लक्ष्मी श्रीवास्तवा की कवितायें

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लक्ष्मी श्रीवास्तवा की कवितायें हृदय की सम्वेदनाओं का सार है काव्य।

09/11/2025

कभी मैं आप लिखती हूँ कभी मैं तुम लिखती हूँ,
कभी बिन लिखे ही खत को मैं सीने से लगाती हूँ।

हर अक्षर में प्यार भरा हो शब्दों में इक़रार भरा हो,
खत के पंक्ति विराम में दिल का इज़हार छुपाती हूँ।

मन भीगा आँखें भी भीगी कागज़ की पाती भी भींगी,
तुम आओगे मिलने जल्दी झूठी आस बधाती हूँ।

20/03/2025

माजी की गली जब भी गुजरा हूँ,
तिरे ख्याल के आगे मैं बिखरा हूँ।

ना थी हसरत अगर मुझे पाने की तुझे
फिर क्या बात मैं तेरी ग़ज़ल का मिसरा हूँ

16/10/2024

उसको जब तुम पा जाओगी
सच में तुम घबरा जाओगी,
तुमको इसका भान न होगा
मिलते ही शरमा जाओगी

16/10/2024

तुम मुझको जान ना पाए
सच कहती हूँ पहचान ना पाए

जब भी मैं नयन भर रोई
सारी- सारी रात ना सोई

उठ कर भोर तलाशा मैंने
सपनों को भी फांसा मैंने

क्या क्या जतन किया है मैंने
खुद को तपन किया है मैंने

कब मुरेड़ से चिड़िया भागी
आहट पा कर बुढ़िया जागी

मुझको कुछ भी भान नहीं है
या कह दूं की ज्ञान नहीं है

जगती रही या सोयी थी मैं
क्यों सूरज को नमन किया है

ऐसा कुछ भी शोध नहीं है
ऐसा कह लो बोध नहीं है

लक्ष्मी श्रीवास्तवा 'कादम्बिनी'

16/10/2024

कितना तुझको प्यार करूँ मैं,
बोलो क्या-क्या नाम धरूँ मैं।
या तुझको बेनाम करूँ ,
खुद को ही बदनाम करूँ मैं।

जो मन में आए कह दो तुम
जो मन को भाये कह दो तुम,
साँसों का कम्पन मत देखो,
नयन भींग जाए कह दो तुम।

16/10/2024
16/10/2024

एक फूल बालों में धर दो,
एक फूल अधरों पर धर दो।
हाथों को रीता रहने दो,
कमल नयन आँसू से भर दो।

16/10/2024

चाँद- चाँद बस चाँद चाहिए,
मन को पूरा बिस्वास चाहिए।

चाँद है तो चाँद का अहसास चाहिए,
शरद रात चाँद की बस बात चाहिए।।

बाँध सके बन्धन भुजपाश चाहिए,
चाँद के मुख पर प्रीत छाप चाहिए।

तेरा चाँद मेरा चाँद हिस्साबाँट चाहिए,
बस और बस मुझे मेरा चाँद चाहिए।

ना भोर चाहिए ना ही साँझ चाहिए,
चाहिए तो केवल चाँद रात चाहिए।

आँचल को समुचित विस्तार चाहिए,
पूरी रात चाँद की बरसात चाहिए ।

लक्ष्मी श्रीवास्तवा "कादम्बिनी'

28/09/2024

❤️❤️❤️❤️❤️❤️

15/07/2024

जाना था इक रोज चले ही जाते तुम,
शायद कुछ और ठहर कर जाते तुम।
पलकें तो ना भीगीं तुम्हारे जाने से,
अलकें तो बिखरा कर के ही जाते तुम।

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