20/12/2023
#बहुत_से_लोग_मेरी_आवाज_सुनो_से_के_बारे_में_जानने_के_लिए_और_जुडनें_के_लिए_फोन_वाट्सऐप_मेल_कर_पूछ_रहे हैं, सब जान जाए इसलिए इसको पढ़ें और सेयर करें क्योंकि इन्वायरी करने वालों से लोड बहुत बढ़ गया है :-
"मेरी आवाज सुनो" का उद्देश्य और कार्य विशेष प्रकार का है, भारत में पहली बार ऐसा संगठन बनाया जा रहा है :-
(वृहद जानकारी मेमोरेंडम में है )
ोई_भी_पार्टी_विपक्ष_में_होती_है_तो सरकारों के उपर पत्र या RTI लगा कर ऐसी-तैसी करती है वहीं विपक्ष से सरकार में आ जाने पर RTI खत्म करना चाहती हैं -
कोई भी पार्टी जब विपक्ष में होती है तो सरकार के कमियों के विषय में "बाल का खाल" निकाल कर सरकारों के "ऐसी की तैसी" करती रहती है , RTI लगा-लगाकर सरकारों का जीना हराम कर देती है और खुद फायदा पा जाती है, इसी RTI के आधार पर लाभ ले कर और अन्य तरीकों से चुनाव लड़ती हैं और जीत जाती हैं । जीतने के बाद इसी आर.टी.आई को खत्म कर देना चाहती हैं और नजरअंदाज करती हैं। क्योंकि आर.टी.आई सरकारों के ही गले का फंदा होता है।
किसी भी पार्टी की बात की जाए तो सभी पार्टियां अपना-अपना जातिवादी संगठन, व्यापारिक संगठन , यूथ संगठन, महिला संगठन, किसान संगठन, इत्यादि संगठन बनाते रहते हैं लेकिन क्या आज तक किसी भी पार्टी ने भले विपक्ष में होती तो RTI हथियार बताती हो लेकिन कोई भी दूध की धुली पार्टी अपने विधान सभा स्तर पर RTI का गठन किया है ? या जनपद स्तर पर या प्रदेश स्तर पर आर.टी.आई का गठन किया है ? किसी पार्टी ने राष्ट्रीय स्तर पर आरटीआई का गठन किया है ? बिल्कुल नहीं किया है । क्यों नहीं किया है ? कभी आप ने सोचा है ? क्योंकि "RTI सरकारों के ही गले की हड्डी होती है" तो कोई भी सरकार या दूध की धुली पार्टी तक अपने गले की हड्डी क्यों रहने देना चाहेगी ? या RTI संगठित क्यों होने देना चाहेगा ? इसीलिए "मेरी आवाज सुनो" देश के प्रत्येक जनपद स्तर पर आर.टी.आई की टीम खड़ी कर रही है। प्रदेश स्तर पर RTI की टीम ( जिसमें जनपद स्तर पर, प्रदेश स्तर पर, राष्ट्रीय स्तर पर कम से कम 2 सोशल व्यक्ति, 2 समाज से जुड़े वकील जो प्रवक्ता भी रहेंगे, कम से कम 10 महिलाएं, कम से कम 10 किसान) खड़ी की जा रही है और राष्ट्रीय स्तर पर आरटीआई टीम खड़ी की जा रही है।
("मेरी आवाज सुनो" की प्रस्तावना जरुर पढ़े)
ुप्रीम_कोर्ट_के_कितने_वकीलों_के_नाम_जनता_के_डोमेन_में__सुने_हैं?-
जाहिर है बहुत से अच्छे वकील हैं लेकिन कुछ गिने चुने वकीलों का ही नाम आप पब्लिकली सुने होंगे जिसमें से प्रशांत भूषण सुब्रमण्यम स्वामी इत्यादि हैं आखिर आप इतने ही लोगों का नाम क्यों सुने हैं ? ऐसा नहीं है कि ऐ बहुत से जनता के केस जीत जाते होंगे। आप एक बार सोचिए। प्रशांत भूषण जी सुब्रमण्यम स्वामी ऐसे नाम है जो आर.टी.आई के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर कुछ बड़े-बड़े घोटालों को उजागर किये है, जिससे जनमानस में एक अच्छा संदेश गया है। अगर प्रशांत भूषण सुब्रमण्यम स्वामी "राष्ट्रीय स्तर पर" दिल्ली में बैठकर देश के लिए कुछ अच्छा RTI के माध्यम से कर सकते हैं तो अपने "जनपद स्तर पर" और "प्रदेश स्तर पर" एवं "राष्ट्रीय स्तर पर" हम लोग भी ऐसे जुझारू, संघर्षरत वकीलों आदि की टीम खड़ा कर बहुत कुछ बेहतर कर सकते हैं।
ी_का_आफिस_में_काम_कराने_पर_चप्पलें_घिस_जाती_हैं_किंतु_वकील उसी आफिस में आसानी से काम करा लेता है आखिर क्यों -
