, इसकी क्या गारंटी हैं। देश के असली मुद्दो पर बहस न कराकर साल भर जनता को मुर्ख बनाए रखने में जनता का फायदा तो नहीं हैं, फिर किसका फायदा है? NCLT किसी कम्पनी का 50 हजार करोड़ का कर्ज 500 करोड़ कर देती हैं और सीधा धन्ना सेठो को फायदा पहुँचा देती हैं, आपको पता तक नही चलता कि 45500 करोड़ आपसे ही वसुले जाते हैं । जब ये तक नही पता चलता तो फिर द्विपक्षीय चुनावी प्रणाली के नुकसान कैसे पता चलेंगे? चलिये सो जाइये, किसी की नींद में खलल डालना पाप हैं।
अखिल भारतीय परिवार पार्टी