11/09/2026
उत्तर प्रदेश में योजनाएँ बहुत हैं, लेकिन आम आदमी तक लाभ क्यों नहीं पहुँचता?
उत्तर प्रदेश में सरकार की योजनाओं की कमी नहीं है। कागजों पर हर वर्ग के लिए योजनाएँ दिखाई देती हैं, लेकिन हकीकत यह है कि आम आदमी के लिए इन योजनाओं का लाभ लेना आज भी बेहद मुश्किल है।
सरकारी नौकरियों की वैकेंसी निकलती हैं, आउटसोर्सिंग की भर्तियाँ भी आती हैं, लेकिन ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया ही इतनी खराब है कि कभी वेबसाइट पर लॉगिन नहीं होता, लॉगिन हो जाए तो सर्वर व्यस्त रहता है और कभी तकनीकी समस्या सामने आ जाती है। सवाल यह है कि जब युवा आवेदन ही नहीं कर पाएगा तो उसे रोजगार का लाभ कैसे मिलेगा?
दूसरी तरफ सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी आम होती जा रही है। आदमी किसी भी विभाग में चला जाए, उसे अपना काम करवाने के लिए अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है और कई जगह रिश्वत की मांग की जाती है।
सबसे बड़ा सवाल प्रशासन की जवाबदेही का है।
अगर अधिकारी और कर्मचारी यह समझने लगें कि उनके खिलाफ कार्रवाई का कोई डर नहीं है, तो भ्रष्टाचार को रोकना मुश्किल हो जाएगा। प्रशासन को कानून के अनुसार काम करने की पूरी स्वतंत्रता होनी चाहिए, लेकिन उसके साथ जवाबदेही और सख्त निगरानी भी जरूरी है।
माननीय मुख्यमंत्री जी का ध्यान प्रदेश के विकास के अनेक मुद्दों पर है, लेकिन सबसे पहले आम आदमी को भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी से राहत मिलनी चाहिए।
जिस व्यक्ति की रोज की कमाई ₹100 या ₹500 है, उससे अपना काम करवाने के लिए हजारों रुपये की रिश्वत मांगना केवल भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि गरीब और आम आदमी के साथ अन्याय है।
सरकार को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए कि—
- सरकारी कार्यालय में बिना रिश्वत के काम हो।
- योजनाओं का लाभ वास्तव में पात्र व्यक्ति तक पहुँचे।
- भर्ती पोर्टल तकनीकी रूप से मजबूत और जवाबदेह हों।
- आवेदन के समय सर्वर और लॉगिन की समस्या के कारण किसी युवा का अवसर न छिने।
- अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय हो।
- रिश्वत मांगने वालों के खिलाफ त्वरित और कठोर कार्रवाई हो।
सरकार की योजनाओं की सफलता विज्ञापनों और कागजों से नहीं, बल्कि आम आदमी की जिंदगी में आए बदलाव से मापी जानी चाहिए।
**आम आदमी को योजनाएँ नहीं, उनका वास्तविक लाभ चाहिए।
आम आदमी को आश्वासन नहीं, जवाबदेह प्रशासन चाहिए।
और सबसे बढ़कर—उसे भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था चाहिए।**