जिले के आला अफसर के पास एक सामान्य व्यक्ति कोई काम कराने जाता है तो आफिसर के गेट पर बैठा चपरासी हर बार टरका देता है और आफिस के चक्कर लगाते हुए आदमी का चप्पल घिसता रहता है लेकिन काम नहीं होता। वही एक "वकील" अगर उसी ऑफिस में चला जाए तो चपरासी की औकात नहीं होती है वकील को अधिकारी से मिलने से रोक दें, वकील ऑफिसर के चेंबर में घुस जाता है तो आफिसर ईज्जत से बैठता है और चाय-पानी वकील से पूछता है ,फिर पूछता है कि मेरे लिए क्या सेवा है तो वकील काम बताते है तो अगर अधिकारी कर दिया तो ठीक नहीं किया और ना-नुकुर किया तो वकील वही कानून का पाठ पढ़ा देता है और एक तरह जबरदस्ती काम करा लेता है । वैसे ही हम चाहते हैं कि प्रत्येक जनपद में दो वकील "मेरी आवाज सुनो" के प्रतिनिधि रहेगें और वही प्रवक्ता भी रहेंगे । SHO व अन्य अधिकारी तक गलत काम और हीला-हवाली करने से हजार बार सोचेगें और बचेंगे अन्यथा कानून के शिकंजे में जगह-जगह से दरोगा व अन्य अधिकारी अपना नौकरी और आफत की जान बचाते हुए नजर आएगें। क्योंकि "मेरी आवाज सुनो" की ताकत हमारे वकील हैं, महिलाएं हैं, किसान हैं, व्यापारी हैं, युवा इत्यादि हैं।
िफल_क्यों हो रही ? सरकार, विपक्ष दोषी हैं । क्योंकि सरकारों के गले की हड्डी RTI है:-
RTI विफलता का प्रमुख कारण उदाहरण से समझाते हैं-
मान लीजिए एक व्यक्ति सुदूर गांव से आर.टी.आई लगाता है लेकिन उसके पास आने जाने तक का साधन नहीं है तो या एक बार दो बार जिले पर चला जाता है और किसी वजह से RTI जिले स्तर पर खारिज हो जाती है या पैसा न होने से अपील पर नहीं पहुंच पाता है तो खारिज हो जाती है या प्रदेश मैं अपीलीय आरटीआई लगाया जाता है तो वहां जाना भी पड़ता है और अगर समय से न जा सके या पैसा न होने से इतनी दूर न जा पाए तो RTI खारिज या विरोध में फैसला भी हो जाता है लेकिन अगर मान लीजिए कि "मेरी आवाज सुनो का प्रतिनिधि" "जनपद स्तर पर" और "प्रदेश स्तर पर" हमारा "वकील प्रतिनिधि" है तो व्यक्ति को जनपद स्तर पर या प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और आरटीआई के माध्यम से सूचना की सही से सुनवाई कराने वाला हमारा वकील होगा और सूचना आने पर प्रशांत भूषण, सुब्रमण्यम स्वामी जी आदि जैसा प्रभावशाली कार्रवाई किया जाएगा। इस प्रकार हमारे आर.टी.आई एक्टिविस्ट और वकील हमारे उस जनपद प्रदेश और देश स्तर के लीडर रहेंगे।
#किसानों_का_दुर्दशा_कराने_में_किसानों_के_ही_नेता_हैं-
किसानों के नेता सभी पार्टियों में जो सिर्फ किसानों को यूज करना जानते हैं अपनी नेतागिरी चमकाने के लिए यूज करते रहते हैं और यह नेता क्या करते हैं मान लीजिए कि जंतर-मंतर पर किसानो का 10 दिन का धरना करना है तो नेता 200 किलोमीटर दायरे से किसानों को बुलाते हैं तो किसान पार्टी बंदी के वजह से कम आते हैं या बार-बार क्यों आएं? अगर मान लीजिए चेन्नई मैं कह दिया जाए कि 5 बस जंतर-मंतर पर किसानों की बस लानी है तो किसानों के पास इतना पैसा कहां है कि 10 दिन जंतर-मंतर पर प्रोग्राम के लिए 10 बस के लोगों का खर्च कई लाखों रुपए में आ जाएगा और एक बार किसान आजाएंगे तो कई साल तक आना बंद कर देंगे जबकि इन किसानों के नेताओं को राजनीति है।
सनद वह चेन्नई के किसान सन-2017 में जंतर-मंतर पर मल-मूत्र पीकर,चूहा दांत में दबा कर धरना-प्रदर्शन कर रहे थे तो दिल्ली-एनसीआर तक के किसानों ने सहयोग नहीं किया था। हमारे व साथियों के प्रयास से कुछ जगहों के किसान आए हुए थे। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि किसानों में एकता नहीं है, संगठन नहीं है, इस संगठन को संगठित करने के लिए "मेरी आवाज सुनो" काम कर रही है।
किसानों के लिए मेरी आवाज सुनो का प्रयास-
