भारत भूमि हमारे पूर्वजो की भूमि है| हमारे सभी अवतारों का जन्म इसी भूमि पर हुआ है|हमारे सभी तीर्थ इस पवित्र भूमि पर है | भारत भूमि हामारी माता है | विदेशी षडयंत्र से भारत माता , इसके वैभव और संस्कृति की रक्षा करना,हम भारत की सनातन संतानों का प्रथम कर्तव्य है|
हे मेरी भारतमाता , मेरी पवित्र जन्म भूमि| तुझे प्रणाम| हे माँ| तूने मुझे वैभव सम्पति से भरपूर, फूलो, फ्लो, फसलों से पूर्ण, सम्पूर्ण हिमालय का
क्षेत्र, भूमि के तीनो ओर समुन्द्र व् साथ के द्वीप व् भूमि दी | सिन्धु-गंगा-यमुना आदि का अमृत जल दिया| तेरी गायो का दूध पीकर मै बल-बुधि में श्रेष्टतम बना, तेरे बैलो द्वारा उत्पन्न अन्न खाकर पुष्ट हुआ दीर्घायु हुआ | हे जन्मभूमि | पितृभूमि तीर्थ भूमि , अवतार भूमि तुझे कोटि-कोटि प्रणाम|
मुझ से पहले जन्मी तेरी सनातन सुसन्तानो तुझे विश्वगुरु बनाया, विश्व विजेता बनाया| तेरी संस्कृति संस्कारो ने पूरी पृथ्वी के लोगो को मानवता का पाठ पढाया, जीना सिखाया, पर मै तेरे वैभव तेरी सीमओं को सुरक्षित नहीं रख पा रहा हु | मैंने पृथ्वीराज चौहान, महाराणाप्रताप , छत्रपति शिवाजी महाराज ,गुरु तेंगबहादुर, गुरु गोविन्दसिंह, उनके चार पुत्रो, वीर बन्दा बौरागी, हकीकतराय , स्वामी श्रधान्न्द, वीर सावरकर, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद आदि वीरो का साथ नहीं दिया|
मै उनलोगों के साथ खड़ा होगया जिन्होंने १९४७ मे अपनी ही पवित्र माता की छाती पर एक विधर्मी शत्रु राष्ट्र खड़ा कर दिया|मुझे क्षमा करना मेरी जन्मभूमि भारतमाता| मै आज संकल्प लेता हूँ कि तुझे फिर से विश्वगुरु बनाऊगा| फिर से अखंड भारत वर्ष का पुराना रूप दिल्वाऊंगा, सम्पूर्ण हिमालय, समुन्द्रो की सम्पति-सीमा तेरी जल, तेरी भूमि, तेरा वैभव , तेरी भाषा संस्कृत, तेरी संस्कृति की रक्षा वैसे ही करूँगा जैसे त्रेता में भगवान् श्रीराम ने द्वापरयुग में भगवान श्री कृष्ण , भीम-अर्जुन ने की थी, तेरे चरणों की शपथ है, मै यह संकल्प पूरा करूँगा
वंदेमातरम्