17/03/2026
⚖️ भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस Surya Kant और जस्टिस Joymalya Bagchi शामिल थे, ने कानूनी शिक्षा की अवधि को लेकर दाखिल जनहित याचिका (PIL) पर महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं।
यह याचिका अधिवक्ता Ashwini Kumar Upadhyay द्वारा दायर की गई है, जिसमें 5-साल के इंटीग्रेटेड कानून पाठ्यक्रम को 4-साल करने तथा कानूनी शिक्षा के ढांचे की समीक्षा के लिए एक Legal Education Commission / Expert Committee गठित करने की मांग की गई है।
🔎 कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियां:
👉 न्यायपालिका कानूनी शिक्षा जैसे नीतिगत मामलों में अपने विचार “थोप” नहीं सकती।
👉 इस विषय पर शिक्षाविदों, विधि विशेषज्ञों, बार, नीति-विश्लेषकों और अन्य हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श आवश्यक है।
👉 अगर विश्वविद्यालय स्वयं कोर्स की अवधि कम करना चाहते हैं, तो वे संबंधित नियामक संस्थाओं के साथ मिलकर निर्णय ले सकते हैं — इसके लिए हर बार न्यायिक आदेश जरूरी नहीं।
📚 याचिकाकर्ता की दलील:
🔹अधिकांश पेशेवर कोर्स 4-साल के हैं, जबकि कानून की पढ़ाई 5-साल की है।
🔹लंबी अवधि के कारण प्रतिभाशाली छात्र और मध्यम वर्गीय परिवार आर्थिक व समय संबंधी दबाव महसूस करते हैं।
🔹National Education Policy 2020 के अनुरूप कानूनी पाठ्यक्रम की अवधि व सिलेबस की समीक्षा जरूरी बताई गई।
🏛️ कोर्ट ने क्या आदेश दिया?
पीठ ने मामले को अप्रैल 2026 में आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
📄 केस डिटेल्स:
ASHWINI KUMAR UPADHYAY v. UNION OF INDIA & ORS.
Writ Petition (Civil) No. 453/2025
⚠️ इससे पहले भी इसी याचिकाकर्ता द्वारा 3-साल के एलएलबी की मांग वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट खारिज कर चुका है, यह कहते हुए कि विधि पेशे में परिपक्वता अत्यंत महत्वपूर्ण है।
💬 आप क्या सोचते हैं —
क्या 5-साल का कानून कोर्स सही है या इसे 4-साल किया जाना चाहिए?
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