भारत के प्रत्येक जनपद से मात्र 10-10 किसान आने के लिए कह दिया जाए तो प्रत्येक जनपद के सभी किसान मिलकर 10-10 रुपए चंदे से 10 किसानों के आने-जाने, रहने, खाने का व्यवस्था आसानी से करा सकते हैं और हर बार बारी-बारी से देश के किसी भी कोने में किसान सम्मेलन, समस्याओं पर एकजुट होने हेतु जा सकते हैं। जंतर-मंतर पर हजारों लाखों किसान एकत्रित हो सकते हैं और किसी भी सरकार पर दबाव बना सकते हैं । "मेरी आवाज सुनो" यही काम कर रही है प्रत्येक जनपद स्तर पर कम से कम 10 किसानों को जोड़ रही है ताकि किसान अपने हक के लिए किसी पार्टी के दल्ले नेता का मुंह ना देखें, अपने समान का खुद मूल्य निर्धारण कराने में सक्षम हो।
प्रत्येक विधानसभा या जनपद स्तर पर 10 महिलाओं की टीम गठित कर रही है-
प्रत्येक विधानसभा स्तर पर अगर 10 महिलाओं की टीम बना दी जाए तो महिलाएं जागरुक होंगी, रोजगार सृजन कर सकती है, ट्रेनिंग ले और ले सकती हैं और अपना अधिकार लेना बखूबी जान जाएंगीं। मान लीजिए दिल्ली में 70 विधानसभा है प्रत्येक विधानसभा से 10-10 महिलाएं निकल जाएं तो 700 महिलाएं होती हैं, और 700 महिलाएं किसी भी सरकार को नाकों चने चबवा सकती हैं। "मेरी आवाज सुनो" पूरे देश में प्रत्येक विधानसभा या जनपद से कम से कम 10 महिलाओं को जोड़ने का काम कर रही है। महिलाओं को रोजगार दिलाना , प्रशिक्षण देना "मेरी आवाज सुनो" की अहम जिम्मेदारी है।
(विस्तृत मेमोरेंडम में डिटेल है)
"मेरी आवाज सुनो" व्यापारियों को संगठित कर रही है-
प्रत्येक जनपद में 10-10 व्यापारियों का जोड़ने का काम कर रही है ताकि सामाजिक संस्था को सहयोग करने वाले व्यापारी समाज के विभिन्न वर्गों के उत्थान के लिए सहयोग कर सकें।
"मेरी आवाज सुनो" के सभी जुड़े सदस्यों को मदत करना व लाभ पहुंचाने का प्रयास इत्यादि करना।
1- भविष्य में सस्ता राशन इत्यादि सामान मुहैया कराने का हर संभव प्रयास करना।
2- पर्यावरण पर कार्य करना
3- यूथ लड़के-लड़कियों के लिए काम करना।
4- स्कूलों में कंप्यूटराइज मॉडल शिक्षा उपलब्ध कराना।
5- भारतीय सभ्यता संस्कृति को अक्षुण्य बनाए रखने के लिए कार्य करना।
6- विभिन्न धार्मिक कार्यों का आयोजन करना।
7-राजनीतिक कार्यों का आयोजन करना।
8- नशा मुक्ति के लिए कार्य करना।
9- सरकार से विल्डर प्रथा पर रोक लगवाना व उस काम को हाथ में लेकर गांवों, शहरों के बेरोजगारों को रोजगार मुहैया कराना।
10- बहुत से अन्य कार्ययोजना मेरी आवाज सुनो के माध्यम से देश के सभी जगहों पर चलाना है।
11-वेब साईट- meriaawazsuno.org या फेसबुक पेज , यूट्यूब से अब तक के किए गए कार्यों को आप देख सकते हैं, अपनी सदस्यता देख सकते हैं, दिए हुए डोनेशन देख सकते हैं।*
12- आप सवाल पूछ सकते हैं, अपनी राय दें सकते हैं।
13- शिक्षित बेरोजगारों को गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराना।
14- सम्मान समारोह आयोजित करना ।
15- प्रतिभाओं को खोजना व उचित मंच मुहैया कराना।
16- विश्व के अन्य देशों में संगठन का विस्तार करना और उस देश के लोगों के माध्यम से वहां के लिए विभिन्न लोकल, राष्ट्रीय ईत्यादि मुद्दों पर, कार्ययोजनाओं पर कार्य करना ।*
(मेमोरेंडम में बिस्तृत जानकारी उपलब्ध है जो संरक्षित है)
#कृपया_कर्मठ_निडर_सक्रिय_व्यक्ति_ही_जुड़े_हवाबाज_व_दिखावटी_लोगों_के_लिए_मेरी_आवाज_सुनो_में_कोई_ जगह नहीं है ।
जुड़ने के लिए मेल करें-
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वेबसाइट- www.meriaawazsuno.org
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Meri Aawaz Suno is an NGO that works for the betterment of the society and mankind