30/05/2019
प्रेरणादायक कहानी
"सुनो..कल मम्मी पापा आ रहे हैं दस दिन रूकेंगे..
एडजस्ट कर लेना..
"मयंक ने स्वाति को बैड पर लेटते हुए कहा।
"..कोई बात नही आने दिजिए आपको शिकायत का कोई मौका नही मिलेगा.."
स्वाति ने भी प्रति उत्तर में कहा और स्वाति ने लाइट बन्द कर दी और दोनो सो गए।
सुबह जब मयंक की आंख खुली तो स्वाति बिस्तर छोड़ चुकी थी। "चाय ले लो..स्वाति ने मयंक की तरफ चाय की प्याली को बढाते हुए कहा..
अरे तुम आज इतनी जल्दी नहा ली..
हां तुमने रात को बताया था कि आज मम्मी पापा आने वाले हैं तो सोचा घर को कुछ व्यवस्थित कर लूं..स्वाति ने चाय की चुस्की लेते हुए कहा..वैसे..किस वक्त तक आ जाएंगे वो लोग..
"दोपहर वाली गाड़ी से पहुंचेंगे चार तो बज ही जाऐंगे..
मयंक ने चाय का कप खत्म करते हुए जवाब दिया..
"स्वाति..देखना कभी पिछली बार की तरह.."नही नही..पिछली बार जैसा कुछ भी नही होगा..स्वाति ने भी कप खत्म करते हुए मयंक को कहा और उठकर रसोई की तरफ बढ गई।
मयंक भी आफिस जाने के लिए तैयार होने के लिए बाथरूम की तरफ बढ गया।
नाश्ता करने के बाद मयंक ने स्वाति से पूछा "..तुम तैयार नही हुई..क्या बात..आज स्कूल की छुट्टी है..??..
" नही..आज तुम निकलो मैं आटो से पहुंच जाऊंगी..थोड़ा लेट निकलूंगी..स्वाति ने लंच बाक्स थमाते हुए मयंक को कहा।
"..बाय बाय..कहकर मयंक बाइक से आफिस के लिए निकल गया। और स्वाति घर के काम में लग गई..
"..मुझे तो बहुत डर लग रहा है मैं तुम्हारे कहने से वहां चल तो रहा हूं लेकिन पिछली बार बहू से जिस तरह खटपट हुई थी मेरा तो मन ही भर गया था।
ना जाने ये दस दिन कैसे जाने वाले हैं..
मयंक के पिताजी मयंक की मम्मी से कह रहे थे।
"..अजी..भूल भी जाइये..बच्ची है..
कुछ हमारी भी तो गलती थी।
हम भी तो उससे कुछ ज्यादा ही उम्मीद लगाए बैठे थे।
उन बातों को सालभर बीत गया है..
क्या पता कुछ बदलाव आ गया हो।
इंसान हर पल कुछ नया सीखता है..
क्या पता कौन सी ठोकर किस को क्या सिखा दे..
मयंक की मां ने पिताजी को हौंसला देते हुए कहा..
मयंक की मां यह कहकर चुप हो गई और याद करने लगी..
दो भाइयों में मयंक बड़ा था और विवेक छोटा।
मयंक गांव से दसवीं करके शहर आ गया..
आगे पढने और विवेक पढाई में कमजोर था इसलिए गांव में ही पिताजी का खेती बाड़ी में हाथ बंटाने लगा।
मयंक बी_टेक करके शहर में ही बीस हजार रू की नौकरी करने लगा।
स्वाति से कोचिंग सेन्टर में ह